न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

निर्वाचन आयोग के निर्देशों का राज्य सरकार पर असर नहीं, अब चल रहा आयोग का डंडा

454
  • अब शिकायत पर चुनाव आयोग ले रहा संज्ञान, कई और अफसर हैं निर्वाचन आयोग के रडार पर
  • आयोग का था स्पष्ट निर्देश, जो अफसर गृह जिले में पदस्थापित हैं उन्हें हटायें
  • आचार संहिता लगने से पहले अफसरों की पोस्टिंग में बरती गई कोताही, निर्देशों का नहीं हुआ पालन
  • मुख्य सचिव को लेकर भी निर्वाचन आयोग का था स्पष्ट निर्देश, जिन्हें एक्सटेंशन मिला है वे चुनाव कार्य में हिस्सा नहीं ले सकते
mi banner add

Ranchi: आचार संहिता लागू होने से पहले झारखंड सरकार ने निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन नहीं किया. जिसका खामियाजा सरकार को अब भुगतना पड़ रहा है. अब निर्वाचन आयोग खुद और अन्य लोगों की शिकायतों पर संज्ञान ले रहा है.

राज्य सरकार ने आचार संहिता लगने से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने में कोताही बरती. इसी कोताही का परिणाम हुआ कि बोकारो डीसी डॉ शैलेश कुमार चौरसिया को हटाने का फरमान निर्वाचन आयोग ने जारी कर दिया.

क्योंकि डॉ चौरसिया बोकारो जिले में पदस्थापित थे और बोकारो धनबाद लोकसभा क्षेत्र में आता है, जो डीसी चौरसिया का गृह जिला भी है. गौरतलब है कि धनबाद और गिरिडीह जिले के रिर्टरिंग अधिकारी एक ही होते हैं. जो कि श्री चौरसिया होते.

इसे भी पढ़ेंः पहले चरण के लिए नामांकन का आज आखिरी दिन, कई दिग्गज करेंगे नोमिनेशन-11 अप्रैल को वोटिंग

आयोग का स्पष्ट था निर्देश- गृह जिले में पदस्थापित अफसरों को हटायें

भारत निर्वाचन आयोग का स्पष्ट निर्देश था कि 31 मई 2017 के बाद यह देखने की आवश्यकता है कि कोई अधिकारी अपने गृह जिले में तो पदस्थापित नहीं है.

ऐसे में निष्पक्ष चुनाव की संभावना नहीं है. 31 मई 2019 तक लोकसभा चुनाव संपन्न कराना है. इसके लिए सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों को चुनाव की तैयारियों में जुट जाने का निर्देश दिया था.

इसे भी पढ़ेंः वोटिंग के लिए पीएम मोदी की अपील: ट्विटर पर #VoteKar कैंपेन की शुरुआत 

वर्षों से जमे अफसरों को 28 फरवरी तक हटाने का भी निर्देश था

भारतीय निर्वाचन आयोग ने सभी राज्य सरकारों से 28 फरवरी 2019 तक वर्षों से एक जगह पर जमे अफसरों को हटाने का निर्देश दिया था. कहा था कि वे ऐसे अफसरों की सूची तैयार कर, उनके तबादले की प्रक्रिया पूरी करें.

ताकि स्वच्छ और अनुशासन में लोकसभा का चुनाव संपन्न कराया जा सके. इनकी सूची भी तैयार कर यह देखने की आवश्यकता है कि कौन-कितने दिनों से कहां पदस्थापित हैं.

आयोग का यह भी निर्देश था कि जिलों के उपायुक्त सह जिला निर्वाची पदाधिकारी, सहायक जिला निर्वाची पदाधिकारी, रिर्टनिंग अफसर, कार्यपालक दंडाधिकारी, अपर समाहर्ता, अपर उप समाहर्ता, प्रखंड विकास पदाधिकारी, जो सीधे तौर पर निर्वाचन से जुड़े हैं, क्या वे चार साल से एक ही जगह पर पदस्थापित तो नहीं हैं.

अफसरों के एक्सटेंशन मामले में भी दिया था स्पष्ट निर्देश

भारत निर्वाचन आयोग ने 16 जनवरी को पत्र जारी कर कहा था कि कोई भी ऐेसे पदाधिकारी जिन्हें सेवा विस्तार मिला है, या फिर उनको फिर से बहाल किया गया है- वे चुनाव कार्य में नहीं लगाये जायेंगे.

इसे भी पढ़ेंःराजद प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा पहुंची सीएम आवास, बीजेपी में होंगी शामिल, राजद के सुभाष यादव भड़के

लेकिन यह संभव नहीं है कि झारखंड के मुख्य सचिव को चुनाव कार्यों से अलग रखा जा सकेगा. इसके बावजूद राज्य सरकार ने मुख्य सचिव मामले में अब तक कोई फैसला नहीं लिया है.

झारखंड के मुख्य सचिव को सुधीर त्रिपाठी को दूसरी बार एक्सटेंशन मिला है. उनका कार्यकाल 31 मार्च तक है. ऐसी स्थिति में अब भारत निर्वाचन आयोग से ही नये मुख्य सचिव के लिये स्वीकृति लेनी होगी.

इसे भी पढ़ेंः राजधानी में मोआवोदियों की पोस्टरबाजी, बरियातू थाना क्षेत्र में कई जगहों पर लगाये पोस्टर

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: