
Dhanbad : जो दूसरों का प्रचार करता है उसका दर्द कोई नहीं जानता. जी हां हम बात कर रहे हैं बैनर पोस्टर लगाने वाले मजदूर एवं कर्मचारियों का. जिसका वेतन आज भी न्यूनतम राशि पर ही सिमित है और वह इतने ही पैसे से अपने पूरे परिवार का भरण पोषण करता है. बैनर पोस्टर लगाने के दौरान अगर किसी प्रकार की घटना घट गई तो मजदूरों को कुछ नहीं मिलता.
क्योंकि कंपनी उन लोगों का बीमा तक नहीं कराती. इतना ही नहीं यहां तक की पोस्टर लगाने वाले मजदूरों को कभी कभी रात में भी अपनी ड्यूटी करनी पड़ती है. वह भी बिना सुरक्षा व सेफ्टी के, अगर किसी कारणवश लोहे के खंभे में पोस्टर लगाने के दौरान अगर हल्की सी भी चूक हो जाए तो सीधे नीचे गिर जाता है इससे उनके पैर एवं हाथ टूट जाते हैं, कुछ लोगों की जान तक चली जाती है फिर भी कंपनी के द्वारा मुआवजा मांगने पर भी नहीं मिलता है.
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नियमों को ताक पर रखकर होता काम
सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए निजी कंपनियां होर्डिंग बैनर लगाने वाले स्कोप एवं सेल सहित अन्य कंपनियां जिले में कार्य कर रही हैं. जिसमें दर्जनों मजदूर एवं कर्मचारी कार्यरत हैं. सभी कंपनियां एक अच्छी खासी बैनर पोस्टर लगाने के ऐवज में पैसे कंपनियों से लेते हैं. लेकिन अपने मजदूरों को जब देने की बारी आती है तो उन्हें न्यूनतम हाजिरी भी नहीं देते हैं. यहां तक ही नहीं उन्हें किसी प्रकार का बेल्ट, जूता एवं हेलमेट टोपी भी नहीं देते हैं।
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क्या कहते हैं बैनर,पोस्टर लगाने वाले मजदूर
स्कोप,सेलवेल, सनराइज एवं दीपक संचेपी सहित अन्य कंपनियां जिले में कार्य कर रही हैं. जिसमें दर्जनों मजदूर कार्यरत है. वहीं स्कोप के अधीन कार्यरत कर्मी नाम ना छापने के शर्त पर कहा कि बैनर पोस्टर लगाने का काम सालों से करते आ रहे हैं. इस बीच कई बार घटनाओं का शिकार भी हो चुके हैं फिर भी कंपनी की ओर से कोई मुआवजा नहीं मिलता. यहां तक की 2 से 3 महीने तक पेमेंट भी रोक दिया जाता है.
जिसके कारण हम लोग परिवार चलाने में असक्षम हो जाते हैं. बैनर पोस्टर लगाने में किसी प्रकार का सेफ्टी नहीं दी जाती है. जान को जोखिम में डालकर यह कार्य हम लोग करते हैं. कभी-कभी ऐसा भी होता है जो रात को भी किसी न किसी जगह होर्डिंग लगानी पड़ती है. जैसे दुर्गा पूजा आ रहा है इसमें रात दिन कंपनी हम लोगों से काम लेती है. लेकिन इसके एवज में ओवरटाइम का पैसा नहीं मिलता है.
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क्या कहते हैं स्कोप एजेंसी के डायरेक्टर
निगम द्वारा दिया गया स्कोप हार्डिंग एजेंसी के डायरेक्टर दीपक सोनी ने कहा कि मजदूरों का वेतन एक निर्धारित सैलेरी पर है जो जिस लायक है उसे दिया जाता है. साथ ही मजदूर हार्डिंग को लगाने के दौरान खुद सेफ्टी लेकर चलते हैं. हमारे हमारा और से कुछ नहीं दिया जाता है.
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क्या कहते हैं लेबर सुपरिटेंडेंट
लेबर सुपरिटेंडेंट वाल्टर कुजुर कहते हैं कि बिना सेफ्टी का बैनर पोस्टर मजदूरों से लगाना गलत है. मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं था में देखता हूं.




