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41 सीटें मांग जेएमएम की कांग्रेस पर प्रेशर पॉलिटिक्स  

Nitesh Ojha

Ranchi : जेएमएम कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने आगामी विधानसभा चुनाव में राज्य की आधी विधानसभा सीटों यानी 41 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है. हेमंत का यह बयान प्रेशर पॉलिटिक्स का एक हिस्सा माना जा रहा है. इस बयान से जहां उन्होंने कांग्रेस पर दबाव बनाने का प्रयास किया है वहीं यह इरादा भी जताया है कि झामुमो इस चुनाव में लीड करेगा. जेएमएम के कुछ विधायक भले ही पार्टी के फैसले से बाहर नहीं जायें, लेकिन उनकी भी मंशा यही है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पर प्रेशर बना कर रखा जाये. विधायक दल की बैठक में कुछ विधायकों ने तो दूसरे स्थान पर आनेवाली सीटों पर भी चुनाव लड़ने की बात कही है. ऐसे में सीटों की संख्या 50 तक भी जा सकती है. यही कारण है कि विधायकों से बातचीत कर हेमंत ने उक्त घोषणा की है. पार्टी विधायकों की मानें, तो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को ज्यादा सीटें देकर पार्टी ने नुकसान तो झेला है. दूसरी तरफ लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का आरजेडी और वामदलों से संघर्ष का असर महागठबंधऩ की मजबूती पर भी देखा गया. ऐसे में हेमंत भी जरूर चाहेंगे कि ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ कर वे शुरू से कांग्रेस पर प्रेशर बना कर रखें.

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जेएमएम सहित अऩ्य दलों से दिखी थी नाराजगी

बात अगर लोकसभा चुनाव की स्थिति की करें, तो उस वक्त कोल्हान और खूंटी संसदीय सीट को लेकर जेएमएम विधायकों में नाराजगी दिखी थी. कोल्हान सीट से पार्टी के पांच विधायकों ने तो कार्यकारी अध्यक्ष से मिल कर मांग तक कर दी थी कि यहां से पार्टी चुनाव लड़े. हालांकि कांग्रेस के जमशेदपुर सीट छोड़ने से यह संघर्ष ज्यादा आगे नहीं बढ़ा. लेकिन ऐसा भी नहीं कहा जा सकता कि विधायकों की नाराजगी खत्म ही हो गयी. खूंटी सीट कांग्रेस के खाते में जाने की बात पर तोरपा विधायक ने बगावती रुख अख्तियार कर लिया. उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर उन्हें खूंटी से टिकट नहीं मिला तो वे पार्टी बदल कर या फिर निर्दलीय ही चुनाव में उतरेंगे. पलामू सीट पर आरजेडी और हजारीबाग एवं कोडरमा सीट पर वामदलों से भी कांग्रेस की अनबन दिखी. पूरे संघर्ष का असर महागठबंधन की मजबूती पर भी देखा गया, जिसे हेमंत सोरेन भलीभांति जानते हैं. यही कारण है कि गुरुवार को विधायकों से बातचीत के बाद उन्होंने 41 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है.

जेएमएम विधायकों ने रखी अपनी बात

न्यूज विंग ने पार्टी के कई विधायकों से संपर्क किया. विधायकों ने अपनी बात को प्रमुखता से रख यह स्वीकार किया कि बड़े दल होने के नाते कांग्रेस पर दबाव बनना स्वाभाविक है.

जेएमएम को नहीं होगा कोई नुकसान : पौलुस सुरीन

तोरपा विधायक पौलुस सुरीन ने कहा कि सीटों की बात कह कर पार्टी ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की मांगी सीटों पर पार्टी नेतृत्व ने अपनी सहमति जतायी थी, ताकि महागठंबधन मजबूत बने. अब अगर कांग्रेस की तरफ से कोई अड़चन आती है, तो पार्टी अकेले भी चुनाव लड़ने को तैयार है. प्रेशर पॉलिटिक्स की बात स्वीकार करते हुए पौलुस सुरीन ने कहा कि कांग्रेस में शीर्ष से लेकर जिला स्तर तक संघर्ष की स्थिति है. आरजेडी दो फाड़ में बंट चुका है. जेवीएम के बड़े नेताओं की स्थिति छिपी नहीं है. ऐसे में महागठबंधऩ नहीं बने, तो इससे जेएमएम को तो कोई नुकसान नहीं होता दिख रहा है.

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संजीवनी बूटी दी कांग्रेस को, प्रेशर बनाना जरूरी : कुणाल षाड़ंगी

बहरागोड़ा विधायक कुणाल षाडंगी ने तो पहले ही अपनी निजी राय बताते हुए कहा था कि कांग्रेस के साथ किसी तरह का गठबंधन नहीं हो. एकबार फिर अपने बयान पर कायम रहते हुए उन्होंने कहा कि गठबंधन में जब सबसे बड़ी पार्टी जेएमएम है, तो स्वाभाविक है कि कांग्रेस पर तो हमारा प्रेशर बनेगा ही. विधायक कुणाल ने स्वीकारा कि लोकसभा चुनाव में जेएमएम ने कांग्रेस को संजीवनी बूटी देने का काम किया था.

कांग्रेस के ज्यादा सीट मांगने पर अकेले चलने पर विचार करेगा जेएमएम : शशिभूषण सामड

चक्रधरपुर विधायक शशिभूषण सामड ने भी न्यूज विंग से बातचीत की. उन्होंने कहा कि विधायक दल की बैठक में हमने पिछले विधानसभा चुनाव में पहले और दूसरे स्थान की सीटों पर दावा करने की बात कार्यकारी अध्यक्ष से की. ऐसे में पार्टी 50 सीटों पर तक चुनाव लड़ सकती है. कहा, आज गठबंधन की बात हो रही है, तो उसी का सम्मान करते हुए हमने कोल्हन के अलावा खूंटी और लोहरदगा सीट छोड़ी. जबकि इन सीटों पर तो पार्टी का कांग्रेस से ज्यादा जनाधार है. गठबंधन के कारण ही जेएमएम लोकसभा चुनाव में 4 से 5 सीट जीतने से चूका था. विधायक शशिभूषण ने बताया कि चूंकि विधानसभा चुनाव को लेकर पहले ही कांग्रेस अध्य़क्ष राहुल गांधी के साथ बातचीत की जा चुकी है, अब अगर कांग्रेस ज्यादा सीटों की मांग करेगी, तो पार्टी अकेले चुनाव लड़ने पर विचार भी कर सकती है.

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