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सांसद शिबू सोरेन और मंत्री लुईस मरांडी का है क्षेत्र, लेकिन श्रमदान कर सड़क बनाने को मजबूर ग्रामीण

नेताओं की उदासीनता के बाद ग्रामीणों ने उठाया बीड़ा

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Dumka: अमूमन किसी इलाके के सांसद और विधायक से लोगों को उम्मीद रहती है कि वो इलाके के विकास के लिए काम करेंगे. लेकिन दुमका में इससे अलग तस्वीर देखने को मिल रही है. सांसद और मंत्री गांव की समस्यओं को हल करने में रूचि नहीं रखते. ऐसे में राजबांध पंचायत स्थित कबड़ा टोला में कीचड़ भरी सड़क को ग्रामीणों ने श्रमदान और स्थानीय संसाधनों से बनाने की ठान ली और 100 मीटर सड़क बना डाली.

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श्रमदान से सड़क बनाने के काम ने जहां सरकार के विकास के प्रति संवेदशीलता को बेनकाब कर दिया. वही राज्य सरकार की मंत्री लुईस मरांडी के भी विकास के दावे को खोखला सबित कर दिया है. वही कबड़ा टोला की सड़क की समस्या से सांसद शिबू सोरने भी ग्रामीणों को निजात नहीं दिला सके.

कहां है कड़बा टोला

दुमका जिला के दुमका प्रखंड स्थित राजबांध पंचायत स्थित कबड़ा टोला है. प्रखंड मुख्यालय से राजबांध गांव के कबड़ा टोला जाने वाली सड़क को चितना टोला और कबड़ा टोला के ग्रामीण उपयोग करते हैं.

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दोनों टोला में करीब 500 से अधिक संताल परिवार बसा है. प्रखंड मुख्यालय से गांव तक जाने वाले रास्ते में करीब सौ मीटर हमेशा कीचड़ भरा रहता था. ग्रामीणों ने कई बार इस समस्या को लेकर जिला के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई. लेकिन ना ही मंत्री ने सड़क बनाने में रूचि दिखायी और ना ही सांसद शिबू सोरन, और ना ही स्थानीय प्रतिनिधियों ने.

क्या कहते हैं ग्रामीण

राज्य में विकास के नाम पर सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है. लेकिन हमारे गांव की सड़क को बनवाने में स्थानीय जनप्रतिनिधि ने रूचि नहीं ली. कई बार इस विषय से प्रशासन और नेताओं को अवगत भी कराया गया है. यहां तक की जिला के वरीय अधिकारियों के समक्ष भी समस्या को पिछले दो सालों से रखा जा रहा है. सड़क नहीं होने से प्रखंड मुख्यालय या जिला तक जाने-आने में बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था.

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क्या कहते हैं जिप सदस्य योगेश मुर्मू

जिला परिषद सदस्य योगेश मुर्मू का कहना है कि टोला जाने के रास्ते को लेकर पूर्व डीडीसी (शशि रंजन) ने पंचायत सचिव को पुलिया बनाने के निर्देश दिए थे. साथ ही सड़क और नाली बनाने की बात भी कही गई थी. लेकिन अब अधिकारी का तबादला हो चुका है और दो साल बीतने के बाद भी काम नहीं किया गया. कीचड़ वाले सड़क के किनारे आंगनबाड़ी का भी भवन है. जिसमें छोटे-छोटे बच्चे को जाने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है.

ग्रामसभा की बैठक में सड़क बनाने पर हुआ निर्णय

गांव की समस्या को लेकर ग्रामीण मंत्री लुईस मरांडी से भी मिलने गये. लेकिन निराशा ही हाथ लगी. अंत में गांव वालों ने अपने ही बलबूते पर सड़क बनाने की ठानी. बैठक में तय किया गया कि सभी ग्रामीण मिलकर स्थानीय संसधानों से करीब 100 मीटर लम्बी सड़क बनायेंगे. जिसकी शुरूआत मंगलवार से की गई.

सड़क बनने का कार्य में मुख्य रूप से विष्णु मुर्मू, लोरेश मुर्मू, मिस्त्री मुर्मू, जैनी मुर्मू, बाबूराम टुडू, निर्मल मुर्मू, डोली मरांडी, सीता मरांडी, सरोला हेम्ब्रोम, नीला टुडू, मीनू मरांडी, पकलू सोरेन, सोहागनी हेम्ब्रोम, मंगल किस्कू के साथ काफी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे उपस्थित रहे.

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