JharkhandLead NewsRanchiTOP SLIDER

एचईसीकर्मियों ने अनिश्चितकाल के लिए कंपनी गेट में की तालाबंदी, बकाया वेतन की है मांग

मुख्यालय के अंदर किसी के भी प्रवेश पर कर्मियों ने लगायी रोक

Ranchi : हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) के कर्मियों ने एक बार फिर से हड़ताल शुरू कर दी है. बुधवार सुबह एचईसी मुख्यालय के तीनों प्लांट में तालबंदी कर दी गयी है. हड़ताल बकाया वेतन की मांग को लेकर की जा रही है. जिसमें एचईसी के अफसरों, कर्मियों और मजदूरों की सहभागिता है. इस दौरान मजदूर हेवी मशीन टूल्स प्लांट (एचएमटीपी), हेवी मशीन बिल्डिंग प्लांट (एचएमबीपी) और फाउंड्री फोर्ज प्लांट (एफएफपी) के मुख्य गेट पर सुबह से ही जुटने लगे थे. वहीं सुबह आठ बजे तीनों प्लांटों के मुख्य गेट के साथ-साथ निगम मुख्यालय के मुख्य गेट में ताला जड़ दिया गया. मुख्यालय सहित तीनों प्लांट में बुधवार से किसी के भी प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है. इस तालाबंदी के बाद एचईसी एक प्रकार से बंद पड़ गया है. कर्मचारियों ने कंपनी में अनिश्चितकाल के लिए तालाबंदी की है.

मुख्यालय के अंदर जाने की अनुमति नहीं

एचईसी में कर्मचारियों का 18 महीने और अफसरों का 20 महीने से वेतन बकाया है. बकाया वेतन की मांग को लेकर सभी सात श्रमिक संगठनों ने एक मंच पर आकर कंपनी में तालाबंदी की है. सातों श्रमिक संगठनों ने एचईसी बचाओ मजदूरजन संघर्ष समिति का गठन किया है. इसी समिति के बैनर तले तालाबंदी की गयी है. सभा की अध्यक्षता करते हुए मनोज पाठक ने कहा कि जबतक बकाया वेतन का भुगतान नहीं होता, तबतक यह तालाबंदी जारी रहेगी. मुख्यालय के समक्ष रोजाना मजदूरों के लिए खिचड़ी बनेगी. मजदूर वहीं खायेंगे, वहीं रहेंगे. किसी को मुख्यालय और प्लांट के अंदर जाने नहीं दिया जायेगा.

2600 कर्मियों को वतेन नहीं

एचईसी में अभी करीब 1100 स्थायी और 1500 अस्थायी कर्मचारी हैं. कुल संख्या 2600 है. जिनको किसी भी तरह का भुगतान अब कंपनी प्रबंधन द्वारा नहीं किया जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ अस्थायी मजदूरों का एग्रिमेंट भी लटका हुआ है. प्रबंधन द्वारा स्पष्ट पक्ष नहीं रखने की वजह से श्रमिक संगठनों ने एक मंच पर आकर आंदोलन शुरू किया. इस आंदोलन में बीएमएस के समर्थक बाहर से समर्थन कर रहे हैं. अभी एक मंच पर हटिया मजदूर कामगार यूनियन, हटिया मजदूर यूनियन, हटिया लोक मंच, एचईसी श्रमिक संघर्ष यूनियन, हटिया प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन और एचईसी ऑफिसर्स एसोसिएशन शामिल हैं.

क्या कहना है श्रमिक संगठनों का

श्रमिक संगठनों का कहना है कि अब मजदूरों के समक्ष भुखमरी की स्थिति पैदा हो गयी है. ऐसे में अब आरपार की लड़ाई से ही निर्णय निकलेगा. मजदूरों ने बहुत संयम का परिचय दिया. 22 माह से बिना वेतन के कार्यस्थल पर कामगार आ रहे हैं. रोजाना उपस्थिति बना कर शांतिपूर्वक रहते थे. प्रबंधन के आला अफसरों से कई दौर की वार्ता हुई. मगर आला अफसरों के पास कोई रास्ता नहीं है. वे झूठा आश्वासन देते आ रहे हैं. भारी उद्योग मंत्रालय भी एचईसी को लेकर गंभीर नहीं है. मंत्रालय ने भी स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी को किसी भी तरह का आर्थिक सहयोग नहीं मिलेगा. वर्तमान में कंपनी के पास करोड़ों का वर्क ऑडर है. मजदूर काम करके वेतन लेना चाहते हैं. मगर कार्यशील पूंजी नहीं होने की वजह से उत्पादन ठप हो गया. ऐसे में मजदूर क्या करें. श्रमिक संगठनों का कहना है कि कंपनी में कार्यरत एक-एक कर्मचारी कंपनी को बचाने के लिए शांतिपूर्वक बिना वेतन के काम कर रहे थे. मगर अब कर्मचारियों के पास आवाज बुलंद करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा. इसलिए सभी ने तालाबंदी कर आंदोलन शुरू किया.

अब भी पीएम मोदी से है श्रमिकों को उम्मीद

एशिया का सबसे बड़ा भारी उद्योग एचईसी वर्तमान में संकट के दौर से गुजर रहा है. कंपनी में उत्पादन पूर्णतः ठप हो गया है. इसरो, रक्षा, कोल सेक्टर, रेलवे, माइनिंग आदि सेक्टरों के लिए महत्वपूर्ण उपकरण बनानेवाली कंपनी बंदी के कगार पर पहुंच गयी है. एचईसी प्रबंधन और कर्मचारियों को अब भी उम्मीद है कि भारी उद्योग मंत्रालय से आर्थिक सहयोग मिलेगा. उसके बाद कंपनी में उत्पादन शुरू हो सकेगा. श्रमिकों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एचईसी जैसी मदर इंडस्ट्री, जिसे कारखानों का मंदिर भी कहा जाता है, उसे बंद नहीं होने देंगे. जिस प्रकार देश का वैभव विश्व पटल पर लौटा है, वैसे ही एचईसी का भी समय पीएम मोदी के सहयोग से लौटेगा.

घाटे में चल रहा एचईसी

भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार, एचईसी लगातार घाटे में चल रहा है. पिछले पांच साल में एचईसी के टर्नओवर में लगातार गिरावट आयी है. वर्ष 2018-19 में 356.11 करोड़, वर्ष 2019-20 में 132.68 करोड़, वर्ष 2020-21 में 202.76 करोड़, वर्ष 2021-22 में 184.69 करोड़ और वर्ष 2022-23 में 87.52 करोड़ का टर्नओवर रहा है. वर्तमान में एचईसी का घाटा 300 करोड़ तक पहुंच गया है. मंत्रालय की नजर में एचईसी के कारोबार में लगातार कमी और घाटे के कारण इसकी देनदारियां बढ़ी हैं. कंपनी पर 2000 करोड़ से ज्यादा की देनदारी है, जिसमें बढ़ोतरी हो रही है.

इसे भी पढ़ें – पलामू में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कार्यक्रम को फिर से रद्द करने के आदेश को चुनौती देने के लिए हाइकोर्ट ने प्रार्थी को दिया समय

Related Articles

Back to top button