
अनुज तिवारी
Ranchi : सरकार गठन के बाद से ही कृषि मंत्री बादल पत्रलेख यह दावा करते रहे हैं कि नयी निर्यात नीति बनाकर झारखंड में उत्पादित सब्जियों को विदेश भेजा जाएगा. इससे राज्य के सब्जी उत्पादक किसानों के वारे-न्यारे हो जाएंगे. आननफानन में एक बार तो यहां की सब्जियों को किसी तरह एजेंसी के माध्यम से विदेश भेजा गया लेकिन दूसरी बारी का इंतजार किसान आज भी कर रहे हैं.
सब्जी विदेश भेजने के मामले में देखें तो सरकार की निर्यात नीति फ्लॉप रही है. झारखंड के किसानों को सब्जियां विदेश भेजने के लिए इंतजार ही करना पड़ेगा. अब तक स्थिति यह है कि कोई भी एजेंसी इस काम के लिए आगे नहीं आ रही है. विभागीय सुत्रों के अनुसार कई एजेंसियों से बात हुई जिसके बाद इन एजेंसियों ने वादा किया कि वे काम करेंगे लेकिन जब समय आया तो एजेंसी ना नुकुर करने लगी. बताया जा रहा कि सरकार की बातों को नकारते हुए एजेंसियां भाग खडी हुई हैं.
ट्रांसपोटेशन है बड़ी समस्या
बताया जा रहा है कि इन एजेंसियों का कहना है कि झारखंड में कोई अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट नहीं होने के कारण उन्हें ट्रांसपोर्ट पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है. यहां से किसी भी सब्जियों को विदेश भेजने के लिए उसे सड़क मार्ग से पहले कोलकाता ले जाया जाता है और उसके बाद कार्गो से विदेश भेजा जाता है. इतने समय में सब्जियों की क्वालिटी भी खराब होती है जिससे विदेशों में अच्छे दाम मिलना मुश्किल हो सकता है. एजेंसियों की मानें तो पहले सरकार को निर्यात नीति पर काम करना होगा. फिर ट्रांसपोर्ट सुविधा मुहैया करानी होगी, तभी इतनी बड़ी योजना को अमलीजामा पहनाया जा सकता है।
अभी तक एक बार ही सब्जियां भेजी जा सकी है विदेश
झारखंड की सब्जियां एक ही बार लॉकडाउन के बाद दुबई भेजी जा सकी है. कोलकाता से एयर कार्गो से दुबई के लिए भेजा गया था. इसके बाद अब दूसरे जिलों से सब्जियां विदेश भेजने की भी तैयारी शुरू की गई थी. जो इस वर्ष के अंत तक नहीं हो पाया. पहली बार झारखंड के करीब 150 किसानों की सब्जियां विदेश गई है. इसके बाद किसानों की आय तीन गुना तक बढ़ने की उम्मीद जतायी गई थी. कृषि विभाग की ओर से जमशेदपुर से भी किसानों की सब्जियां मंगवायी गई और रांची के नगड़ी से सीधे किसानों के खेतों से सब्जियों को कृषि मंत्री बादल ने हरि झंडी दिखाते हुए कोलकाता के लिए रवाना किया था.
क्या कहते हैं अधिकारी
बाजार समिति के पणन सचिव अभिषेक आनंद बताते हैं कि इस बार कुछ नई सब्जियों को भी बाहर भेजने का निर्णय लिया गया है. पहली बार ओल को यूरोप भेजा जाएगा. अभी एजेंसी नहीं आ रही है जिससे परेशानी बढ़ी है, लेकिन जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाला जा रहा है. अगले वर्ष तैयारी की जा रही है कि दुमका, हजारीबाग य जमशेदपुर के किसानों की सब्जियों को बाहर भेजी जा सके. हालांकि, इसके लिए सरकार को बड़ी तैयारी करनी होगी.
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