
Rabchi: राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण घोटाले में आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका (आईए) पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की कोर्ट ने प्रार्थी की हस्तक्षेप याचिका को मंजूर करते हुए फाइनल सुनवाई के लिए 5 सप्ताह बाद की तिथि निर्धारित की. कोर्ट ने मामले में निचली अदालत से इस केस के ट्रायल की वर्तमान स्थिति मांगी है. पूर्व में कोर्ट ने मामले में प्रार्थी को निचली अदालत के आरोप गठन के खिलाफ फ्रेश हस्तक्षेप याचिका (आईए ) दायर करने का निर्देश दिया था.
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इससे पहले मधु कोड़ा की ओर से पूर्व में दाखिल आईए को वापस ले लिया गया था. दरअसल, प्रार्थी ने सबसे पहले हस्तक्षेप याचिका दायर कर निचली अदालत द्वारा मामले में उनके डिस्चार्ज पिटीशन खारिज किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इसी दौरान निचली अदालत ने उनके खिलाफ आरोप गठित कर दिया था. जिसके बाद मधु कोड़ा ने फ्रेश हस्तक्षेप याचिका (आईए ) दाखिल कर निचली अदालत द्वारा मामले में आरोप गठित किए जाने को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी है.
बता दें कि मधु कोड़ा पर आरोप है कि पूर्व में मुख्यमंत्री के उच्च पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने हैदराबाद की बिजली कंपनी आईवीआरसीएल के डायरेक्टर डीके श्रीवास्तव से मुंबई में 11.40 करोड़ रुपए घूस ली साथ ही कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए उसे लातेहार, गढ़वा और पलामू सहित छह जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण करने का टेंडर दे दिया. इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है, इस मामले में मधु कोड़ा ढाई साल तक जेल में भी रहे थे. बाद में उन्हें 30 जुलाई 2013 को जमानत मिली थी.
बता दें कि आरोप है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने हैदराबाद की ब्लैक लिस्टेड कंपनी आईवीआरसीएल को काम दिया था. वर्ष 2006 में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण परियोजना के लिए झारखंड को केंद्र से 467.76 करोड़ रुपए मिले थे. इस परियोजना के तहत झारखंड के छह जिलों के 27359 गांवों का विद्युतीकरण किया जाना था. इससे 29.26 लाख परिवारों को सीधे तौर पर लाभ मिलता.




