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आखिर 45 दिनों में ही दोबारा कार्मिक का प्रभार केके खंडेलवाल को देने के पीछे क्या है वजह!

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Ranchi:   30 मार्च को झारखंड सरकार की तरफ से आइएएस अधिकारियों के तबादले का नोटिफिकेशन निकलता है. नोटिफिकेशन के मुताबिक केके खंडेलवाल को कार्मिक सचिव के साथ-साथ योजना एवं वित्त विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है. जो उस वक्त छुट्टी पर रहते हैं. उनके छुट्टी में रहते ही दोबारा पांच अप्रैल को सरकार की तरफ से नोटिफिकेशन निकलता है. इस बार केके खंडेलवाल को कार्मिक विभाग से मुक्त कर योजना एवं वित्त का अपर सचिव बनाया जाता है. लेकिन सिर्फ 45 दिनों के अंदर ही फिर से 20 मई को सरकार की तरफ से नोटिफिकेशन निकलता है और दोबारा केके खंडेलवाल को कार्मिक विभाग का प्रभार दे दिया जाता है. इस बात को लेकर ब्यूरोक्रेसी में खूब चर्चा है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार के पास दूसरा कोई अधिकारी नहीं है, जो कार्मिक का प्रभार ले सकते हैं. ऐसी क्या वजह है कि बार-बार खंडेलवाल को ही कार्मिक का प्रभार दे दिया जाता है.

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विभाग के 39 प्रभार जूनियर अधिकारी को देनेवाले अफसर हैं खंडेलवाल

योजना सह वित्त विभाग में पहले से ही दो आइएएस रैंक के अधिकारी सचिव के पद पर हैं. सत्येंद्र सिंह और हिमानी पांडेय. बावजूद इसके विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सारे प्रभार संयुक्त सचिव सह उप सचिव जैसे जूनियर अधिकारी को सौंप दिया. इस पद पर विभाग में परमेश्वर भगत हैं. अब परमेश्वर भगत के पास इतने प्रभार हैं, जितना सचिव रैंक के अधिकारी के पास नहीं है. वहीं तीन कार्य का प्रभार निदेशक प्रमुख/उप निदेशक सह उप सचिव को सौंपा है. विभाग का हाल अब ऐसा है कि बात चाहे कैरेक्टर सर्टिफिकेट की या विभाग के सभी अधिकारियों के लिए वाहन की व्यवस्था करने की, तो सभी परमेश्वर भगत के ही जिम्मे है.

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एक साल में चार अधिकारी जा चुके हैं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर

इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि झारखंड में आइएएस अधिकारियों का टोटा है. हाल यह है कि एक साल में चार सीनियर आइएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली जा चुके हैं. इनमें अमित खरे, निधि खरे, एसएस मीना और एमएस भाटिया शामिल हैं. इनके अलावा इंदू शेखर चतुर्वेदी ने भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन दे दिया है. जल्द ही वो भी झारखंड को बाय-बाय करनेवाले हैं.

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