
Akshay Kumar Jha
Ranchi: कोरोना, लॉकडाउन और अनलॉक के बीच झारखंड में राजनीति का पारा भी धीरे-धीरे ऊपर चढ़ रहा है. राज्य में बेरमो और दुमका दो विधानसभा में उपचुनाव होने हैं. कयास लगाया जा रहा है कि सितंबर महीने में ये दोनों चुनाव हो जाएंगे.
दोनों ही सीट सत्ता पक्ष के लिए काफी अहम है. क्योंकि ये दोनों सीट सत्ता पक्ष की सीट थी. बेरमो से राजेंद्र सिंह तो दुमका से खुद सीएम हेमंत सोरेन चुनाव जीत कर आए थे. हाल ही में राजेंद्र सिंह का निधन हुआ है. जिसके बाद से बेरमो में उपचुनाव को लेकर चुनावी केमेस्ट्री तैयार हो रही है. वहीं दुमका उपचुनाव सोरेन परिवार की नाक की बात है. दोनों ही सीट राज्य की हॉट सीट मानी जा रही है. बीजेपी अपने चुनावी एजेंडे में जुट चुकी है, तो वहीं कांग्रेस और जेएमएम भी राजनीतिक गणित का फॉर्मूला तैयार करने में पूरा जोर लगा रहा है.
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बेरमो से रघुवर दास के चुनाव लड़ने की अटकलें
2019 के विधानसभा चुनाव में पांच बार के विधायक रघुवर दास जमशेदपुर पुर्वी से हार चुके हैं. जिससे बीजेपी बैकफुट पर है और रघुवर दास के राजनीतिक करियर पर एक सावल खड़ा होता दिख रहा है. हालांकि कहीं से इस बात की राजनीतिक पुष्टि नहीं हो पायी है कि रघुवर दास बेरमो से चुनाव लड़ेंगे.
लेकिन रघुवर दास के उपचुनाव लड़ने की चर्चा बेरमो विधानसभा क्षेत्र में जोरों पर है. किसी का कहना है कि बीजेपी की तरफ से रघुवर दास को यहां से टिकट देने के लिए सर्वे कराये जा रहे हैं. तो कहीं ये बात हो रही है कि रघुवर दास के कुछ नजदीकियों का बेरमो प्रेम अचानक बढ़ गया है. छत्तीसगढ़ी कनेक्शन, बीजेपी की जमीनी पकड़ और पूर्व विधायक बाटुल की खामियों को नमक-तेल लगाकर चौराहों पर गॉसिप की जा रही है.
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अब जयमंगल सिंह है बेरमो में कांग्रेस का चेहरा
पिता राजेंद्र सिंह के बाद बेरमो में कांग्रेस का चेहरा जयमंगल सिंह खुद-ब-खुद बनते जा रहे हैं. राजेंद्र सिंह के दो बेटे जयमंगल सिंह और गौरव सिंह में से बड़े बेटे जयमंगल सिंह (अनुप सिंह) अपने पिता की राजनीतिक विरासत लेने को तैयार दिख रहे हैं.

दो मई को जब से राजेंद्रे सिंह की तबियत बिगड़ी तब से जयमंगल सिंह लगातार सोशल मीडिया पर लोगों से जुड़ रहे हैं. पिता के निधन के बाद जयमंगल सिंह को राष्ट्रीय खान मजदूर फेडरेशन (इंटक) के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गयी है. राजेंद्र युग के बाद यह पद इनके पहले राजनीतिक तिलक के जैसा है. कांग्रेस की तरफ से जयमंगल सिंह को उम्मीदवार बनाया जाना फिलहाल तय माना जा रहा है.
वहीं कुछ लोगों का कहना है कि कांग्रेस राजेंद्र सिंह की पत्नी रानी देवी पर भी दांव खेल सकती है. हर हाल में राजेंद्र सिंह के परिवार से ही कांग्रेस का उम्मीदवार बनना तय है. वहीं बीमार पड़ने के बाद राजेंद्र सिंह के हमेशा पीछे खड़े रहने वाले जयमंगल सिंह अब खुलकर फ्रंट फुट पर हैं.
वहीं अपने बड़े भाई को चुनाव जिताने की जिम्मेदारी गौरव सिंह पर ठीक वैसे ही रहेगी, जैसे जयमंगल के जिम्मे 2019 में अपने पिता को चुनाव जिताने की थी. कांग्रेस को इस सीट पर ज्यादा मजबूत इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि मंत्री जगरनाथ महतो इसबार खुलकर बेरमो में कांग्रेस को जीत दिलाने में एड़ी चोटी का जोर लगाने वाले हैं. जगरनाथ महतो की डुमरी विधानसभा के साथ-साथ बेरमो विधानसभा में भी काफी मजबूत पकड़ मानी जाती है.
जेएमएम को हर हाल में दुमका में लहराना है जीत का पताका
बेरमो के बाद दुमका सीट का उपचुनाव भी काफी चर्चित होने वाला है. दुमका से पिछली बार हेमंत सोरेन ने मंत्री रह चुकी बीजेपी की लुईस मरांडी को लगभग 13000 वोटों से हराया था. लेकिन दो जगह से चुनाव जीतने की वजह से हेमंत को दुमका सीट छोड़नी पड़ी.
दुमका लोकसभा सीट बीजेपी की झोली में जाने के बाद सोरेन परिवार के लिए यहां की विधानसभा सीट नाक की लड़ाई मानी जा रही है. आने वाले उपचुनाव में सोरेन परिवार का ही कोई उम्मीदवार जेएमएम से मैदान में होगा. जेएमएम के करीबियों का कहना है कि बसंत सोरेन चुनाव की तैयारी में लग चुके हैं. लॉकडाउन के वक्त भी बसंत सोरेन की राजनीतिक सक्रियता दिखी थी.
वहीं अनलॉक-1 के बाद बीजेपी भी अपनी जीत के समीकरण जुटाने में लग चुकी है. पूर्व मंत्री लुईस मरांडी का बतौर उम्मीदवार नाम आगे चल रहा है. बीजेपी के करीबियों का कहना है कि ऐन वक्त पर बीजेपी चेहरा बदलकर कमजोर नहीं होना चाहती. इसलिए लुईस मरांडी के लिए ही फिलहाल फिल्डिंग हो रही है.
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