JharkhandRanchi

राजधानी के कोचिंग सेंटरों में नहीं है आग से निपटने की तैयारी, कांप्लेक्स के अग्निशमन यंत्रों के भरोसे चल रहे कोचिंग सेंटर

  • हरिओम टावर के अग्निशमन यंत्र में न ही मैन्यूफैक्चरिंग और न ही एक्सपायरी डेट लिखी है
  • प्रबंधकों ने कहा हर साल कराते हैं रिफिल, नियमतः छह माह में रिफिल होना चाहिए

Saurabh/Chhaya

Ranchi: जिस तरह से सूरत के कांप्लेक्स में आग लगी और बच्चों समेत 20 लोगों की मौत हुई, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया. न्यूज विंग ने राजधानी रांची स्थित ऐसे प्रमुख कांप्लेक्स का जायजा किया, जहां अधिक संख्या में कोचिंग संस्थान हैं. क्लब रोड स्थिति सिटी सेंटर, सकुर्लर रोड स्थित हरिओम टावर, जगन्नाथ कांप्लेक्स और इन इलाकों के आस-पास स्थित कोचिंग संस्थानों में आग से सुरक्षा के कोई खास उपाय नहीं हैं. किसी भी कांप्लेक्स में अग्निशमन यंत्र सुव्यवस्थित नहीं है. सिटी सेंटर के इतने बड़े कांप्लेक्स में कहीं भी अग्निशमन यंत्र नहीं देखा गया. कांप्लेक्स निमार्ण कार्य जारी है, जो कमरे बन चुके हैं, वहां कोचिंग या दुकान खुली हैं. फिर भी बिल्डिंग प्रबंधन की ओर से कोई उचित व्यवस्था नहीं है. जबकि छात्रों का आना जाना यहां लगा रहता है.

इसे भी पढ़ें – कतरास में अब भी है सांप्रदायिक तनाव, शांति बहाल करने की कोशिश जारी

हरिओम टावर में लगे किसी भी अग्निशमन यंत्र में नहीं है तारीख

हरिओम टावर के दोनों तरफ बनी सीढ़ियों के पास अग्शिमन यंत्र लगा हुआ था. पर जब इसे ध्यान से देखा गया तो पता चला कि किसी भी अग्निशमन यंत्र में न ही मैन्यूफैक्चरिंग डेट लिखी है और न ही एक्सपाइरी डेट. सात तल्लों के इस भवन में लगभग 35 अग्निशमन यंत्र लगे हैं. लेकिन किसी में भी तारीख नहीं लिखी है. जबकि यहां 116 संस्थान हैं. तीसरे तल्ले के बाद सभी में कोचिंग संस्थान हैं. जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर कंप्यूटर और ग्यारहवीं और बाहरवीं तक की पढ़ाई कराते हैं. जगन्नाथ कांप्लेक्स की भी स्थिति यही है. इस भवन में रेस्तरां से लेकर कोचिंग तक है. लेकिन इस भवन में भी जितने अग्निशमन यंत्र लगे हैं, किसी में एक्सपाइरी डेट नहीं है. यहां ऊपर जाने के लिए लिफ्ट है लेकिन जो सीढ़ी है वह काफी संकरी है. किसी हादसे के दौरान लोगों को निकलने में काफी परेशानी होगी.

इसे भी पढ़ें – कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राहुल गांधी ने की इस्तीफे की पेशकश, अस्वीकार

किसी भी कोचिंग संस्थान ने अपने स्तर से नहीं लगाया अग्निशमन यंत्र

न्यूज विंग ने अलग-अलग कोचिंग संस्थानों से भी इसकी जानकारी ली. लेकिन हरिओम टावर, जगन्नाथ कांप्लेक्स और सकुर्लर रोड स्थित किसी भी संस्थान ने अपने स्तर से अग्निशमन यंत्र नहीं लगाया है. न्यूटन ट्यूटोरियल, आचार्य क्लासेस, अल्पाइन, आलोक क्लासेस, ई वर्ल्ड कंप्यूटर क्लासेस, इमफेसिज समेत कई कोचिंग संस्थानों में जाने से जानकारी मिली कि इन संस्थानों ने अपने स्तर से कोई अग्निशमन यंत्र नहीं लगाया है. जगन्नाथ कांप्लेक्स स्थित सचदेवा और स्योर सक्सेस संस्थान में भी अग्निशमन यंत्र नहीं पाया गया. सिटी सेंटर स्थित मिस्ट प्लस में एक अग्निशमन यंत्र पाया गया. जब इसे देखा गया तो पता चला कि यह 2010 का है. इसकी एक्सपाइरी डेट नहीं लिखी थी. इन भवनों में स्थित सभी कोचिंग संस्थानों ने पांच से छह कमरे लिये हुए हैं. इसके बावजूद इन कोचिंग संस्थानों ने अपने स्तर से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किये हैं.

