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सरयू की अगुवाई में विधानसभा समिति की अनुशंसा, भद्रकाली व कौलेश्वरी मंदिर को टूरिस्ट सेंटर के तौर पर विकसित करे सरकार

Ranchi: चतरा स्थित मां भद्रकाली, मां कौलेश्वरी और बिहार के बोधगया में पर्यटकों की आवाजाही लगातार रहती है. हालांकि कुछ स्तरों पर कमियों के चलते अपेक्षित तौर पर उतने टूरिस्ट नहीं दिखते. अब राज्य सरकार इस दिशा में पहल कर सकती है. इन तीनों धार्मिक, ऐतिहासिक के केंद्रों को त्रिकोण धार्मिक पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित किया जा सकता है. इस संबंध में सामान्य प्रयोजन समिति सीएम हेमंत सोरेन से अनुशंसा करेगी. विधानसभा द्वारा गठित इस समिति में विधायक सरयू राय, अनंत ओझा, दीपिका पांडेय सिंह, मथुरा महतो शामिल हैं. समिति के सभापति सरयू राय ने सरकार को अनुशंसा किये जाने के संबंध में जानकारी दी है.

 

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योजना को कार्यरूप देना जरूरी

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सरयू राय ने ट्विटर पर जानकारी साझा करते हुए कहा है कि पिछले एक सप्ताह से राज्य के विभिन्न हिस्सों में सामान्य प्रयोजन समिति भ्रमण कर रही थी. यह कार्यक्रम अभी समाप्त हो गया है. मां भद्रकाली मंदिर प्रांगण परिसर स्थित कार्यालय में समिति की बैठक हुई. फैसला लिया गया है कि बोधगया, मां कौलेश्वरी और मां भद्रकाली त्रिकोण धार्मिक पर्यटन योजना को कार्यरुप दिया जाये. इसके लिये राज्य सरकार के पास अनुशंसा की जायेगी.

 

चतरा में मां भद्रकाली मंदिर की अपनी महिमा तो है ही, मां कौलेश्वरी धाम भी अटूट आस्था का केंद्र है. यह मंदिर 1575 फीट की ऊंचाई पर एक पहाड़ी पर स्थित है. धाम तक पहुंचने का रास्ता कठिन है. ऐसे में पर्यटकों, भक्तों की सहुलियत के लिये एक रोप-वे रास्ता बनाया जाना उपयोगी होगा. इसके लिये भी राज्य सरकार को अनुशंसा की जायेगी.

 

एक सप्ताह में 5 जिलों का दौरा

गौरतलब है कि विधानसभा की सामान्य प्रयोजन समिति 6 अगस्त से राज्य के अलग अलग जिलों के दौरे पर थी. 6 अगस्त को लोहरदगा, 7 को लातेहार, 8 को बेतला, 9 को गढ़वा, 10 को पलामू, 11 को चतरा का दौरा किया. अब समिति 13 अगस्त को विधानसभा स्थित कार्यालय में बैठेगी. समीक्षा बैठक के बाद विस्तृत सूचना राज्य सरकार को देगी.

 

बौद्ध और हिन्दू धर्मावलंबियों के लिये आदर्श केंद्र

गौरतलब है कि बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में दुनियाभर से लोग पहुंचते रहे हैं. माना जाता है कि यहीं महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. जिस पीपल वृक्ष के नीचे तपस्या करते हुए उन्हें ज्ञान मिला था, उस पीपल का वंश वृक्ष आज भी उसी जगह पर मौजूद है. चतरा (झारखंड) के इटखोरी स्थित भद्रकाली मंदिर के अलावा कौलेश्वरी धाम से भी भक्तों की आस्था जुड़ी रही है. बार बार इस पर जोर दिया जा रहा है कि बोधगया और चतरा के बीच अगर एक त्रिकोणीय पर्यटन सर्किट विकसित कर दिया जाये तो बौद्ध औऱ हिन्दू धर्मावलंबी बड़ी संख्या में इधर आयेंगे. राजस्व की भी वृद्धि होगी.

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