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हेमंत सरकार का श्वेत पत्रः डबल इंजन की सरकार ने एक्सीलेटर कम और ब्रेक का इस्तेमाल ज्यादा किया

Ranchi: चुनौतियां गंभीर हैं, वित्त व्यवस्था कमजोर है. खजाने पर देनदारियों का बोझ है. विकास बेपटरी हो गया है. योजनाओं के क्रियान्वयन में समस्याएं हैं. डबल इंजन ने एक्सीलेटर का कम और ब्रेक का ज्यादा इस्तेमाल किया. सामूहित नेतृत्व और परस्पर विश्वास समस्याओं का सामना करने की शक्ति देगा.

गठबंधन सरकार को भरोसा है कि जनता की कसौटी पर खरा उतरेंगे. पस्तहाल वित्त व्यवस्था मजबूत बनेगी. देनदारियां चुकायेंगे. पैसा अतिरिक्त संसाधनों से अर्जित करेंगे. साथ ही वित्त व्यवस्था पटरी पर लायेंगे. ऊपर लिखी गयी बात हेमंत सरकार के श्वेत पत्र का निष्कर्ष हैं.

उन्होंने साफ तौर से तत्कालीन सरकार के नारे “डंबल इंजन की सरकार” को राज्य में फेल बताया है. कहा है कि डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद राज्य की वित्तीय हालत बेहाल हो गयी.

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पूर्ण बहुमत से ज्यादा मजबूत गठबंधन की सरकार

हेमंत सरकार ने अपने श्वेत पत्र के निष्कर्ष में कहा है कि साल 2014 से 2019 तक राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार रही. इस दौरान डबल इंजन की सरकार का मुहावरा जोर पकड़ा. राज्य गठन के बाद से हमेशा राज्य में मिली-जुली सरकार रही. आम जन में धारणा थी कि मिली-जुली सरकार के कारण जन योजनाएं बाधित रही हैं. लेकिन इस बार फिर जनता ने मिल-जुली सरकार पर भरोसा किया. पूर्व सरकार जनता की आकांक्षाओं पर खरी नहीं उतरी.

हेमंत सरकार जनता के भरोसे पर खरा उतरना चाहती है. कुछ दिनों के अनुभव से जानकारी होती है कि वर्तमान सरकार के समक्ष चुनौतियां अधिक हैं. जरूरी है कि भरोसे को ध्यान में रखते हुए वित्तीय विश्लेषण को पारदर्शिता के साथ जनता के सामने रखा जाये. विभागों की स्थिति से जानकारी होती है कि राज्य की वित्तीय स्थिति कमजोर है. लगातार लोन बढ़ने और ब्याज में देनदारी बढ़ने से ऐसी स्थिति हुई है. बिना स्टडी के योजनाओं को लेना और काम शुरू करना भी एक प्रमुख कारण है.

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जीएसटी के तहत 1800 करोड़ घोटाले की बात सामने आयी

पिछले पांच सालों में राजस्व स्रोतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई. टैक्स में कई तरह की रियायत देना इसका एक प्रमुख कारण है. सिर्फ जीएसटी में 1800 करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आयी है. जिसके कारण बजट प्लान और बजट आकलन के अनुसार राजस्व की प्राप्ति नहीं हुई.

राजकोष में कई बार नेगेटिव बैलेंस भी देखने को मिला. कोल कंपनियों का 65 हजार करोड़ बकाया, ऊर्जा विभाग की योजनाओं को पूरा करने और देनदारी में लगभग 21 हजार करोड़ की राशि वर्तमान सरकार को वहन करनी होगी. पूर्व सरकार ने केंद्र को खुश करने के लिए राज्य के जनता के हितों के साथ समझौता किया.

बहुत कम संसाधन ही अब राज्य सरकार के पास

अलग-अलग स्रोतों से लोन के बाद भी राज्य सरकार गैर विकास व्यय को ही पूरा कर पा रही है. बहुत कम संसाधन ही अब राज्य सरकार के पास है. उधार के नाम पर एक बड़ी राशि है. ऐसे में बड़ा अंश लोन और सूद में चला जा रहा है. पिछले पांच सालों में संसाधनों के साथ प्रशासनिक क्षमता का भी ह्रास हुआ है.

अल्पकालिक और दीर्घकालीक प्रयास किये जायेंगे

समाजिक न्याय के साथ विकास के लिये वर्तमान सरकार को अल्पकालिक और दीर्घकालीक प्रयास किये जायेंगे. अलग अलग परिस्थितियों का इसमें ध्यान रखा जायेगा. अब तक जिन बाधाओं की जानकारी हुई है उनका समाधान भी किया जायेगा. केंद्र और अन्य स्रोतों से वित्तीय संसाधन प्राप्त करने के लिये योजनाएं तैयार की जायेंगी.

सेवा प्रदान करनेवाली योजनाओं पर जोर दिया जायेगा. आनेवाले पांच सालों में वर्तमान सरकार राजस्व संग्रह में वृद्धि कर और अनुपयोगी योजनाओं को बंद कर जनहित में काम करेगी. जो भी योजनाएं चल रही हैं और जो जनहित में नहीं हैं. उनकी समीक्षा कर निर्णय लिया जायेगा. केंद्र और सार्वजनिक उपक्रमों के पास राज्य का जो भी बकाया उसे वापस लेने की कोशिश की जायेगी. संसाधनों के आभाव में विकास कार्य न रुके इसका प्रयास किया जायेगा. इसमें उपलब्ध संसाधनों को सम्यक परियोजनाओं पर खर्च करना शामिल है.

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