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31 दिसंबर तक झारखंड में होगा पंचायतों का पुनर्गठन, अगले साल होंगे चुनाव

अगले महीने खत्म हो जायेगा राज्य भर के मुखिया, पंसस, जिप सदस्यों का कार्यकाल

Principal Correspondent
Ranchi. राज्य में पंचायतों के पुनर्गठन का काम जारी है. इस साल 31 दिसंबर तक ग्राम पंचायतों के विघटन और पुनर्गठन की प्रक्रिया को पूरा कर लिया जायेगा. ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में राज्य निर्वाचन आय़ोग को भी सूचित कर दिया है. इस दिशा में काम पूरा होने के बाद ही निर्वाचन आयोग राज्य में पंचायत इलेक्शन की दिशा में आगे प्रोग्राम बना सकेगा. ऐसी स्थिति में यह तय है कि इस साल किसी भी सूरत में राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संभव नहीं होंगे.

जिला स्तर पर पुनर्गठन का काम शुरू

राज्य के सभी जिलों को ग्रामीण विकास विभाग की ओर से लेटर भेजे जा चुके हैं. जिलों के डीसी, पंचायती राज पदाधिकारियों को लिखे पत्र में कहा गया है कि वे 31 दिसंबर तक प्रशासनिक इकाइयों की सीमा में परिवर्तन का काम पूरा कर लें. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, झारखंड के द्वारा भी इस संबंध में अधिसूचना (अधिसूचना सं 2139) जारी की जा चुकी है. पूर्व में राजस्व विभाग ने 31 मार्च, 2020 तक इस काम पर रोक लगा रखी थी.
विभाग ने जनगणना 2021 के कार्यों को देखते हुए इस संबंध में) एक आदेश जारी करते हुए प्रशासनिक इकाइयों के क्षेत्राधिकार की सीमाओं में किसी तरह के बदलाव कार्य को रोकने को कहा था. जिला पंचायती राज अधिकारियों ने पंचायती राज निदेशालय द्वारा जारी आदेश के संबंध में अपने अपने जिलों के बीडीओ, सीओ को पंचायतों के परिसीमन का काम पूरा करने को कह दिया है.

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2015 में हुए थे पंचायत चुनाव

झारखंड में दूसरी बार पंचायत चुनाव 2015 में हुए थे. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव चार चरणों में 22 नवंबर से 12 दिसंबर के बीच कराये गये थे. 24 जिलों के 263 प्रखंडों में 4402 ग्राम पंचायतों (मुखिया) के लिये चुनाव संपन्न हुए थे. पंचायत समिति के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र की संख्या 5423 और जिला परिषद् के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या 545 थी. तकरीबन करीब साढ़े दस हजार पंचायत प्रतिनिधि निर्वाचित होकर आये थे.

कोरोना संकट में फंसा है काम

जानकारी के अनुसार फिलहाल कोरोना संकट के कारण अधिकांश जगहों पर पंचायतों के परिसीमन का काम रुका पड़ा है. कोरोना संक्रमण और इससे बचाव के लिये जारी प्रोटोकॉल को देखते हुए संबंधित पदाधिकारियों, कर्मचारियों के लिए राह आसान नहीं है. जो स्थिति है, उसे देखते हुए आशंका है कि दिसंबर तक परिसीमन का काम पूरा हो सकेगा. हालांकि आंशिक तौर पर कुछ जगहों पर ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन का काम आगे बढ़ा है. पंचायतों के क्षेत्रफल, आबादी को देखते हुए उसके कुछ हिस्सों को नगरपालिका, नगर निकायों से जोड़ा जाना है. कुछ पंचायतों का हिस्सा नगर निकायों में शामिल किया जायेगा.

पुनर्गठन के बाद वोटर लिस्ट की तैयारी

पंचायतों के पुनर्गठन के काम के बाद ही मतदाता सूची की तैयारी औऱ इससे जुड़े काम होंगे. जिला प्रशासन इससे संबंधित कामों को पूरा करायेगा. इसके बाद चुनाव आयोग इलेक्शन की अंतिम तैयारी करेगा. कुल मिलाकर 2021 से पहले चुनाव की गुंजाइश नहीं. फिलहाल तो नवंबर-दिसंबर में पंचायत प्रतिनिधियों की शक्तियां खत्म होनी तय है.

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