
Palamu : झारखंड के पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर दुबे (ददई दुबे) द्वारा गढ़वा के खरौंधी बीडीओ को कथित रूप से जान से मारने की धमकी दिये का मामला काफी गर्म हो गया है. इससे गढ़वा जिले के अधिकारियों के बीच आक्रोश व्याप्त है.
इस सिलसिले में झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ की गढ़वा इकाई की बैठक हुई, जिसमें धमकी दिये जाने की घटना की निंदा एवं भर्त्सना की गयी और खरौंधी के बीडीओ महेंद्र छोटन उरांव की सुरक्षा का प्रबंध करने की मांग की गयी.
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जांच के लिए डीसी ने बनायी कमिटी
इस सिलसिले में गढ़वा के डीसी राजेश पाठक ने बताया कि धमकी और जोर-जबरदस्ती के मामले को लेकर अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने की प्रक्रिया चल रही है. यह समिति एक हफ्ते में अपनी जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को देगी, तब समुचित कदम उठाया जायेगा.
डीसी ने बताया कि राज्य प्रशासनिक सेवा संघ की गढ़वा इकाई द्वारा उनको पूरे मामले से अवगत कराया गया है. उन्होंने बताया कि पूर्व मंत्री चंद्रशेखर दुबे पर आरोप है कि 29 दिसंबर की शाम पांच बजे खरौंधी के बीडीओ महेंद्र छोटन उरांव के मोबाइल पर कॉल करके पूर्व मंत्री ने अपनी पत्नी के नाम पर एक भूखंड का नामांतरण करने का दबाव डाला. इसी बात को लेकर विवाद है. डीसी ने बताया कि खरौंधी बीडीओ खरौंधी अंचल के अंचलाधिकारी भी हैं.
यह है मामला
खरौंधी बीडीओ के अनुसार 29 दिसंबर की शाम पांच बजे पूर्व मंत्री ददई दुबे उर्फ चंद्रशेखर दुबे द्वारा फोन कर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया. साथ ही उन्होंने जान से मारने की धमकी दी. उन्होंने अपनी पत्नी के पक्ष में भूखंड का नामांतरण नहीं किये जाने पर बुरा अंजाम भुगतने की धमकी दी.
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झासा ने बैठक कर मांगी सुरक्षा
इधर, झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ (झासा) की गढ़वा जिला इकाई की बैठक उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई. इसमें खरौंधी बीडीओ सह सीओ महेंद्र छोटन उरांव द्वारा दिये गये आवेदन पर विचार-विमर्श किया गया. बैठक के दौरान भयमुक्त माहौल में कार्य करने के लिए गढ़वा डीसी और एसपी से अनुरोध किया गया.
मांग की गयी कि बीडीओ सह सीओ को सुरक्षा मुहैया करायी जाये, ताकि उनके साथ कोई अप्रिय घटना न हो. झासा जिला इकाई ने केंद्रीय इकाई से आग्रह किया है कि इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए कड़े कदम उठाये जायें.
बताया जा रहा है कि पूर्व मंत्री का अपनी ससुराल में भूमि को लेकर पत्नी के भाई-भतीजों से विवाद है और यह मामला अदालत में विचाराधीन है. इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने समाहर्ता पर दबाव बनाने की कोशिश की है.
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