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सीएम का दावाः साढ़े चार साल में 30 लाख घरों में बिजली पहुंचायी, हकीकतः कनेक्शन तो जुड़ा, देने को बिजली नहीं

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  • दावा: बिजली बना कर बेचना प्राथमिकता.
  • सच्चाईः यहां का कोयला खरीद कर झारखंड को ही सालाना 3000 करोड़ की बिजली बेचती हैं कंपनियां

Ranchi: सीएम ने सोमवार को भाजपा के प्रदेश कार्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस करके एक बार फिर यह दावा किया है कि साढ़े चार साल में राज्य में 30 लाख परिवारों के घरों में बिजली पहुंचा दी गयी. लोड बढ़ा है. पर्याप्त बिजली नहीं है. इस कारण राज्य में बिजली की समस्या है. हजारीबाग और गिरिडीह समेत 117  ग्रिड निर्माण का काम चालू है. इसके चालू होते ही बिजली समस्या खत्म हो जायेगी. सुदूर इलाकों में सोलर पावर के जरिये बिजली पहुंचायी जायेगी.

सीएम के दावे का मतलब यह है कि 2014 से पहले 38 लाख परिवारों तक ही बिजली सीमित थी. तब हुए एक सर्वे के अनुसार राज्य में 68 लाख हाउस होल्ड थे. सीएम ने यह भी दावा किया कि 99 फीसदी लोगों के घरों में बिजली पहुंच गयी है.

झारखंड के 99 फीसदी घरों में बिजली पहुंचा देने का सरकार का दावा अपनी जगह है. पर इसके लिए बिजली कहां से आयोगी और वितरण कैसे होगा, इसका जवाब न तो सरकार के पास है और न ही वितरण निगम के एमडी राहुल पुरवार के पास. सीएम ने प्रेस कांफ्रेंस में स्वीकार किया कि लोड बढ़ने के कारण पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है. पूरी व्यवस्था निजी और सेंट्रल सेक्टर के भरोसे टिकी हुई है.

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14 हजार करोड़ का पावर फॉर ऑल एक्शन प्लान नहीं हुआ पूरा

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यह दावा किया था कि वर्ष 2019 में झारखंड में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति होगी. उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसा नहीं होने पर वह वोट मांगने नहीं आयेंगे. इसके लिए एक्शन प्लान तैयार किया गया था. जिसका नाम था “पावर फॉर ऑल-24 घंटा” रखा गया है. यह प्लान 14 हजार करोड़ रुपये का है. इस प्लान को केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने स्वीकृति दी थी. प्लान के मुताबिक दिसंबर 2018 तक पूरे प्रदेश में 24 घंटे बिजली उपलब्ध करानी थी. डीपीआर बनाने में लगभग एक करोड़ रुपये से भी अधिक खर्च हुआ था. प्लान के मुताबिक, 2019 तक 5,500 मेगावाट बिजली की जरूरत थी यह प्लान अब तक पूरा नहीं हुआ है. प्लान के कई काम अब तक शुरू भी नहीं हुए हैं.

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कौन कंपनी कितना करती है बिजली आपूर्ति

कंपनी का नाममेगावाट
डीवीसी946
जूस्को43
टाटा स्टील435
सेल बोकारो21
बिजली वितरण निगम1900 से 2000

कोयला से बिजली बना कर बेचना प्राथमिकता

सीएम ने प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया कि सरकार की प्राथमिकता राज्य के कोयला से बिजली बना कर बेचना है. लेकिन सच्चाई यह है कि दूसरे राज्य झारखंड का कोयला खरीद कर झारखंड को ही सालाना 3000 करोड़ की बिजली बेचते हैं. वहीं एनटीपीसी और डीवीसी को झारखंड में ही कोल ब्लॉक आवंटित किया गया है. डीवीसी का मुख्यालय पश्चिम बंगाल और एनटीपीसी का मुख्यालय दिल्ली में है. हरियाणा के यमुनानगर में बन रहे पावर प्लांट के लिए झारखंड के बादलपारा और कल्याणपुर कोल ब्लॉक को आवंटित किया गया है. पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन को पैनम कोल माइंस आवंटित की गयी है. झारखंड में सालाना 125 मिलियन टन कोयले का उत्पादन होता है. इसमें 100 मिलियन टन(95 फीसदी) कोयला गुजरात, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली चला जाता है. राज्य के खाते में सिर्फ 25 मिलियन टन ही आता है. जबकि राज्य में स्थापित निजी और सरकारी उपक्रम के पावर प्लांट को चलाने के लिए हर दिन 43 हजार टन कोयले की जरूरत होती है.

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कौन सी कंपनी सालाना कितने की बिजली झारखंड को बेचती है

डीवीसी1560 करोड़
एनएचपीसी156 करोड़
एनटीपीसी648 करोड़
पीजीसीआइएल(ट्रांसमिशन लाइन का उपयोग भी) 96 करोड़
पावर ट्रेडिंग कॉरपोरेशन156 करोड़

समीक्षा बैठक के बाद क्या कहा वितरण निगम के एमडी राहुल पुरवार ने

सीएम ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर ऊर्जा सचिव वंदना दादेल और वितरण निगम के एमडी राहुल पुरवार को बुलाया था. बैठक के बाद एमडी राहुल पुरवार ने मीडिया को बताया कि मीटिंग में वैसी कोई बात नहीं हुई. 24 मई के बाद बिजली व्यवस्था पर बात होगी. सीएम ने भी कहा कि 24 मई के बाद प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी देंगे.

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