
Anuj Tiwary
Ranchi: सहकारिता बैंक की एक नई करतूत सामने आ रही है, जिसके तहत बड़े पैमाने पर घोटाले को अंजाम दिया गया है. बैंक घोटाले की सूची में अब पॉश मशीन घोटाले का नाम शामिल होने जा रहा है. इस घोटाले में 4जी पॉश मशीन की खरीदारी की जगह 2जी पॉश मशीनें खरीदी गई. करीब आठ हजार पॉश मशीनें 2014 से 2019 के आसपास तक खरीदी गई, जिसके लिए करीब 15 करोड़ रुपए दे दिए गए.
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बताया जा रहा कि प्रत्येक पॉश मशीन की कीमत अधिक से अधिक दो हजार रुपए तक बतायी जा रही है. इस लिहाज से देखा जाय तो 8000 पॉश मशीन की कीमत करीब एक 60 लाख रुपये होती है. जाहिर है इस मामले में राशि की हेराफेरी हुई है. बैंक को इस तरह की हेराफेरी की जानकारी मिल चुकी है, अब इसकी जांच कराने की तैयारी चल रही है.
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इतना ही नहीं, ये खरीदी गई आउट डेटेड मशीनें अब कबाड़ की तरह रखी हुई है, जिसका प्रयोग भी नहीं हो रहा है. इस खरीद में आरोप लगाया जा रहा है कि आठ मार्च 2019 को बैंक के महाप्रबंधक पर दबाव डालकर उसी कंपनी को तीन करोड़ 76 लाख रुपए भुगतान करवा दिया. बैंक सूत्रों के अनुसार तत्कालीन महाप्रबंधक विजय कुमार सिंह के कार्यकाल में ही पॉश मशीनों की खरीदारी में अनियमिता बरती गई. इसके बाद भी 2019 तक लगातार सवाल उठने के बावजूद मशीनों की खरीदारी होती रही.
बैंक महाप्रबंधक एच पांडेय बताते हैं कि पॉश मशीन की खरीददारी में बड़ी रकम के हेरफेरी की शिकायतें बैंक को मिल रही है. जल्द ही इसकी जांच शुरू की जाएगी. बैंक ने अपनी ओर से तैयारी शुरू कर दी है. मशीन की खरीदारी पूर्ण रूप से टेंडर के माध्यम से हुई है और अगर इसमें कोई कमीशनखोरी हुई है तो टेंडर से जुड़े लोगों व विभागों की जांच की जाएगी. इसकी पूरी मैपिंग कर जांच होगी.
सहकारिता बैंक घोटालों का अड्डा
सहकारिता बैंक में लगातार घोटाले होते रहे हैं. अभी तक बैक की विभिन्न शाखाओं में 500 करोड़ से अधिक का घोटाले हो चुके हैं. जीएम से लेकर उच्च स्तर के पदाधिकारियों की गिरफ्तारी भी हुई हैं. इसके बावजूद भी बैंक में घोटाले रुकने का नाम नहीं ले रहा है.




