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राजनीतिक स्थिरता की ओर बढ़ा झारखंड, सियासी उठापटक अब बनने लगा इतिहास

Principal Correspondent

Ranchi: झारखंड के चुनाव परिणाम तकरीबन क्लियर हो गये. शनिवार को हुई काउंटिंग में फिर से हेमंत सोरेन सरकार को बहुमत मिल गया. 24 साल पहले बने झारखंड में यह महज तीसरी दफा होगा जब बहुमत वाली सरकार यहां बनेगी. वह भी लगातार दूसरी बार. 2014 से राज्य में पहली बार सियासी स्थिरता तब आयी जब रघुवर दास की अगुवाई में भाजपा ने यहां बहुमत के साथ सरकार बनाई. यह सरकार पूरे पांच सालों तक (2019) तक चली. इसके बाद 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में चुनाव परिणाम महागठबंधन (झामुमो-कांग्रेस-राजद) के पक्ष में आया. हेमंत सोरेन की अगुवाई में सरकार बनी. जनवरी 2024 तक हेमंत ही सरकार के मुखिया रहे. इसके बाद चंपाई सोरेन को झामुमो ने सीएम बनाया. जमीन घोटाले में जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद हेमंत फिर मुखिया बने. इसके बाद 13 और 20 नवंबर को वोटिंग हुई और सत्तारूढ झामुमो-कांग्रेस-राजद ने लगातार दूसरी बार बहुमत के साथ सत्ता हासिल की. इस तरह से यह कहा जा रहा कि राज्य अब राजनीतिक रूप से स्थिरता की ओर बढने लगा है. अल्प बहुमत वाली सरकारों के दिन अब यहां भी लदने को हैं.

24 साल में देखे 13 सीएम

बाबूलाल मरांडी झारखंड के पहले सीएम बने थे. नवंबर 2000 से मार्च 2003 तक उन्होंने भाजपा की सरकार चलाई. इसके बाद 2003 से 2005 तक अर्जुन मुंडा सीएम रहे. इनके बाद महज 10 दिनों के लिए शिबू सोरेन सीएम बने थे. इसके बाद फिर अर्जुन मुंडा एक साल तक सीएम रहे. निर्दलीय विधायक मधु कोड़ा इसके बाद दो सालों तक सीएम रहे. छठे सीएम के तौर पर शिबू सोरेन आए जो 6 महीने तक ही सरकार चला सके. इसके बाद एक बार फिर शिबू सोरेन और फिर अर्जुन मुंडा सीएम बने. 2013 में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद हेमंत सोरेन सीएम बने. वे करीब एक साल तक ही सरकार चला सके. फिर 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में राज्य में पहली बार रघुवर दास ने पूर्ण बहुमत वाली सरकार राज्य में बनाई. 2019 और अब 2024 में भी फिर से राज्य में हेमंत सोरेन कामयाब हुए.  2019 में वे  सीएम बने थे और अब फिर कमान उनके ही हाथों रहेगी.

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