Khas-KhabarMain SliderRanchi

SC के आदेश के 27 सालों बाद भी सोकरा ग्रेफाइट माइंस के 455 मजदूरों का बकाया भुगतान नहीं

2014 में स्वीकृत हुई राशि, सरकारी फंड में पड़ा एक करोड़ 27 लाख, सरकार बदलने के बाद से मामला लंबित 

मामला सोकरा ग्रेफाइट माइंस का जो 1992 से पड़ा है बंद

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद न माइंस खुला और न मजूदरों को बकाया मिला 

कई बार मजदूर मिल चुके हैं श्रम मंत्री और विधायक आलोक कुमार चौरसिया से 

Chhaya

Ranchi: रोजगार और बकाया भुगतान के प्रति राज्य सरकार की उदासीनता चरम पर है. सरकार की उदासीन रवैये का आलम यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी 455 मजदूरों को अब तक उनका बकाया भुगतान नहीं किया गया.

ये 455 मजदूर पलामू के चैनपुर प्रखंड स्थित सोकरा ग्रेफाइट माइंस के हैं. जिन्हें साल 1982 में बिना किसी सूचना के हटा दिया गया. हालांकि मजदूरों को हटाये जाने के बाद से डीसी, श्रमायुक्त, हाइकोर्ट तब बिहार हाइकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने मजदूरों के पक्ष में अपना फैसला दिया.

इसे भी पढ़ेंःरांची: अलग-अलग थानों में जब्त हजारों वाहन बन रहे कबाड़, नहीं हो रही नीलामी

सुप्रीम कोर्ट ने साल 1992 में ही राज्य सरकार को कहा कि मजदूरों का बकाया भुगतान करें, साथ ही माइंस में कार्य फिर से चालू हो. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के 27 साल बाद भी न ही सोकरा ग्रेफाइट माइंस को चालू किया गया और न ही इन मजदूरों को बकाया दिया गया. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने एक माह में इन मजदूरों के बकाया भुगतान की जानकारी दी थी.

2014 में एक करोड़ 27 लाख की राशि स्वीकृत

साल 2014 में इन मजदूरों के लिये एक करोड़ 27 लाख रूपये राशि की स्वीकृति दी गयी. लेकिन चुनाव के बाद फिर से ये राशि पड़ी की पड़ी रह गयी. कई बार इन मजदूरों ने श्रम मंत्री राज पालिवार से मिल कर अपनी समस्या बतायी. मंत्री ने कई बार आश्वासन दिया कि मजदूरों के बकाया राशि का भुगतान कर दिया जायेगा.

अब फिर से चुनाव निकट है. ऐसे में मजदूरों को कहीं से आशा की किरण नहीं नजर आ रही. विधायक आलोक कुमार चौरसिया ने भी साल 2018 में मजदूरों को जल्द से जल्द बकाया भुगतान की बात कही, लेकिन ये भी खोखला वायदा ही निकाला.

1992 तक अवैध तरीके से होता रहा खनन

मजदूरों से बात करने से जानकारी हुई कि साल 1982 में इन मजदूरों की छंटनी के बाद लगभग 1992 तक माइंस में अवैध खनन होता रहा. लीजधारक कुमार ब्रदर्स एंड कंपनी की ओर से इस क्षेत्र को लीज पर लिया गया था. कंपनी का खुद का सरकार के पास रायॅल्टी बकाया लगभग 21 लाख 85 हजार हो गया था.

वहीं इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट का भी आदेश आ गया और सरकार को पैसा भुगतान करने का आदेश दिया गया. जिसके बाद कंपनी ने खनन कार्य बंद कर दिया.

इसे भी पढ़ेंः#EconomySlowdown: ऑटो सेक्टर में मंदी का असर, महिंद्रा एंड महिंद्रा 17 दिनों तक ठप रखेगा उत्पादन

बता दें कि 455 मजदूरों की ओर से छंटनी का विरोध करने पर कुमार ब्रदर्स एंड कंपनी के मालिक गुप्तेश्वर प्रसाद सिंह की ओर से सभी जगहों पर वाद दायर किया गया. लेकिन निर्णय सभी जगह से मजूदरों के पक्ष ही आये.

एशिया का प्रसिद्ध खनन क्षेत्र है सोकरा

इस क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण ग्रेफाइट पाये जाने के कारण एशिया भर में इसका महत्व है. 1957 में 257 एकड़ और 1974 में 723 एकड़ जमीन लीज पर दी गयी.

जानकारी होती है कि सोकरा में ग्रेफाइट की बहुलता है. क्षेत्र के ग्रेफाइट में कार्बन की मात्रा लगभग 80 से 85 प्रतिशत है. इस क्षेत्र में खनन से न सिर्फ मजदूरों को रोजगार मिलेगा, बल्कि राज्य में भी समृद्धि आयेगी.

श्रम मंत्री और विधायक के आश्वासन खोखले

मजदूरों ने अपनी मांगों के लिये झारखंड खान मजदूर सभा का गठन किया है. इसके महामंत्री सुदेश्वर सिंह ने कहा कि पिछले साल इन मजदूरों ने 32 दिनों का धरना राजभवन के सामने किया. श्रम मंत्री से मिलें.

क्षेत्र के विधायक आलोक कुमार चौरसिया भी मजदूरों की समस्या जानते हैं. विधायक ने तो लिखित भी दिया कि मुख्यमंत्री समस्या का समाधान करेंगे. लेकिन इस साल फिर से मजदूरों को आंदोलन करना पड़ा. अब तो स्थिति ऐसी है कि कोई पूछने भी नहीं आता. इन्होंने बताया कि कुछ मजदूर अब जीवित नहीं रहे ऐसे में उनके आश्रित इस आंदोलन में शामिल हैं.

माइंस खोलने पर की जा रही कार्रवाई

इस संबंध में विधायक अलोक कुमार चौरसिया ने कहा कि माइंस खोलने की प्रक्रिया चल रही है. लीज में प्राइवेट कंपनी ने लिया था, ऐसे में सरकार मजदूरों को पैसा नहीं दे सकती.

हां, उक्त कंपनी पर कार्रवाई करना सरकार का दायित्व है. लेकिन फिलहाल तैयारी यहीं है कि सोकरा ग्रेफाइट माइंस खोला जाये, क्योंकि इससे मजदूरों को रोजगार मिलेगा. बैठकें भी कई हुई हैं. अब जल्द ही माइंस खोलने की तैयारी की जा रही है.

इसे भी पढ़ेंः#HindiDiwas साल 1949 में हिन्दी बनी राजभाषा, 1953 में मनाया गया पहला हिन्दी दिवस

Related Articles

Back to top button