
Ranchi: रघुवर सरकार तो राज्य से चली गयी, लेकिन गांवों में पत्थलगड़ी आज भी मौजूद है. पत्थलगड़ी में लिखी पंक्तियां आदिवासी विद्रोह का सबूत हैं. ये बातें भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहीं.
भट्टाचार्य ने बिरसा मुंडा जयंती के बाद खूंटी स्थित उलिहातु गांव का भ्रमण किया. इस दौरान दीपांकर ने कहा कि झारखंड की सबसे गौरवपूर्ण भूमि बिरसा के युद्ध स्थली, डोंबारीबुरु देश के पर्यटन स्थलों में सबसे अधिक उपेक्षित है.
देश के आर्थिक संसाधनों को कॉर्पोरेट हाथों में सौंपने वाली केंद्र सरकार से संप्रभुता की रक्षा की उम्मीद नहीं की जा सकती. सरकार सिर्फ निजीकरण पर बल दे रही है.
इस दौरान उन्होंने कहा कि डोंबारी स्थल की प्रतिमा जीर्ण शीर्ण स्थिति में है. जबकि स्थल की देख रेख में लगाये लोगों की न्यूनतम मजदूरी भी साल 1997 से बकाया है.
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इतिहास को तोड़ा मोड़ा जा रहा
उन्होंने कहा कि भाजपा का अमृतोत्सव स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को तोड़ मरोड कर पेश करने की कोशिश है. इस दौरान भाकपा माले नेताओं ने बिरसा मुंडा से संबंधित जानूमपीड़ी, आयुबहातु समेत कई गांवों का दौरा किया.
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