
Ranchi : 1987 बैच के आइएएस सुखदेव सिंह 37 साल के अपने सर्विस लाइफ के बाद रिटायर हो गये. अपने करियर में वह सबसे पहले रांची जिले के मांडर प्रखंड के बीडीओ बने (प्रोबेशन पीरियड). फिर लातेहार और जमशेदपुर के एसडीओ. मधुबनी में डीडीसी फिर बिहार के प्राथमिक शिक्षा निदेशक. संयुक्त बिहार में देवघर, पूर्णिया, बोकारो, डाल्टनगंज, गुमला और गिरिडीह के डीसी रहे. झारखंड जब बना तो वो राजधानी रांची के डीसी थे. समाज कल्याण विभाग के निदेशक. यहां तक कि दो बार मुख्यमंत्री के सचिव भी रहे. झारखंड के आइपीआरडी, शिक्षा, वन, वित्त, गृह, स्वास्थ्य, कार्मिक, वाणिज्य कर, जल संसाधन, भवन निर्माण, नगर विकास समेत अन्य महत्वपूर्ण विभागों के सचिव के रूप में रहे. मुख्य सचिव बनने से पहले विकास आयुक्त भी रहे. तीन साल आठ महीना और सात दिनों तक झारखंड के मुख्य सचिव के पद पर रहे. यह अब तक का झारखंड के किसी मुख्य सचिव के अपने पद पर बने रहने का सबसे लंबा रिकॉर्ड है. रिटायरमेंट से चार महीने पहले उनका तबादाल मुख्य सचिव के पद से एटीआइ के महानिदेशक के रूप में कर दिया गया. 31 मार्च को उनके कार्यकाल का आखिरी दिन था.
निर्विवाद और बिना किसी आरोप के हर पद पर रहे
नाम सुखदेव सिंह. काम- सिर्फ सरकार का काम करना. यह बात भी एक रिकॉर्ड ही है कि जो सीएम (मधु कोड़ा) जेल गये, उनके प्रधान सचिव थे. हर तरह के आरोपों से घिरे शिबू सोरेन के कार्यकाल में भी वो सीएम के प्रधान सचिव रहे. यहां तक तक कि जमीन घोटालों के साथ तमाम तरह के आरोप झेल रहे जेल में बंद हेमंत सोरेन के कार्यकाल में बतौर मुख्य सचिव सबसे लंबी पारी खेली. लेकिन आजतक उन पर किसी तरह का कोई आरोप ना ही किसी राजनैतिक पार्टी और ना ही किसी मीडिया हाउस की तरफ से लगा. जिस पद पर रहे वहां सरकारी कामों को अमलीजामा पहनाने के साथ मुखर और हमेशा हंसमुख रहे. लेकिन ऐसा नहीं है कि उनसे सभी लोग खुश रहे. ब्यूरोक्रेसी में कई लोग उनके काम को लेकर सवाल उठाते रहे. लेकिन काफी सहजता पूर्व उन्होंने सारी चीजों को संभाला और अपना कार्यकाल पूरा किया.
इसे भी पढ़ें – आइएएस निधि खरे ने उपभोक्ता मामलों के सचिव का पदभार ग्रहण किया



