
Jamshedpur: ‘झारखंड पुकारा-भाजपा दोबारा’ नारे के साथ बीजेपी सत्ता में दोबारा वापसी की पुरजोर कोशिश में हैं. इसे लेकर पीएम मोदी समेत पार्टी के दिग्गज नेताओं की ताबड़तोड़ सभाएं भी हो रही हैं. मंगलवार को पीएम मोदी ने खूंटी और जमशेदपुर में जनसभा को संबोधित किया.
जहां कांग्रेस-जेएमएम समेत विरोधियों पर वार और डबल इंजन सरकार के फायदे गिनवाने से प्रधानमंत्री नहीं चुके. लेकिन जमशेदपुर की चुनावी सभा में यहां के ज्वलंत मुद्दों का उन्होंने जिक्र तक नहीं किया.
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आइये जानते हैं क्या है वो ज्वलंत मुद्दे-
पलायन करते टाटा के यूनिट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान टाटा से गहरे संबंध की चर्चा की. साथ ही आने वाले समय में स्टील की डिमांड में तेजी होने की चर्चा भी की.
लेकिन टाटा की पलायन और बंद हो रही कंपनियों को लेकर एक शब्द भी नही कहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्टील की डिमांड में तेजी आने से टाटा परिवार खुश हो सकता है, लेकिन टाटा के बंद कपनियों के कर्मी नहीं.
आपको बता दें कि टाटा की टायो रोल्स 2016 से बंद है, टाटा नैटस्टील का बीते महीने ही वियतनाम की कंपनी से करार हुआ. कंपनी बिक गई है. लिहाजा नैटस्टील शिफ्ट होगी और टाटा हिताची खड़गपुर शिफ्ट हो चुकी है.
जनता के साथ-साथ इन यूनिट्स के कर्मचारी भी मोदी से आस लगाए बैठ थे कि उनके लिए मोदी उम्मीद की किरण लेकर आएंगे, लेकिन उन्हें निराशा के अलावा कुछ हाथ नही लगा.
टायो रोल्स संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि मोदी के चुनावी भाषण से उनको ही नहीं बल्कि सैकेड़ों बेरोजगार कर्मियों को सकारात्मक पहल की आस थी लेकिन मोदी बस अपनी उपल्बधियों के बारे में ही बोले जमशेदपुर की सबसे बड़ी समस्या रोजगार के लिए लोगों का संघर्ष है, जिसको उन्होंने छुआ तक नहीं.
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रांची-टाटा राजमार्ग भी अनदेखा
एक दशक से भी ज्यादा से चल रही रांची-टाटा हाईवे की दुर्दशा पर बोलने से भी मोदी किनारा करते नजर आए. जबकि इस राजमार्ग ने सरकार से लेकर ठेकदार तक बदलते देखा है.1000 करोड़ से अधिक के घोटाले का मामला सामने आ चुका है.
समय-समय पर हाईकोर्ट भी इस पर संज्ञान लेता रहता है. लेकिन फिर भी नरेंद्र मोदी ने इस पर बोलना उचित नहीं समझा. भाषण के आखिरी दौर में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने प्रधानमंत्री को पर्चा बढ़ाया तो राज्य को मेडिकल हब बनाने का नरेंद्र मोदी ने वादा किया. लेकिन रांची-टाटा हाईवे उनके पर्चे से भी गायब था.
आपको बता दें कि 30 नवंबर को AIMIM चीफ असद्दुदीन ओवैसी ने जमशेदपुर दौरे पर रांची-टाटा हाईवे को लेकर सवाल खड़े किए थे.
देश का बड़ा औद्योगिक क्षेत्र भी नजरअंदाज
आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र (आयडा) जो देश के बड़े औद्योगिक क्षेत्र में आता है, उसकी बदहाली और बेरोजगारी किसी से छिपी नहीं है.1500 से ज्यादा उद्योग मंदी की चपेट में है.
700 से ज्यादा कंपनी घाटे में चल रही है. करीब 50 कंपनियों में ताला लटक चुका है और अबतक करीब 50 हजार लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ है.
गोपाल मैदान से नरेंद्र मोदी ने देश-विदेश में झारखंड को विख्यात करने की बातें कही, लेकिन आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया पर एक लाइन भी नहीं बोले. यहां तक की भविष्य में नए उपक्रम लगाने की भी घोषणा नहीं हुई.
सीआइआइ के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और हाइको इंडस्ट्रीज के एमडी तापस साहु कहते है कि औद्योगिक क्षेत्र में बड़े उद्योग लगाने के वादे लंबे अरसे से लटके हैं. सरकार के पास प्रपोजलों की भी कमी नहीं है. अगर एक भी धरातल पर आ आए तो मंदी का इतना व्यापक असर नहीं देखने को नहीं मिलेगा.
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