
Jamshedpur : झारखंड पंचायत चुनाव- 2022 में पूर्वी सिंहभूम जिले का जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्र संख्या- 8 बहुचर्चित चुनावी अखाड़ा बन गया है. यहां चुनावी अखाड़े में तीन महिलाएं जोर आजमा रही हैं. इनमें मुख्य मुकाबला शिक्षाविद और समाजसेवी डॉ कविता परमार तथा निवर्तमान जिला परिषद सदस्य किशोर यादव की पत्नी लक्ष्मी देवी के बीच है. किशोर यादव का पिछले दो टर्म से जिला परिषद संख्या 8 पर कब्जा है. लेकिन साफ-सुथरी छवि और उच्च शिक्षा प्राप्त डॉ कविता परमार फिलहाल आम मतदाताओं की पहली पसंद बनी हुई हैं. कविता परमार का कहना है कि इस बार खेला भी होगा और गोल भी वही सर्वाधिक करेंगी. लेकिन यहां तो खेल बिगाड़नेवाले ज्यादा हैं, खेलनेवाले तो हैं ही नहीं. यहां तो लोग जात-पात पर खेल खेलना चाहते हैं. वास्तविक मुकाबला करना है, तो प्रत्याशी अथवा उनके पहलवान चुनावी अखाड़े में सामने-सामने आकर दो-दो हाथ कर ले. जनता ही तय कर देगी कि कौन खिलाड़ी है.
बदलाव के पक्ष में है मतदाताओं का मिजाज
जिला परिषद क्षेत्र संख्या 8 के साइलेंट मतदाता इस बार बदलाव के मूड में दिख रहे हैं. इस बार उनकी प्राथमिकता यह है कि कौन सामने आकर उनका नेतृत्व करेगा और उन्हें पानी की पर्याप्त आपूर्ति, बिजली, स्वास्थ्य आदि बुनियादी सुविधाएं प्रदान करेगा. इस बार तटस्थ मतदाता तीन बातों पर गौर कर रहे हैं. इनमें पहला और सबसे महत्वपूर्व बात यह सामने आ रही है कि वर्तमान जिला परिषद सदस्य ने पिछले 12 वर्षों में बागबेड़ा पंचायत क्षेत्र में कोई विकास का काम नहीं किया. दूसरा मुद्दा यह है कि क्षेत्र में भयावह जल संकट है और अपशिष्ट प्रबंधन की हालत दयनीय है. लोग नारकीय जीवन जीने को विवश हैं. तीसरा मुद्दा यह है कि इस बार पढ़ी-लिखी और बेबाक जिला परिषद चाहिए, जो लोगों की बात को उचित मंच पर तार्किक और मुखर तरीके से रख सके. लोगों का कहना है कि डॉ कविता पढ़ी-लिखी हैं, वह कुछ जरूर करेंगी.
पति और रिश्तेदार नहीं, खुद कर रही प्रचार
इलाके के मतदाता इस बात पर भी गौर कर रहे हैं कि कौन उम्मीदवार किसके साथ प्रचार कर रहा है और क्या वायदे कर रहा है. इस कसौटी पर डॉ कविता परमार सबसे आगे हैं, क्योंकि वह अपने पति, भाई, चाचा आदि के साथ प्रचार नहीं कर रहीं. कविता युवा मतदाताओं, खासकर महिला मतदाताओं की पहली पसंद हैं.
मतदाता चाहते हैं समस्याओं के समाधान का विजन
कविता परमार क्षेत्र की उन समस्याओं के समाधान की बात कहती हैं, जिनसे समाज के सभी वर्गों के लिए समावेशी विकास हो सकता है. उनके विज़न दस्तावेज़ में पानी के मुद्दे, अपशिष्ट प्रबंधन, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, पर्यावरण संरक्षण औऱ बुनियादी शिक्षा के लिए व्यापक गुंजाइश है. कुल मिलाकर यह मुद्दों और जातिवाद तथा परिवारवाद के बीच का संघर्ष है. फैसला मतदाताओं को करना है.
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