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दिल्ली में आंगनबाड़ी सेविका का मानदेय 10,178 रुपये, झारखंड में मात्र 4400

Giridih : केंद्र सरकार ने आंगनबाड़ी की सेविकाओं और सहायिकाओं के मानदेय में भले ही मामूली बढ़ोतरी की है, लेकिन यह अभी भी सम्मानजनक नहीं कहा जा सकता है. झारखंड में तो स्थिति और भी बुरी है. यहां सेविकाओं को मात्र 4400 रुपये और सहायिकाओं को मात्र 2200 रुपये ही मिलता है. यह मानदेय भी अनियमित है. जबकि इस मद की अधिकतम राशि केंद्र सरकार भेजती है. पहले सेविकाओं को 3000 ही मिलता था. काफी मांग और संघर्ष के बाद राज्य सरकार पिछले कई सालों में मात्र 1400 रुपये ही बढ़ा पायी है. जो आज की इस महंगाई और इनके दायित्वों को देखते हुए काफी कम है. इस मामले में दिल्ली से काफी पीछे है झारखंड. धनबाद के विधायक राज सिन्हा ने सरकार से केंद्र सरकार के फैसले को राज्य में शीघ्र लागू करने की मांग की है.

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दिल्ली में 10 हजार से अधिक है मानदेय

आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं और सहायिकाओं के मानदेय के मामले में दिल्ली ना सिर्फ झारखंड, बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बन गया है. दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने एक ही फैसले में आंगनबाड़ी सेविका का मानदेय 10,178 रुपये और सहायिका का मानदेय 5089 कर दिया. यह पूरे देश में सबसे अधिक है. अब केंद्र द्वारा मानदेय बढ़ाने से इसमें और इजाफा होने की संभावना है. मध्य प्रदेश में भी आंगनबाड़ी सेविकाओं का मानदेय लगभग 10 हजार कर दिया गया है. उड़ीसा भी झारखंड से ऊपर है. वहां भी सेविका को छह हजार रुपये मानदेय मिलता है.

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रघुपति राघव राजा राम, कब तक करें 4400 रुपये में 44 काम

झारखंड में कुल 38,432 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं. इनमें लगभग 75 हजार सेविकाएं और सहायिकाएं कार्यरत हैं. कम और अनियमित मानदेय, कार्य का बोझ और सुविधाओं की कमी और अन्य मांगों को लेकर राज्य की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हमेशा आंदोलन और हड़ताल करने को विवश रहती हैं. इससे महिला व बाल विकास और पोषण की सभी गतिविधियां ठप हो जाती हैं. इसी साल पिछले दिनों झारखंड प्रदेश आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन के बैनर में राज्य भर की कार्यकर्ताओं ने रांची और जिला मुख्यालयों में अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन किया. माह भर तक आंदोलन चला. लेकिन सरकार ने आश्वासन के अलावा कुछ नहीं दिया. इससे सरकार की इस मुद्दे के प्रति गंभीरता की कमी का पता चलता है. गौरतलब है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में मुख्य तौर पर छह सेवाएं- पूरक आहार, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच, रेफरल सेवाएं, स्कूल पूर्व शिक्षा तथा स्वास्थ्य शिक्षा शामिल हैं. साथ ही सरकार हर आयोजन और अन्य कार्यों में भी इनकी सेवाएं लेती रहती हैं. आंदोलन में तो इन आंगनबाड़ी वर्कर्स ने नारा भी लगाया था – “रघुपति राघव राजा राम, कब तक करें 4400 रुपये में 44 काम… हमारी मांगें पूरी करो, वरना गद्दी छोड़ दो.”

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