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झारखंड में भी शुरू हो सकती है सेवाओं की होम डिलीवरी

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Ranchi: सरकारी सेवाओं की घर बैठे आपूर्ति का दिल्ली का प्रयोग झारखंड में भी दोहराया जा सकता है. दिल्‍ली में सोमवार को शुरू हुई इस सेवा के अंतर्गत 40 प्रकार के कामों के लिए लोगों को सरकारी दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी. फोन करने पर सरकारी कर्मचारी घर आ कर काम कर देगा. इस योजना से नागरिकों को काफी सुविधा और राहत मिलेगी.

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भाजपा मुख्‍यालय में चर्चा, चुनाव में  हो सकता है फायदा

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खबर है कि मंगलवार को इस योजना को लेकर भाजपा मुख्यालय में काफी चर्चा रही. दबी जुबान में कई नेताओं ने माना कि योजना झारखंड में लागू होने से आगामी चुनाव में काफी लाभ हो सकता है. फिलहाल सरकारी दफ्तरों में मामूली कामों के लिए लोगों को काफी दौड़ना पड़ता है. इससे सरकार की बदनामी होती है. भ्रष्टाचार की भी संभावना रहती है. वहीं, अगर होम डिलीवरी सिस्टम चालू कर दिया जाए, तो झारखंड को ऐसी योजना लागू करने वाले प्रथम भाजपा शासित राज्य का गौरव मिल सकता है. वैसे भी कई मामलों में रघुवर दास ने आगे बढ़कर पहले नंबर पर आने की कोशिश की है.

सूत्रों के अनुसार झारखंड में ऐसी योजना लागू करने की संभावना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. संघ बैकग्राउंड से जुड़े एक नेता जो भाजपा और सरकार में महत्वपूर्ण हैसियत रखते हैं, के द्वारा इस संबंध में गंभीरता से प्रस्ताव तैयार करने की चर्चा है. झारखंड में कौन सी सरकारी सेवाओं की घर बैठे आपूर्ति करना आसान होगा, किन सेवाओं को लेकर नागरिकों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है तथा किन सेवाओं की आपूर्ति करने पर नागरिकों को ज्यादा खुशी होगी, ऐसे विषयों पर सलाह ली जा रही है.

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झारखंड में 50 सेवाओं की हो सकती है होम डिलिवरी

चर्चा के अनुसार राइट टू सर्विस एक्ट लागू करने में मुख्यमंत्री रघुवर दास की प्रमुख भूमिका रही है. राज्य में डिप्टी सीएम रहते हुए उन्होंने वर्ष 2011 में ही यह कानून लागू कराया था. बाद में 2015 में मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने इसमें नई सेवाओं को जोड़कर विस्तार दिया. इसलिए ऐसी सरकारी सेवाओं को समयबद्ध तरीके से करने और जिम्मेदार पदाधिकारियों को दंडित करने की व्यवस्था पहले से लागू है. इसमें लगभग 200 से भी ज्यादा सेवाएं शामिल हैं. जबकि दिल्ली में अभी मात्र 40 सेवाओं को लिया गया है.

लेकिन, झारखंड में प्रचार के अभाव में इस कानून का राजनीतिक लाभ नहीं मिल पाया. जबकि, झारखंड सेवा की गारंटी कानून को एक क्रांतिकारी कदम माना जाता है. अगर उस कानून के तहत चुनिंदा 50 सेवाओं को होम डिलीवरी स्कीम में लाया जाए, तो देशभर में झारखंड सरकार की काफी अच्छी छवि बन सकती है. आगामी लोकसभा चुनाव के पहले ऐसा करने से सरकार को काफी राजनीतिक लाभ मिल सकता है.

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होम डिलीवरी सर्विस नहीं होगी फ्री, सरकार जुटायेगी राजस्‍व

चर्चा के अनुसार झारखंड में पहले से ही राइट टू सर्विस कानून लागू होने के कारण वैसी सेवाओं की घर बैठे आपूर्ति करने के लिए किसी एजेंसी का चयन कर देने से यह काम हो सकता है. बताया जाता है कि सेवाओं की होम डिलीवरी का काम किसी कॉल सेंटर चलाने वाली एजेंसी के माध्यम से करना कोई मुश्किल काम नहीं है. इसके लिए प्रति आवेदक 50 रुपए का शुल्क अलग से लिया जाता है. अगर कॉल सेंटर चलाने वाली एजेंसी को एक दिन में 1000 प्रमाणपत्र लोगों के घर पहुंचाना पड़ा तो, बदले में 50,000 रुपये का राजस्व प्राप्त होगा. इसके जरिए स्टाफ का मेंटेनेंस करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं होगा.

सूत्रों के अनुसार इस संबंध में रायशुमारी के बाद जल्द ही इसे अमली जामा पहनाने के लिए प्रस्ताव लाया जा सकता है. खास तौर पर जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र, जाति, आय, स्थानीय निवासी प्रमाणपत्र, जमीन की रसीद, लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस, प्रदूषण प्रमाणपत्र, विवाह प्रमाणपत्र, बिजली कनेक्शन का फॉर्म भराना, बिजली का लोड बढ़ाना जैसे काम प्रथम चरण में शुरू किये जा सकते हैं.

चर्चा के अनुसार वर्तमान मैनपॉवर के माध्यम से ऐसा करने में कठिनाई भले हो, किसी कॉल सेंटर एजेंसी के हवाले ऐसे काम दे दिए जाएं, तो सारे झंझट दूर हो जायेंगे. वह एजेंसी वाला लोगों के घर पहुंचाने के बदले मात्र पचास रुपये लेगा. सरकार को अपनी तरफ से कुछ नहीं लगाना होगा और मुफ्त में वाहवाही मिल जाएगी.

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