
Palamu: झारखंड-बिहार की सीमा पर स्थित पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड के दंगवार कोरंटाइन सेंटर का स्वरूप बदल गया है. मजदूरों के रखे जाने से पहले इस केंद्र की दीवार और परिसर अव्यवस्थित थे. लेकिन हाल के दिनों में प्रवासी मजदूरों ने रंगरोगहन कर इस क्वारेंटाइन सेंटर (विद्यालय) को नया रूप दे दिया है.
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उपायुक्त की पहल पर मजदूरों ने दिखायी श्रमशक्ति और हुनर
पिछले दिनों जिले के उपायुक्त शान्तनु कुमार अग्रहरि ने दंगवार क्वारेंटाइन सेंटर का दौरा किया था. उन्होंने वहां क्वारेंटाइन मजदूरों से बातचीत भी की थी. उनके विचारों से प्रभावित होकर क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे मजदूरों ने अपनी श्रमशक्ति और हुनर से झारखंड राज्य को सजाने और संवारने का संकल्प लिया.
डीसी के जाते ही विद्यालय का रंग रोगन के साथ उसे स्वच्छ व सुंदर बनाने में जुट गये. इस सेंटर पर 39 मजदूर क्वारेंटाइन हैं. उन्होंने कहा कि समय का उपयोग कर वह अपनी मेहनत और हुनर से विद्यालय की तस्वीर बदलने में जुट गये हैं.
खेती कर रोजगार करेंगे
मजदूरों ने यह भी संकल्प लिया है कि अब वह दूसरे राज्य में काम करने नहीं जायेंगे. अब अपने राज्य में ही खेती बाड़ी व रोजगार करेंगे. मुखिया नीलम देवी, पंसस संतोष राम बीएचडब्लू सचिदानंद ने बताया कि डीसी शान्तनु कुमार अग्रहरि के दौरे के बाद से मजदूरों में उत्साह है. अलग-अलग इलाके के होने के बावजूद सभी मजदूर आपसी समनवय बनाकर विद्यालय का कायाकल्प करने में जुटे हैं. बहुत जल्द दंगवार विद्यालय की तस्वीर बदल जायेगी.
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रोजगार उपलब्ध कराने की पहल तेज: एसडीओ
हुसैनाबाद के अनुमंडल पदाधिकारी कुन्दन कुमार ने बताया कि बाहर से आने वाले मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में सरकारी पहल शुरू कर दी गयी है. क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे प्रवीण राम ने बताया कि घर लौटने की बेताबी तो है.
मगर संतोष है अपने ही इलाके में हैं. अब कोई चिंता नहीं है. उन्हें झारखंड लाने में सरकार ने सक्रियता दिखाई. अब रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था जरुरी है.
क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे मनीष कुमार ने कहा कि समय नहीं कट रहा था. उपायुक्त महोदय के सुझाव ने उनमें उत्साह जगाने का काम किया है. उन्होंने अनुमंडल पदाधिकारी कुंदन कुमार का भी आभार जताया.
उन्होंने कहा कि एसडीओ ने पेंट और अन्य सामग्री उपलब्ध कराने का काम किया है. समय भी आसानी से कट रहा है और राज्य के विकास में योगदान भी हो रहा है. उन्होंने सरकार से राज्य में उद्योगों की स्थापना कराने की मांग की, जिसमें स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिल सके. उन्होंने कहा कि राज्य की सरकारों ने झारखंड के मजदूरों की श्रमशक्ति व हुनर का फायदा नहीं उठाया. इसका उन्हें मलाल है.
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