इसे भी पढ़ें – यूपी :  मुस्लिम परिवार ने नवजात बच्‍चे का नाम रखा नरेंद्र दामोदर दास मोदी,  मां की जिद पूरी की

निदेशक और प्रबंधन ने गोल-मोल जवाब दिये

इस दौरान कुछ निदेशकों और प्रबंधन के लोगों से बात की गयी, लेकिन किसी ने भी सही जवाब नहीं दिया. हरिओम टावर स्थित न्यूटन ट्यूटोरियल के प्रबंधकों ने कहा कि एक ही कमरे में क्लास चलती है. ऐसे में अग्निशमन यंत्र की जरूरत नहीं. जबकि हरिओम टावर प्रबंधन ने जानकारी दी कि इस संस्थान के आठ कमरों में क्लास चलती है. स्योर सक्सेस की कक्षाएं दो भवनों में चलती हैं. एक स्योर सक्सेस के अपने पुराने भवन में वहीं जगन्नाथ कांप्लेक्स में. निदेशक सुनील जायसवाल जो पुराने भवन में मिले, उन्होंने शुरू में कहा कि भवन में अग्निशमन यंत्र लगा है. जब उनसे इन यंत्रों को देखने की बात कही गयी, तो उन्होंने कहा कि इस भवन में क्लास नहीं होता, इसलिए यहां अग्निशमन यंत्र की जरूरत नहीं. जगन्नाथ कांप्लेक्स स्थित भवन में संस्थान की कक्षाएं चलती हैं. वहां अग्निशमन यंत्र संस्थान ने लगाये है. इसी दौरान कुछ छात्र टेस्ट देकर निकले और जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया कि संस्थान की कक्षाएं दोनों जगह होती हैं. जबकि जगन्नाथ कांप्लेक्स में स्थित संस्थान के कार्यालय में कोई यंत्र नहीं पाया गया.

इसे भी पढ़ें – जानें वो पांच वजहें जिनसे ढहा दिशोम गुरु का अभेद्य किला

एक्सपाइरी डेट पर किसी ने ध्यान नहीं दिया होगा

हरिओम टावर में लगे अग्निशमन यंत्र की जानकारी लेने के लिए हरिओम टावर शॉप्स एंड ऑफिस ऑनर एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह से बात की गयी. उन्होंने कहा कि कांप्लेक्स में अग्निशमन यंत्र तो लगे हैं लेकिन किसी ने मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट पर ध्यान नहीं दिया होगा. उन्होंने कहा कि कांप्लेक्स में 116 दुकानें और संस्थान हैं. तीसरे तल के बाद से सिर्फ कोचिंग संस्थान हैं. हर कोचिंग संस्थान के पास सात से आठ कमरे हैं. वहीं उन्होंने कहा कि साल में एक बार अग्निशमन यंत्रों को रिफिल किया जाता है.

इसे भी पढ़ें – जानिए रांची के पैडमैन को… ग्रामीण महिलाओं की समस्या देख छोड़ी नौकरी, चार सालों से कर रहें जागरूक

हिनू में हुई थी घटना, 50 लोग फंसे थे

हाल ही में 10 मई को हिनू स्थित आनंद प्लाजा के बेसमेंट स्थित पावर रूम में आग लग गयी थी. धुआं भवन के सभी दुकानों और संस्थानों में फैलने से लगभग 50 लोग भवन में फंस गये थे. जिन्हें स्थानीय लोगों ने बालकनी से रस्सी के सहारे निकाला था. यहां आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी. हालांकि दमकल टीम के पहुंचने के पहले ही आग पर काबू पा लिया गया था, लेकिन यहां भी अग्निशमन यंत्र भवन में नहीं था, जिस कारण ऐसी घटना हुई थी.

इसे भी पढ़ें – झारखंड की सभी जेलें जुड़ेंगी ई-मुलाकात पोर्टल से, जेल में बंद कैदियों से मुलाकात करने में होगी आसानी

हर माह जांच होनी चाहिए

अग्निशमन यंत्र की जांच हर माह की जानी चाहिए. वहीं इसे कम से कम दस से बारह साल तक ही इस्तेमाल किया जा सकता है. हर छह साल में यंत्र की प्रोटेक्शन इक्युपमेंट कंपनी की ओर से संपूर्ण जांच भी होनी चाहिए. वहीं हर छह माह में इसे रिफिल करते हुए इसमें एक्सपायरी डेट भी लिखी होनी चाहिए.

इसे भी पढ़ें – राष्ट्रपति ने 16वीं लोकसभा भंग की, मोदी आज सरकार बनाने का दावा कर सकते हैं पेश

Related Articles

Back to top button