राँची: झारखण्ड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के माननीय अध्यक्ष डॉ शाहिद अख्तर ने झारखण्ड के मानव संसाधन मंत्री महोदया को पत्र लिखकर अल्पसंख्यक विद्यालयों/महाविद्यालयों को अल्पसंख्यक संस्थान का प्रमाण-पत्र निर्गत करने का अनुरोध किया है।
पत्र में अध्यक्ष ने लिखा है कि झारखण्ड राज्य में शिक्षा का स्तर ऊंचा बनाये रखने में अल्पसंख्यक विद्यालयों एवं महाविद्यालयों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सरकार द्वारा राज्य के निवासियों में शिक्षा के प्रचार-प्रसार हेतु काफी प्रयास किया जा रहा है परन्तु केवल सरकारी प्रयास से आमलोगों में शिक्षा का स्तर बनाये रखना संभव नहीं है। इसके लिये एक बहुत बड़ी राशि की आवश्यकता है जिसे झारखण्ड जैसा पिछड़ा राज्य वहन करने की स्थिति में नहीं है। राज्य के बच्चों को शिक्षित करने हेतु स्वयंसेवी संगठनों की मदद जरूरी है। जिसे राज्य के अल्पसंख्यक विद्यालय एवं महाविद्यालय पूर्ण करने में सक्षम हैं। परन्तु सरकारी स्तर पर इन संस्थानों को प्रोत्साहित नहीं कर इनके काम में अवरोध पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।
आयोग को यह लगातार शिकायत मिल रही है कि अल्पसंख्यक विद्यालयों को सरकार द्वारा न तो आर्थिक मदद दी जाती है और न हीं ससमय वेतन दिया जाता है। कर्इ ऐसे अल्पसंख्यक संस्थान हैं जो बिना सरकारी आर्थिक मदद के हीं संचालित हैं। इन अल्पसंख्यक संस्थानों को राज्य सरकार द्वारा अल्पसंख्यक संस्थान का प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में काफी असुविधा हो रही है। मौलाना आजाद फाउनडेशन, नर्इ दिल्ली द्वारा राज्य के अल्पसंख्यक संस्थानों के आधारभूत संरचना के विकास हेतु आर्थिक मदद दी जाती है। इसके लिये आवेदन किये इन अल्पसंख्यक संस्थानों को राज्य सरकार द्वारा निर्गत अल्पसंख्यक संस्थान का प्रमाण-पत्र की मांग की गर्इ है। राज्य के अल्पसंख्यक संस्थानों के पास प्रमाण-पत्र न होने के कारण इन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध नहीं हो पा रही है। अगर इन संस्थानों को राज्य सरकार द्वारा स-समय प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया जाय तो ये केन्द्र सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से लाभान्वित हो सकेगें एवं राज्य सरकार पर बोझ घटेगा।




