
Ranchi: लॉकडाउन के बाद भी लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है. हंगर वॉच के तहत किये गये सर्वे में इस बात की पुष्टी होती है . इस सर्वे में 179 परिवारों को शामिल किया गया था. इनमें से लगभग सभी परिवारों ने माना है कि लॉकडाउन के बाद उनकी आय कम हुई है. सर्वे में शामिल 58 प्रतिशत परिवारों ने बताया कि उन्हें भोजन के लिये उधार लेने की जरूरत पड़ी है. वहीं 11 प्रतिशत परिवारों को अपने घर की कीमती वस्तुएं बेचनी पड़ी. लॉकडाउन के दौरान ओर उसके बाद आठ प्रतिशत परिवारों को अपनी जमीन बेचनी पड़ी. सर्वे में शामिल परिवारों में 40 प्रतिशत लोग काम की तलाश में हैं. वहीं 21 प्रतिशत लोग के स्थिति में सुधार हुआ. बता दें कि यह सर्वे 12 सिंतबर से 10 अक्टूबर के बीच किया गया था. जिसमें लॉकडाउन के बाद परिवारों की स्थिति का आकलन किया गया.
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41 प्रतिशत परिवारों को ही मिला अनाज
लॉकडाउन के दौरान भोजन की उपलब्धता का भी सर्वे में आंकलन किया गया. इस दौरान मिलने वाले भोजन में मुख्य फोकस अंत्योदय परिवारों पर रहा. ऐसे में अप्रैल से अगस्त के बीच मात्र 41 प्रतिशत परिवारों को ही मुफ्त अनाज मिला. अन्य परिवारों को कुछ महीने ही मुफ्त अनाज मिला. इस दौरान एक तिहाई लोगों ने राशन कार्ड के लिए आवेदन किया. लेकिन उन्हें कार्ड नहीं मिला. हालांकि इस सर्वे के अनुसार पीडीएस से 94 प्रतिशत परिवारों को भोजन मिलता रहा. सर्वे का मानें तो 16 प्रतिशत परिवारों के पास राशन कार्ड के लिये जरूरी आवेदन नहीं थे. इस दौरान 69 प्रतिशत बच्चों को मीड डे मील के तहत सूखा राशन मिला. वहीं 15 प्रतिशत ऐसे परिवार रहे जिन्हें कुछ नहीं मिला. 53 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं और बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों से सूखा राशन मिला. पाया गया कि आंगनवाड़ी सेवा के हकदार एक तिहाइ परिवारों को भी राशन नहीं मिला.
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दाल, हरी सब्जी की खपत कम हुई
लॉकडाउन के बाद परिवारों में खाद्य सामग्री की खपत कम हुई. सर्वे के दौरान पाया गया कि दाल, हरी सब्जी की खपत काफी कम हो गयी. सर्वे में शामिल लोगों ने बताया कि लॉकडाउन के पहले मांसाहार का उपयोग कम था. लेकिन 93 प्रतिशत परिवारों ने बताया कि इन खाद्य पदार्थों को और भी कम खा पा रहे है. लॉकडाउन के पहले जहां 17 प्रतिशत लोग कभी कभार भूखे पेट सोते थे. वहीं लॉकडाउन के बाद ये आंकड़ा 23 प्रतिशत पहुंच गया है.
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सरकार से की गयी हैं ये मांगे
भोजन का अधिकार अधिनियम के तहत सरकार से कुछ मांगे की गयी है. सर्वे का माने तो आने वाले कुछ महीनों भी लोगों का ये संघर्ष जारी रहेगा. ऐसे में सरकार से मांग की जा रही है कि पीडीएस के तहत खाद्य तेल और दालों को भी शामिल कियी जाना चाहिए. आंगनबाड़ियों को फिर से खोला जाना चाहिए जिसमें बच्चों को अंडा मिल और अन्य पौष्टिक आहार मिल सके. इसके साथ ही आदिम जनजातियों, बुजूर्ग और भूमिहीनों को विशेष पोषण पैकेज दिया जाना चाहिए.
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