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सोरेन परिवार ने CNT-SPT एक्ट का उल्लंघन किया है तो जांच कर कार्रवाई करे सरकार, रोका किसने है- जेएमएम

Ranchi: झारखंड बीजेपी ने शिबू सोरेन के परिवार पर CNT-SPT एक्ट का उल्लंघन कर जमीन खरीदने का आरोप लगाया. जेएमएम ने इसपर तीखा जवाब दिया है. जेएमएम महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि केन्द्र और राज्य में बीजेपी की सरकार है. एक ही मुद्दे पर बीजेपी पिछले तीन साल से सिर्फ आरोप और बयानबाजी क्यों कर रही है? जांच कराने से क्यों डर रही है बीजेपी ?

जांच करवायें या फिर खामोश हो जाएं बीजेपी नेता- जेएमएम

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार में हिम्मत है, तो वह कार्रवाई करे. अगर जांच नहीं करवा सकती तो फिर राज्य में ओछी राजनीति न करे. उधर हेमंत सोरेन ने बीजेपी के आरोपों के जवाब में कहा था कि मेरे पास जो भी चल या अचल संपत्ति है, उसकी जानकारी चुनाव आयोग को दी जा चुकी है. अगर मैंने को ई सच छिपाया है तो राज्य और केन्द्र में बीजेपी की सरकार है, उनके पास सक्षम जांच एजेंसियां हैं. उन्हे जांच कराने से किसी ने नहीं रोका है. हेमंत सोरेन ने कहा कि मैं कहां का निवासी हूं, ये झारखंड की जनता जानती है.

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क्या है पूरा मामला ?

बीजेपी के संताल परगना के सह प्रभारी रमेश हांसदा ने आरोप लगाया था कि सोरेन परिवार ने राज्य के कई जिलों में आदिवासियों से औने-पौने दाम में जमीन लिखवा ली है. बीजेपी का आरोप है कि सोरेन परिवार ने 33 डीड के जरिए कुल 13 एकड़ जमीन गरीब आदिवासियों से लिखवाई है, जो कि CNT-SPT एक्ट का उल्लंघन है. बीजेपी ने हेमंत सोरेन से पूछा था कि वे बताएं कि वे किस थानाक्षेत्र के निवासी हैं ? रमेश हांसदा ने आरोप लगाया था कि हेमंत ने पत्नी कल्पना सोरेन के नाम पर रांची में जमीन खरीदी है. 2009 में हेमंत ने जमीन मालिक को महज 9 लाख रुपये दिये थे, जबकि जमीन की वास्तविक कीमत 80 लाख थी. रमेश हांसदा ने ये भी आरोप लगाया कि 33 डीड के जरिए हेमंत सोरेन ने धनबाद के गोविंदपुर और बोकारो, रांची के अरगोड़ा और अनगड़ा, चास के कमलडीह, दुकरा, बरवा और दमकोला में जमीन खरीदी है जो कि CNT-SPT एक्ट का उल्लंघन है.

क्या कहती है CNT-SPT एक्ट की धारा-46 ?

छोटानागपुर काश्तकारी नियम की धारा-46 के अनुसार एक आदिवासी संबंधित उपायुक्त की अनुमति से दूसरे आदिवासी की जमीन खरीद सकता है. बशर्ते वह विक्रेता के ही थानाक्षेत्र का निवासी हो और विक्रेता को जमीन का उचित मूल्य दिया है. बीजेपी का आरोप है कि सोरेन परिवार ने 33 डीड के जरिए विभिन्न जिलों में जमीन तो खरीदी ही, सभी डीड में उन्होने अलग-अलग निवास स्थान बताया है.

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