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बीच का रास्ता निकला : अनूप सिंह को बाहरी बतानेवाले टाटा कमिंस प्रबंधन ने आवभगत में बिछायी पलकें 

Jamshedpur : कल तक जो टाटा कमिंस प्रबंधन विधायक जयमंगल सिंह उर्फ अनूप सिंह को बाहरी बता रहा था, आज वह न केवल उनकी आवभगत के लिए पलकें बिछाये हुए था, बल्कि प्लांट के अंदर बंद कमरे में बैठक भी की. लगभग डेढ़ साल से प्रबंधन और अनूप सिंह के बीच चल रही नाक की लड़ाई में आखिरकार प्रबंधन को बीच का रास्ता निकालना पड़ा और अनूप सिंह को न केवल सम्मान देना पड़ा बल्कि अपने कदम से पीछे भी हटना पड़ा. वैसे सूत्रों का कहना है कि कंपनी के शीर्ष नेतृत्व पर किए गये केस की प्रक्रिया चालू होने के बाद प्रबंधन के रूख में यह बदलाव आया है.

संविधान की दी दुहाई, कहा– चाहे मैं आगे प्रेसीडेंट रहूं या ना रहूं

अनूप सिंह शनिवार को टाटा कमिंस की ओर से टेल्को रिक्रिएशन क्लब में आयोजित रक्तदान शिविर में शाम साढ़े पांच बजे पहुंचे.  अनूप सिंह ने कहा कि टाटा समूह ने हमें सम्मान दिया है कि सिंगल यूनियन का कार्यान्वयन हो. टाटा की जितनी भी सब्सिडियरी है, वह इंटक को सम्मान देती है. अब इंटक की यूनियन में थोड़ा बहुत मनमुटाव है और इसके चलते मैं मैनेजमेंट से रिश्ता खराब कर लूं, तो वह भी आने वाले समय के लिए कुशल संदेश नहीं है. लेकिन मैं जो पहले भी बोल रहा था, अभी भी बोल रहा हूं कि चुनाव कराना यूनियन का काम है, प्रबंधन का नहीं. चुनाव यूनियन के कार्यक्षेत्र में आता है, मैनेजमेंट के कार्यक्षेत्र में नहीं आता. चुनाव जब भी होगा, यूनियन के नियमों से होगा, गोपेश्वर बाबू के बनाये गये संविधान से होगा, चाहे मैं आगे प्रेसीडेंट रहूं या ना रहूं. चाहे नयी टीम मुझे चुने या न चुनें. लेकिन मेरे कार्यकाल का समापन संविधान का पालन करते हुए होगा. मैं कभी भी संविधान के खिलाफ जाकर काम करने के पक्ष में नहीं हूं, क्योंकि यह बात अनूप सिंह की नहीं है, बात राजेंद्र बाबू की नहीं है. यह बात अभी की स्टीयरिंग कमेटी की भी नहीं है, यह बात आने वाली स्टीयरिंग कमेटी की है, यह बात आने वाली यूनियन की है, यह बात आने वाले जेनरल सेक्रेटरी-प्रेसीडेन्ट की है. अगर हम दबाव में आकर या अपने फायदे के लिए या डर से या किसी के डराने से अपनी जिम्मेवारी को भूल जायें तो आने वाली पीढ़ी के लिए अच्छा संदेश नहीं देकर जायेंगे. मेरा कार्यकाल भले ही एक साल का रहा, लेकिन एक साल के कार्यकाल में प्रेसीडेंट को जाते-जाते जो करना है, वह करके जाऊंगा. इसलिए आने वाले समय में चुनाव तभी होगा, जब संविधान के तहत मैनेजमेंट और यूनियन में एक अच्छा वातावरण और अंडरस्टैंडिंग बनें. मैंने भी मैनेजमेंट को काफी समय दिया कि वह समझ जाए. उम्मीद करता हूं कि मैनेजमेंट समझेगा और संविधान के तहत चुनाव कराएगा.

लाख टके का सवाल, क्या अनूप सिंह अध्यक्ष रहेंगे?

अनूप सिंह के बयान से साफ हो गया है कि उनका अध्यक्ष बनना आसान नहीं होगा. उन्होंने भी स्टीयरिंग कमेटी पर यह छोड़ दिया है कि वह उन्हें चुनती है या नहीं? लेकिन सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन का अभी भी साफ स्टैंड है कि अध्यक्ष बाहरी नहीं होगा. ऐसे में अनूप सिंह के बयान से साफ हो गया है कि उन्होंने आने वाले समय की स्थिति को भांप लिया है. बल्कि यह कहा जा रहा है कि इस पर प्रबंधन ने अनूप सिंह का अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है. प्रबंधन ने शुक्रवार को भी स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में साफ कर दिया कि अध्यक्ष अंदर का ही होगा.

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