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नगर निकायों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई अब नया बेंच करेगा

2013 में याचिका दायर की गई थी

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Chhaya

Ranchi: राज्य में नगर पंचायत विस्तार को लेकर मामला पिछले कुछ सालों से उच्च न्यायालय में लंबित है. इस संबध में 29 मार्च को इस मामले की सुनवाई होनी थी. लेकिन 29 मार्च को न्यायालय की सुनवाई सूची में इसकी जानकारी नहीं दी गई थी.

नयी बेंच करेगी सुनवाई

वहीं जब याचिकाकर्ताओं ने इस संदर्भ में न्यायालय कर्मियों से जानकारी मांगी तो बताया गया कि इसके लिए फिर से तिथि निर्धारित की जाएगी. अब इस मामले की सुनवाई नया बेंच करेगा.
पहले मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश कर रहे थे.

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वहीं अब इसकी सुनवाई न्यायाधीश रतनाकर भेंगरा की डबल बेंच करेगी. इसकी जानकारी देते हुए मंच के सदस्यों ने बताया कहा कि यह मामला बहुत दिनों से लंबित है. ज्ञात हो कि उच्च न्यायालय रांची में आदिवासी बुद्धिजीवि मंच ने याचिका दायर की है, जिस पर सुनवाई 2013 से ही चल रही है.

क्या है मामला

मंच के सदस्यों ने जानकारी दी कि साल 2013 में मंच की ओर से राज्य में नगर पंचायतों का विस्तार असंवैधानिक होने के खिलाफ मामला दायर किया गया था.

क्योंकि राज्य पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है. ऐसे में यहां जिला स्वाशासी परिषद् और विशेष ग्राम सभा को ही विशेष अधिकार प्राप्त है. सदस्यों ने बताया कि राज्य में इन नियमों का सही से पालन नहीं होने के कारण राज्य में तेजी से भूमि अधिग्रहण हो रहा है.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा था उच्च न्यायालय जाने

इसके पूर्व मंच की ओर से साल 2006 में सुप्रीम कोर्ट में भी अपील दायर की गई थी. जब राज्य में मुनसिपलिटी एक्ट 2006 लागू किया गया था. मामले की सुनवाई 2011 को होनी थी.
तभी राज्य में नयी मुनसिपलिटी एक्ट 2011 लागू कर दी गई. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंच को उच्च न्यायालय में मामला दायर करने का आदेश दिया था.

संसद में भी नहीं है पारित

मंच के प्रभाकर कुजूर ने जानकारी दी कि राज्य पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है. वहीं यहां पेशा एक्ट भी लागू है, भले ही ठीक से नहीं है. ऐसे में यहां नगर पंचायतों की आवश्यकता नहीं है.

उन्होंने बताया कि संविधान के आर्टिकल 243 जेड के सेक्सन 3 के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में नगर पंचायत विस्तार करने का अधिकार सिर्फ संसद को होता है. जबकि अभी तक राज्य के लिए संसद ने कोई नियमावली नहीं बनाई है.

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आरटीआई से हुई जानकारी

उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी लेने के लिए झारखंड सरकार के साथ ही अरबन डेवलपमेंट मंत्रालय नई दिल्ली को भी आरटीआइ लिखी गई है.

मंत्रालय की ओर से जवाब दिया गया है कि संसद की ओर से राज्य में नगर पंचायत विस्तार के लिए कोई संशोधन नहीं किया गया है. जबकि आर्टिकल 243 जेडसी के तहत यह अधिकार सिर्फ संसद को है कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में नगर पंचायतों का विस्तार हो या नहीं.

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