
Giridih : कोरोना काल में माओवादियों की सक्रियता ने प्रत्यक्ष तौर पर पुलिस की परेशानी बढ़ायr है. जोनल कमांडर पिंटू राणा अपने दस्ते के साथ गिरिडीह-जमुई जिले के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय है. इसकी बानगी है सरकार की योजनाओं को पूरा करने में जुटे ठेकेदार के मजदूरों की पिटाई. मजदूरों की पिटाई लेवी नहीं मिलने से बौखलाये पिंटू राणा के दस्ते ने की है.
इसे साफ जाहिर है कि ठेकेदार इलाके के माओवादियों को गुपचुप तरीके से लेवी पहुंचा रहे हैं. माओवादियों को बगैर लेवी दिए सीमावर्ती इलाकों में योजनाओं को पूरा करना फिलहाल किसी ठेकेदार के लिए संभव नहीं है. यह साफ है. लेकिन पहले इससे इनकार किया जाता था.
इसे भी पढ़ेंः जयपाल सिंह की जयंती पर सिमडेगा में होगा 10वीं जूनियर राष्ट्रीय महिला हॉकी चैम्पियनशिप का फाइनल
लेकिन भेलवाघाटी थाना क्षेत्र के दो गांवो में बन रहे पुल निर्माण के मजदूरों की पिटाई से यह भ्रम दूर हो गया. जबकि जिले के तिसरी-गांवा और देवरी में सीआरपीएफ के कैंप भी हैं. बावजूद ठेकेदार गुपचुप तरीके से इलाके के माओवादी को 10 प्रतिशत लेवी देकर काम पूरा कर रहे हैं.
सवाल उठना तय है कि जब इन इलाकों में पहले से सीआरपीएफ तैनात है, तो फिर ठेकेदार लेवी को क्यों दे रहै है. लेवी मांगने की जानकारी ठेकेदार प्रशासन को क्यों नहीं दे रहे? जबकि भेलवाघाटी को जमुई जिले से जोड़ने वाले इलाकों में माओवादी गतिविधी तेज देखी गयी है. गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ ने एंटी नक्सल ऑपरेशन तेज कर दिया है.
इसे भी पढ़ेंः ऑनलाइन टूर्नामेंट : शतरंज पर नहीं पड़ा कोविड-19 का असर, टेक्नालॉजी’ की बदौलत जारी रहा खेल, अन्य गेम्स ठप पड़े
एसपी सुरेन्द्र झा और एएसपी दीपक कुमार के नेतृत्व में भेलवाघाटी के गुनियाथर में बुधवार को कई इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया. जानकारी के अनुसार राज्य संपोषित योजना और पीएमजीएसवाई के फंड से देवरी के गुनियाथर, भतूआकुरा में करोड़ो की राशि से पुल निर्माण का कार्य चल रहा है.
इसी प्रकार तिसरी और गांवा के बेलाखुंटा, धनैता, धौवाटांड और बड़कीटांड में भी राज्य संपोषित मद से करोड़ो की राशि से सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है. ये सभी अभी निर्माणाधीन है. कहा जाता है कि इसके पीछे लेवी नहीं देने की मंशा एक बड़ा कारण है.
इसे भी पढ़ेंः पलामू: DC की पहल रंग लायी, मजदूरों की मेहनत और हुनर ने बदला क्वारेंटाइन सेंटर का स्वरूप




