
Ranchi: लोक आस्था का महापर्व छठ के अवसर पर 75 वर्षीय मोहम्मद मकसूद सांप्रदायिक सौहाद्र का संदेश दे रहे हैं. गरीब हो या अमीर, सभी लोग खुशी से इस महापर्व को मना सकें, इस सेवा भाव से मोहम्मद मकसूद पिछले 52 सालों से रांची के बकरी बाजार में हर साल बांस से बने सूप और डालों की दुकान लगाते है, जहां ग्राहकों को मोल भाव नहीं करनी पड़ता.
ग्राहक खुशी से जो कीमत दे दें, सूप और डालों की वही कीमत हो जाती है. हर साल एक लाख सूप और डाला 50 प्रतिशत कम मूल्य पर बेचते हैं.
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मोहम्मद मकसूद बताते है कि वे भले ही मुस्लिम समुदाय से संबंध रखते है, पर बचपन से ही इस पर्व में अपनी अटूट आस्था रखते है. ऐसे में वे नहीं चाहते कि कोई भी परिवार अधिक दाम की वजह से यह पावन पर्व को करने से पीछे रह जाए.
इसलिए वे हर साल करीब एक लाख सूप और दौरा रांची के बकरी बाजार में लेकर आते है और अन्य दुकानदारों की तुलना में 50 प्रतिशत कम भाव में ग्राहकों को सूप और दौरा बेचते हैं.
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छठ से तीन महीने पहले ही एक लाख सूप और डाला बनाने में जुट जाते हैं कारीगर
मोहम्मद मकसूद ने बताया कि वे सालों भर सूप, डाला और टोकरी का व्यापार करते है. ऐसे में छठ महापर्व के लिए तीन महीने पहले से ही उनके कारीगर सूप और डाला बनाने में जुट जाते हैं.
उन्होंने बताया कि सूप और डाला तैयार का कारखाना दुमका और जामताड़ा में है, जहां पर करीब 60 मुस्लिम महिलाएं सूप और डाला बनाती है.
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