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माता के भजन से नवरात्रि में करिये मां दुर्गा को प्रसन्‍न, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं

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NewsWing Desk: शारदीय नवरात्र का त्‍योहार शुरू हो गया है. इसी के साथ गांव-गांव शहर-शहर मां की भक्ति में सराबोर हो गया है. ऐसे में आप भी ‘माता के भजन‘ से इस नवरात्रि मां दुर्गा को प्रसन्‍न कर सकते हैं. यहां दुर्गा मां की कुछ लोकप्रिय आरती का ‘टेक्‍स्‍ट फॉर्मेट’ देने जा रहे हैं, जिसे पढ़कर या याद करके माता के भजन से देवी मां को खुश कर सकतें हैं. अगर आप ऐसा करेंगे तो आप अद्भुत भक्ति में लीन माता माता के भजन के साथ आत्‍मसंतुष्टि का अनुभव करेंगे.

9 दिनों तक चलने वाली नवरात्रि में आरती और माता के भजन का अपना खास महत्‍व होता है. दुर्गा जी की दिल से भक्‍ति करने तथा आरती गाने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. माता दुर्गा की आरती का अत्यंत महत्व है इसलिए उनकी पूजा करते वक्‍त ये प्‍यारे भजन और आरती गाना ना भूलें.

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माता के भजन व आरती इस प्रकार हैं: 

#1. जय अम्बे गोरी

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी

तुमको निशि दिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पार साजै

केहरि वाहन राजत, खडूग खप्पर धारी
सुर – नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति

शुम्भ निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मतमाती

चण्ड – मुण्ड संहारे, शौणित बीज हरे
मधु – कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरु
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता
भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति

अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख – सम्पत्ति पावे

#2.  अम्बे तू है जगदम्बे काली

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेर ही गुण गायें भारती,
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती

तेर भक्त जानो पर मैया भीड़ पड़ी है भारी,
दानव दल पर टूट पड़ो माँ कर के सिंह सवारी
सो सो सिंघो से है बलशाली,
है दस भुजाओं वाली,
दुखिओं के दुखड़े निवारती

माँ बेटे की है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता,
पूत कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता
सबपे करुना बरसाने वाली,
अमृत बरसाने वाली,
दुखिओं के दुखड़े निवारती

नहीं मांगते धन और दौलत ना चांदी ना सोना,
हम तो मांगे माँ तेरे मन में एक छोटा सा कोना
सब की बिगड़ी बनाने वाली,
लाज बचाने वाली,
सतिओं के सत को सवारती

माता के भजन व आरती से आप उनकी महिमा का गुणगान कर सकते हैं. यदि आपको यह आरती पसंद आई है तो इसे माता के भक्‍तों को शेयर करना ना भूलें.

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