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जमशेदपुर: देश परगना बाबा रामचंद्र मुर्मू का निधन

Jamshedpur : देश परगना बाबा रामचंद्र मुर्मू का 10 मार्च की रात अचानक हृदय गति रुक जाने से आकस्मिक निधन हो गया. उनका दाह संस्कार शुक्रवार को दोपहर बाद उनके पैतृक गांव नलदोहा में किया जाएगा.

वे अपने पैतृक गांव नलदोहा में एक शादी समारोह में उपस्थित थे. उक्त कार्यक्रम में रात्रि भोजन के समय अचानक खाना खाते-खाते सांस नली में खाना अटक जाने के कारण उनको उल्टी आई. उसके तुरंत बाद हृदय गति रुक जाने से उनका देहांत हो गया. उनका जन्म आठ दिसंबर 1955 को हुआ था. वे सरकारी शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त थे. उनका देहांत 67 वर्ष की आयु में हुआ. वे अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़कर गए. उनकी पत्नी करुणा मुर्मू, जेष्ठ पुत्र दिनेश कुमार मुर्मू, द्वितीय पुत्र दीपक कुमार मुर्मू, पुत्री दीपाली मुर्मू के अलावा उनके छोटे भाई लक्ष्मण मुर्मू तथा पोता पोती हैं. भारोत जकात माझी परगना महल के दिशोम परगना बाबा रामचंद्र मुर्मू शिक्षक के पद पर रहते हुए संताली भाषा की ओलचिकी लिपि आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई थी.

इसके अलावा संताल आदिवासी की सामाजिक परंपरा अर्थात माझी परगना व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालन के लिए पेसा कानून, 1996 में लागू कर गांव में अबुआ राज कायम करने के लिए जीवन भर आंदोलनरत रहे. हाल ही में कोलकाता में सूर्य सिंह बेसरा द्वारा आयोजित नेशनल ट्राईबल असेंबली अर्थात आदिवासी दरबार में रामचंद्र मुर्मू ने भारत के 10 राज्यों के प्रतिनिधियों को संबोधित किया था. रामचंद्र मुर्मू, डॉक्टर बीडी शर्मा तथा धाड़दिशोम परगना हरेंद्र नाथ मुर्मू के कट्टर अनुयाई भी थे. उनके आकस्मिक निधन की खबर सुनकर गांव में शोक की लहर दौड़ गई. उनके निधन की खबर सुनकर घाटशिला विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने उनके पैतृक गांव नालदोहा जाकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

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