
Rahul Kumar
Ranchi : रांची यूनिवर्सिटी की जमीन पर विस्तारीकरण का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है. न ही आनेवाले दिनों में काम शुरू होने के आसार हैं. लिहाजा उस जमीन की खरीद-बिक्री बदस्तूर जारी है. इस गोरखधंधे में तीन रजिस्ट्रार और एक सीओ की भूमिका अहम है. बात शुरू होती है 1999 से. तीन दिसंबर 1999 में कांके अंचल के जमुआरी मौजा में खाता नंबर 10 और प्लॉट नं- 10 कुल रकबा 2.93 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री दो भाई अमित कुमार मित्रा और सुमित कुमार मित्रा ने पूर्णानिंदु सिंह को कर दी. उसके बाद पूर्णानिंदु सिंह ने उक्त जमीन का म्यूटेशन उस समय नहीं कराया. फिर 2006 में सिर्फ 52.54 डिसमिल का म्यूटेशन कराया गया. और यहीं से हुआ जमीन के कागजात में हेर-फेर कर रजिस्ट्री करने का खेल.
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2003 में रांची विश्वविद्यालय के नवीन परिसर के लिए जमीन अधिग्रह की प्रकिया शुरू हुई
रांची विश्वविद्यालय के नवीन परिसर के निर्माण के लिए 2003 में जमीन अधिग्रहण की प्रकिया शुरू हुई. विश्वविद्यालय के लिए कुल 7 एकड़ 13 डिसमिल जमीन के अधिग्रहण का आदेश दिसंबर 2010 में निकला और रांची विश्वविद्यालय के नाम से जमीन की जामबंदी कर दी गई.
कुल 14 खातों के जमीन का अधिग्रहण हुआ, खाता नंबर 10 में हुआ खेल
खाता नंबर 10 के प्लॉट नंबर 10 का कुल रकबा 2 एकड़ 93 डिसमिल है. जिसकी रजिस्ट्री मित्रा बंधुओं से पूर्णानिंदु सिंह ने 1999 करा ली थी, और इसी खाते और प्लॉट से विमल कुमार को 1 एकड़ 83 डिसमिल जमीन रजिस्ट्री कर दी गयी. जिसका म्यूटेशन विमल कुमार ने 2015-2016 में कराया. इसके बाद इसी खाते और प्लॉट नंबर की जमीन का रांची विश्वविद्यालय के लिए जिला प्रशासन ने 1 एकड़ 10 डिसमिल जमीन अधिग्रहित किया. अब इस खाते के प्लॉट नंबर 10 में पूर्णानिंदु सिंह की जमीन नहीं बची. फिर भी इस खाते और प्लॉट में जमीन की बिक्री 2020 से शुरू हुई, और 2024 तक जारी रही.
तीन रजिस्ट्रारों ने की रजिस्ट्री, सबसे अधिक शहर निबंधन कार्यालय में हुई रजिस्ट्री
इस जमीन की रजिस्ट्री तीन अलग- अलग रजिस्ट्रार ने की. सबसे अधिक रजिस्ट्री शहर निबंधन कार्यालय में 2020-2021 के बीच हुई. इस दौरान इस कार्यालय में सब रजिस्ट्रार के पद पर घासीराम पिंगुआ तैनात थे. गलत तरीके से पूर्णानिंदु सिंह ने कुल सात अलग-अलग लोगों को जमीन की बिक्री कर दी. वहीं रांची ग्रामीण निबंधन कार्यालय में 2020 में रजिस्टर्ड डीड के माध्यम से पूर्णनिंदू सिंह ने तीन अलग-अलग लोगों जमीन बेची. इस दौरान रांची ग्रामीण निबंधन कार्यालय के रजिस्ट्रार संतोष कुमार ने रजिस्ट्री की. वहीं 2022 में खाता 10 और प्लॉट 10 की जमीन की रजिस्ट्री ग्रामीण निबंधन कार्यालय में तैनात रजिस्ट्रर मिहिर कुमार ने की. जबकि इस जमीन का अधिग्रहण रांची विश्वविद्यालय के लिए कर लिया गया था. यहां गौर करने वाली बात है कि आखिर कैसे रांची विश्वविद्यालय की जमीन इन रजिस्ट्रारों ने की. साफ तौर इस गोरखधंधे में पैसों का खेल खूब हुआ है.
रिकॉर्ड के मुताबिक पूर्णानिंदु सिंह के पास खाता 10 प्लॉट 10 में जमीन ही नहीं बची
अगर रिकॉर्ड के मिलन की बात करें तो खाता नंबर 10 के प्लॉट नंबर 10 में पूर्णानिंदु सिंह के पास जमीन ही नहीं बची है. फिर भी रजिस्ट्री होती रही. क्योंकि 1.83 एकड़ जमीन पहले ही पूर्णानिंदु सिंह ने विमल कुमार को बेच दी थी. बाकी की 1.10 डिसमिल जमीन रांची विश्वविद्याल के विस्तारीकरण के लिए 2010 में अधिग्रहित कर ली गयी थी. जब उक्त खाते के प्लॉट नं 10 में जमीन ही नहीं बची. फिर कैसे 2010 के बाद से पूर्णानिंदु सिंह जमीन की रजिस्ट्री करती चली आ रही है यह लाख टके का सवाल है. जिसका जवाब रजिस्ट्रारों से पूछा जाना चाहिए.
नोटः अगली किस्त में पढ़ें किसने कर दिया गलत तरीके से रांची विश्वविद्यालय की जमीन का म्यूटेशन



