
Abinash Mishra
Jamshedpur : आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग के नाम पर प्लॉट पर कब्जा जमाने की परंपरा बहुत पुरानी है. इसमें एक नहीं, सैकडो बड़े-छोटे उद्योगपति शामिल हैं.
लेकिन इस बार झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जियाडा) की नींद खुल गयी है. जियाडा ने फैसला किया है कि ऐसे लोग जो कंपनी के नाम पर वर्षों से प्लॉट पर कब्जा जमाये बैठे हैं उनके प्लॉट का लीज रद्द करेगी.
जियाडा इसके लिए औद्यौगिक क्षेत्र में सर्वेक्षण की तैयारी में है. 15 नंवबर तक इस तरह के कब्जे वाले प्लॉट की डीटेल और लिस्ट जियाडा निदेशक नेहा अरोड़ा को सौंप दी जायेगी.
उसके बाद कंपनी मालिकों को प्लॉट रद्द करने का नोटिस भेज दिया जायेगा.
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2700 से ज्यादा प्लॉट, 550 से ज्यादा का गलत इस्तेमाल
औद्योगिक झेत्र में 2700 से ज्यादा प्लॉट हैं जो लीज पर दिये गये हैं लेकिन साढ़े पांच सौ से ज्यादा ऐसे प्लॉट है जिसका गलत फायदा उठाकर या तो लोग घर बनाकर रह रहे हैं या किसी तीसरे को भाड़े पर दे दिया गया है.
ऐसे भी प्लॉट हैं जिन पर बनी फैक्ट्री वर्षों से ठप और जर्जर हो चुकी है, जिनमें सालों से उत्पादन नहीं हुआ है. औद्यौगिक क्षेत्र में दशको से ऐसे प्लॉट निजी लोगों की कमाई का जरिय़ा बने हुए हैं. इसी कारण कोई प्लॉट सरेंडर करने को तैयार नहीं है.
जियाडा क्यों देती है प्लॉट
नियम के अनुसार राज्य में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जियाडा लीज पर ऐसे प्लॉट उद्योग लगाने के लिए देती है. साथ में बिजली, पानी की सुविधा भी मिलती है.
लेकिन आदित्यपुर औद्यगिक क्षेत्र में शुरुआत में ही इन प्लॉटों की बंदरबांट हुई जिसका नुकसान जियाडा को अब समझ आ रहा है.
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बोर्ड नहीं रहने पर भी लगेगा फाइन
जियाडा ने ये भी स्पष्ट किया है की जिन कंपनियों के गेट पर नाम और जरूरी डीटेल के बोर्ड नहीं होंगे उनपर भी 10,000 रुपये का फाइन ठोका जायेगा.
फाइन नहीं देने पर 6 माह के जेल का भी प्रावधान है. साथ ही डेडलाइन क्रॉस करने पर 100 रुपये प्रतिदिन का फाइन अलग से देना होगा.
तीन साल पहले भी हुआ था विचार
आपको बता दें कि तीन साल पहले भी इस तरह के फैसले को लेकर विचार जियाडा में हुआ था लेकिन उसके बाद मसला क्यों दबा ये कहना मुश्किल है.
खैर इस बार जियाडा एक बार फिर से सख्त हुई है और किसी को बख्शने के मूड में नहीं है.
क्या कहना है निदेशक का
जियाडा की क्षेत्रीय निदेशक नेहा अरोड़ा का कहना है कि इस फैसले से किसी को डरने की जरूरत नहीं है. ये एक स्वभाविक प्रक्रिया है जो हर शहर के औद्योगिक क्षेत्र में अपनायी जाती है.
जियाडा का प्रयास है कि बंद पड़ी पुरानी कंपनियों की जगह नये उद्योग को मौका मिल सके. समय के हिसाब से औद्यौगिक क्षेत्र में कई ऐसे प्लांट बंद हैं जिनके उत्पाद की डिमांड बाजार में नहीं रही. इन बंद पड़े प्लांट की जगह नये उत्पाद से जुड़े उद्योगों को जगह मिल सकेगी.
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