
RANCHI. “ देश के उन समस्त शहीद पुलिसकर्मियों को विनम्र श्रद्धांजलि, जिन्होंने यह जानते हुए भी कि इस देश के कुछ महाभ्रष्ट नेतागण और उनके उस भ्रष्टाचार को रोबोट की तरह सुरक्षित, संरक्षित और सुव्यवस्थित बनाए रखने वाले कुछ भ्रष्ट अधिकारी उनकी इस शहादत को न तो सम्मान देंगे न ही उनको श्रद्धांजलि ही अर्पित करेंगे, निष्काम भाव से भारत माता के श्रीचरणों में अपना प्राण-पुष्प अर्पित किया !”
यह टिप्पणी है वरिष्ठ आईपीएस अरविंद पांडेय की. उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट पर अपनी भावना का इजहार करते हुए शहीद पुलिसकर्मियों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की है. बता दें कि अरविंद पांडेय इन दिनों बिहार में डीजी रैंक पर पोस्टेड हैं. नब्बे के दशक में वे रांची के सिटी एस.पी. रहे थे और अपनी सक्रियता के लिए बेहद चर्चित हुए थे.
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अपने फेसबुक पोस्ट में अरविंद पांडेय ने आगे लिखा है, वर्ष 1959 में उत्तरपूर्वी लद्दाख के हॉटस्प्रिंग में चीनी सैनिकों ने धोखे से भारत के पुलिस गश्तीदल पर हमला किया था जिसमें 10 जवान शहीद हो गए थे !! … एक वर्ष बाद 1960 में सारे देश के पुलिस महानिरीक्षकों की गोष्ठी में अध्यक्षता कर रहे तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के निर्देश पर प्रतिवर्ष 21 अक्टूबर को सारे देश में पुलिस संस्मरण दिवस मनाने का निर्णय लिया गया जिसमें देश में उस वर्ष के सभी शहीद पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है !
एक करोड़ रुपये मिले शहीदों के आश्रितों को
आईपीएस अरविंद पांडेय ने अपने फेसबुक पोस्ट में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सलाह दी है कि वे अपराधियों के विरुद्ध इस तरह रणनीति बनाकर कार्रवाई करायें कि उस कार्रवाई में कोई भी पुलिसकर्मी शहीद न हो ! यदि हताहत हो तो सिर्फ़ अपराधी ही हताहत हो ! और ऐसा किया जा सकता है !
उन्होंने कहा है कि यदि दिल्ली सरकार शहीद पुलिसकर्मी के आश्रितों को एक करोड़ रुपए की सम्मान-राशि दे सकती है तो केंद्र सरकार सहित सारे देश की राज्य सरकारें भी शहीदों के आश्रितों को एक करोड़ रुपये की सम्मान-राशि देने का नियम बना सकती हैं!
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