
Akshay Kumar Jha
सोशल मीडिया नेताओं के लिए एक हथियार की तरह हो गया है. खास कर चुनाव से पहले वैसे नेता भी सोशल मीडिया पर छाये हुए हैं, जिन्हें इंटरनेट का आइ भी नहीं पता.
इनमें से कुछ ऐसे नेता हैं, जो युवा हैं, पढ़े-लिखे हैं. सोशल मीडिया हैंडल करने में एक्सपर्ट हैं. उन्हीं में से एक हैं कुणाल षाड़ंगी.
देखें वीडियो-
अभी हाल ही में इन्होंने अपना राजनीतिक रंग हरा से भगवा किया है. कुणाल षाड़ंगी ने 18 अक्टूबर (यानी तब जब इन्होंने बीजेपी में जाने का मन बना लिया था) को अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया. वीडियो के साथ उन्होंने लिखा –
“17 साल के मासूम पापुन धाड़ा के जामबोनी हाई स्कूल के समीप तालाब में डूबने की सूचना मिली, तो भागते हुए पहुंचा. एम्बुलेंस आने में देरी के कारण अपने वाहन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर आया. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. ईश्वर परिवारजनों को इस दुख को सहने की शक्ति दे.#RIP”
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कुणाल षाड़ंगी का Video Analysis
ट्विटर पर जो वीडियो कुणाल षाड़ंगी ने डाला है. वो घटना के बाद महज एक इत्तेफाक नहीं था. बल्कि पूरी शूटिंग प्लांटेड थी. पूरे वीडियो में छह कट हैं.
1. पहले कट से ही यह साफ हो जाता है कि इस दुखद घटना के बाद उन्होंने वाकई दिल से गरीब की मदद की है, या वीडियो बना कर हीरो बनने की कोशिश की है. पहले कट में दिखाया जाता है कि कुणाल षाड़ंगी की गाड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचती है.
वो लगभग सिंघम की स्टाइल में चलती गाड़ी का गेट खोल कर अपने स्कॉर्पियो से उतरने की कोशिश करते हैं. इसी सीन से सवाल उठने शुरू हो जाते हैं.
उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि घटना के बाद मुखिया ने फोन कर उन्हें इस बात की सूचना दी कि एक युवा तालाब में डूब गया है.
एम्बुलेंस नहीं होने की वजह से उन्हें युवक को अपनी गाड़ी में लाना पड़ा. लेकिन इससे पहले उन्होंने अपने किसी खास को अस्पताल पहुंचने का निर्देश दिया और वीडियो बनाने को कहा.
कैमरा लेकर पहले से तैनात बंदा कुणाल के पहुंचने के साथ ही वीडियो बनाने लगता है. सवाल उठता है कि आखिर कैसे किसी को जानकारी होती है कि कुणाल षाड़ंगी किसी घायल को लेकर आने वाले हैं और उनका वीडियो बनाना है.
2. दूसरे कट में कुणाल और एक महिला अस्पताल से स्ट्रेचर लेकर आते नजर आ रहे हैं. इसकी भी बाकायदा वीडियोग्राफी हो रही है.
वीडियो बनानेवाले को साफ निर्देश था कि वो कुछ नहीं करेगा सिर्फ वीडियो बनायेगा. वीडियो बनानेवाला चाहता तो घायल को विधायक जी की गाड़ी से उतारने में मदद कर सकता था. या फिर अस्पताल से स्ट्रेचर खींच कर गाड़ी तक ला सकता था.
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लेकिन ऐसा उसने हरगिज नहीं किया. क्योंकि वो अपने आका के आदेश की तालीम कर रहा था.
3. तीसरे कट में अब घायल युवक स्टेचर पर लेटा हुआ है. कुणाल के अलावा कुछ लोग स्ट्रेचर को घेरे हुए हैं. डॉक्टर घायल का हाल जान रहे हैं. और दूसरी तरफ कैमरा रोल है.
वो भी पूरी शिद्दत के साथ कुणाल षाड़ंगी को फोकस करते हुए. कैमरा का जरा भी कुणाल से फोकस शिफ्ट नहीं होता है.
4. चौथे कट में विधायक कुणाल षाड़ंगी कैमरे के सामने डॉक्टर बन जाते हैं. वो अपनी तरफ से जांच कर तसल्ली कर रहे हैं और कैमरा मैन अपने फ्रेम में लगातार कुणाल को रखे हुए है.
5. पांचवें कट में घटना का शिकार हुए युवक की परिजन उसके पास आती है. कुणाल षाडंगी बगल में खड़े हैं. काफी गंभीर मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं.
इस दुख की घड़ी में किसी का भी दुखी होना आम है. लेकिन लगातार कैमरा से रियेक्शन कवर करते रहना कोई आम बात नहीं है.
6. गौर करनेवाली बात है कि कुणाल के मुताबिक अस्पताल पहुंचनेवालों में कुणाल सबसे अव्वल हैं. वहां कोई मीडिया नहीं है. लेकिन उन्होंने मीडिय़ा बाइट दी. बाइट उसी कैमरामैन को दी जो कुणाल की पूरी शूटिंग कर रहा था.
इन्हीं सब बातों से ऐसे वीडियो पर सवाल उठने लगते हैं. जो कुणाल षाड़ंगी के इस वीडियो पर उठ रहे हैं. लेकिन पब्लिक है सब जानती है.
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