
Ranchi. झारखंड लैंड म्यूटेशन बिल के लिये सर्वदलीय बैठक की जानी चाहिये. राज्य सरकार को चाहिये की इसके लिये चर्चा की जाए. वाम नेताओं की ओर से उक्त बातें बयान जारी कर कहा गया. सीपीआइएम के प्रकाश विप्लव ने कहा कि राज्य में जमीन बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है. जमीन से यहां के आदिवासियों और ग्रामीणों की भावनाएं जुड़ी है. साथ ही ग्रामीण आबादी की आजीविका का मुख्य साधन भी जमीन है.
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प्रकाश ने कहा पिछली सरकारों ने भूमि से जुड़ी समस्याओं को हल करने की कोशिश नहीं की. जबकि इसके विपरीत यहां के जमीन को कॉर्पोरेट के हवाले करने का काम किया है. पूर्व की भाजपा सरकार ने भी मोमेंटम झारखंड के नाम पर खेती योग्य भूमि को लूटने का काम किया. इसके लिये व्यापक योजना बनायी गयी. ऐसे में यहां की जनता ऐसे कानूनों से संशकित हो उठती है.
बिहार की तर्ज पर नहीं बनाया जा सकता बिल
वामदलों की ओर से सीपीआइ माले के जर्नादन प्रसाद ने कहा कि झारखंड लैंड म्यूटेशन बिल से जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गयी है. क्योंकि यह बिहार के लैंड म्यूटेशन अधिनियम की कार्बन कॉपी है. वामदलों का मानना है कि राज्य में बिहार की तर्ज पर लैंड म्यूटेशन बिल लागू नहीं किया जा सकता. राज्य सरकार के विधि विभाग ने राज्य को बगैर समझे आनन फानन में प्रारूप तैयार किया है. इस पर ऑनलाइन प्रक्रिया होने और बिहार मेंटनेंस ऑफ रिकॉर्डस का हवाला दिया गया.
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राज्य के राजस्व, निबंधन और भूमि सुधार विभाग ने भी इसके अध्ययन में कोताही बरती है और हड़बड़ी में बिहार के प्रारूप को अपनाते हुए इसे कैबिनेट में भेज दिया. उन्होंने कहा कि वामदलों की समझ है कि राज्य में जमीन का मसला काफी पेचीदा है. ऐसे में जमीन के नक्शा का प्रावधान अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिये. ऐसे में मुख्यमंत्री से मांग की गयी है कि सर्वदलीय बैठक बुलाकर इस पर निर्णय लिया जाए.




