न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

जानें क्या है डिप्थीरिया, इस बीमारी से मरने वालों की संख्या में हुई है बढ़ोतरी

साल 2000 में पूरी दुनिया में डिप्थीरिया के तकरीबन तीस हजार केस दर्ज किए गए थे.

57

NW Desk : कुछ दिन पहले ही उत्तर पश्चिम दिल्ली में नगर निगम के अस्पताल में डिप्थीरिया नामक बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 18 हो गई थी. इलाके के मेयर ने मौतों की जांच के लिए एक समिति गठित की. महर्षि वाल्मीकि संक्रामक रोग अस्पताल में 12 बच्चों की मौत हुई थी.

eidbanner

इसे भी पढ़ें : इसरो ने मनुष्य को अंतरिक्ष में भेजने की डेडलाइन तय की, 2022 का इंतजार करें

4 साल की एक बच्ची जो लोहिया नगर की रहने वाली थी.  दिल्ली के महर्षि वाल्मीकि अस्पताल में बुधवार को उसकी मौत हो गई. इस महीने में डिप्थीरिया से जिले में तीसरी मौत है. बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचने लगा.गुरुवार को आनन-फानन में लोहिया नगर में बच्चों का टीकाकरण किया जाने लगा. हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मामले की लीपापोती में लगे हैं. उनके अनुसार महर्षि वाल्मीकि अस्पताल से रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों की पुष्टि करेंगे.

इसे भी पढ़ें : ईडी और सीबीआई के कुछ अधिकारी करप्शन छिपाने को नेपाल के सिमकार्ड का कर रहे इस्तेमाल

जानें क्या है डिप्थीरिया 

.इस बीमारी को डिप्थीरिया कॉरीनेबैक्टीरियम कहते है. जो डिप्थीरी नामक बैक्टिरिया से पैदा होती है. डिप्थीरी जीवाणु जो एक तेज जहर छोड़ता है. जिससे पूरे शरीर के ऊतकों और अंगों को नुकसान पहुंचता है. आंकड़े की माने तो साल 2000 में पूरी दुनिया में डिप्थीरिया के तकरीबन तीस हजार केस दर्ज किए गए थे. जिसमें से करीब तीन हजार लोगों की मौत हो गई थी.

इसे भी पढ़ें : ट्रैवल के दौरान न हो परेशानी, जाने कैसे रोकें उल्टियां

डिप्थीरिया के लक्षण

– गले की खराश,
– भूख की कमी
– बार बार बुखार आना

Related Posts

World No Tobacco Day: कहीं आप थर्ड हैंड स्मोकर तो नहीं

सिगरेट की राख और बट में होते हैं 250 खतरनाक रसायन. सिगरेट पीने के घंटों बाद भी वातावरण और सिगरेट के अवशेषों में 250 से ज्यादा घातक रसायन होते हैं.

डिप्थीरिया में झिल्ली बनने का कारण

डिप्थीरिया में शरीर के किसी भी भाग पर छद्म-झिल्ली का निर्माण होने लगता है. इसका कारण उसी जीवाणु को माना जाता है. बैक्टिरीया द्वारा छोड़े गए जहर के बेकार उत्पादों और प्रोटीन के कारण भी होता है. पतली सी झिल्ली सेल्स से चिपकने लगती है और सांस लेने में परेशानी पैदा करने लगती है.

इसे भी पढ़ें : क्या आप बातें भूलने लगे हैं, कहीं आपको अल्जाइमर तो नहीं ! जानें इस बीमारी के लक्षण तथा बचाव के उपाय

डिप्थीरिया के फैलने के कारण

डिप्थीरिया एक संक्रामक यानि फैलने वाला रोग है. यह बड़ी तेजी से फैलता है. डिप्थीरिया एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे को हो जाता है. यह ज्यादातर सांस से फैलता है. अगर संक्रमित व्यक्ति का इलाज सही समय पर न कराया गया तो यह दो या तीन हफ्तों तक संक्रामक बना रहता है.

इसे भी पढ़ें : CBI विवाद पर ‘सुप्रीम’ सुनवाई: दो हफ्ते में जांच पूरी करे सीवीसी, SC करेगी निगरानी

बचाव और इलाज

डिप्थीरिया के इलाज के लिए डिप्थीरिया जीवाणु को मारना ही एक मात्र उपाय है. आम तौर पर इसके लिए एंटिबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जाता रहा है. संक्रमण से बचने के लिए संक्रमित व्यक्ति को अकेले रखने की सलाह भी दी जाती है. आमतौर पर एंटीबायोटिक्स से किए गए इलाज के बाद यह 48 घंटे बाद यह ठीक होने लगता है.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: