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महागठबंधन : ऐलान को 61 दिन बीते लेकिन नहीं हो सका सीटों का बंंटवारा

8 संसदीय क्षेत्र, 4 विधायक और 3 नेता हैं रोड़ा

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Nitesh ojha

Ranchi : तारीख पर तारीख…जी हां यही हो रहा है झारखंड में महागठबंधन का हाल. महागठबंधन के गांठ का बंधन ऐसा फंसा है कि सुलझ ही नहीं रहा है.

बात शुरू होती है 17 जनवरी 2019 की शाम से. नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन के आवास पर तमाम विपक्षी दलों के नेताओं की एक बैठक हुई. मुख्य एजेंडा था, महागठबंधन के बीच बने पेंच को सुलझाना.

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बैठक बाद सभी नेताओं ने एक साथ दावा किया कि पेंच लगभग सुलझ गया है. आज उस बात को लगभग 61 दिन बीत गये हैं.

लेकिन, पेंच सुलझना तो दूर, यह भी तय नहीं हो पाया है कि क्या वास्तव में कोई महागठबंधन नाम की चीज भी चुनाव पूर्व राज्य में देखने को मिलेगा. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि उत्तर प्रदेश और बिहार में महागठबंधन ने अपना स्वरूप ले लिया है.

ऐसा नहीं है कि महागठबंधन नहीं बनने में केवल एक दल या एक संसदीय क्षेत्र ही कारण है. करीब आठ संसदीय क्षेत्र, सात नेता (इसमें कई विधायक हैं) इसमें ऐसे है, जो अब तक इसमें रोड़ा बने हुए हैं.

8 संसदीय क्षेत्रों में गोड्डा, चतरा, पलामू, चाईबासा, जमशेदपुर, कोडरमा, हजारीबाग समेत खूंटी शामिल है. रोड़ा बनाने वाले नेताओं में कांग्रेस से इरफान अंसारी (जामताड़ा विधायक), जेवीएम से प्रदीप यादव (पोड़ैयाहाट विधायक), जेएमएम से पौलूस सुरीन (तोरपा विधायक), आरजेडी की प्रदेश अध्यक्ष अन्नापूर्णा देवी,  भाकपा माले से राजकुमार यादव (राजधनबार विधायक) और विनोद सिंह समेत भाकपा से भुवनेश्वर महतो शामिल है.

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गोड्डा संसदीय क्षेत्र में फुरकान और प्रदीप का दावा

महागठंबधन में सबसे पहले पेंच गोड्डा संसदीय क्षेत्र को लेकर बना था. दो दल कांग्रेस और जेवीएम इस सीट को लेकर आमने-सामने हैं. ऐसे में महागठबंधन में रार बढ़ती जा रही है.

दोनों पार्टी हर हाल में इस सीट से चुनाव लड़ना चाहती हैं. जामताड़ा से कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी कहते रहे है कि कांग्रेस को संथाल किसी भी हाल में नहीं छोड़ना चाहिए. वे यहां से कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अजय को लड़वाना चाहते है.

लेकिन असल मंशा अपने पिता और पूर्व सांसद फुरकान अंसारी को प्रत्याशी बनाने की है. वहीं जेवीएम प्रदीप यादव को यहां से प्रत्याशी बनाना चाहती है.

पार्टी का कहना है कि यहां से जेवीएम महासचिव प्रदीप यादव एकबार सांसद रह चुके हैं. अगर सीट नहीं मिलती है तो उनकी पार्टी महागठबंधन से अलग होकर अपना रास्ता बनायेगी.

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चतरा और पलामू में आरजेडी और कांग्रेस आमने-सामने

महागठबंधन का एक बड़ा घटक आरजेडी भी महागठबंधन में हुए सीट बंटवारे से खुश नहीं है. पार्टी चतरा और पलामू संसदीय क्षेत्र में अभी तक अपना दावा बना रखी है.

प्रदेश प्रवक्ता डॉ मनोज कुमार का स्पष्ट कहना है कि पार्टी किसी भी हाल में यहां से अपना प्रत्याशी खड़ा करेगी. आरजेडी जहां चतरा से सुभाष यादव को प्रत्याशी बनाना चाह रही है.

वहीं पलामू में किसे अपना प्रत्याशी बनायेगी. यह अभी तक तय नहीं किया है. कांग्रेस चतरा या पलामू सीट में से केवल एक ही आरजेडी को देना चाहती है.

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हजारीबाग सीट पर भाकपा की नजर, पर दावा कांग्रेस का

महागठबंधन के तहत हजारीबाग संसदीय क्षेत्र कांग्रेस के पाले में जाने वाली है. लेकिन परेशानी यह है कि भाकपा हजारीबाग में पार्टी के राज्य सचिव और पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता को लड़ाना चाहती है.

कुछ दिन पहले भाकपा के वरिष्ठ नेता डी राजा ने इसी संदर्भ में रांची आकर लालू प्रसाद से भी मुलाकात की थी. यह दावा इससे भी साबित होता है कि दिल्ली में डी राजा से मुलाकात में हेमंत सोरेन ने कहा था कि सभी वाम दल आपस में बैठ कर अपना सहमति से कोडरमा पर दावा छोड़ें, तो वे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से हजारीबाग सीट को लेकर बात कर सकते हैं.

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कोडरमा में भाकपा माले देगा प्रत्याशी 

कोडरमा में वाम दलों की दावेदारी की, तो वहां भाकपा माले चुनाव की तैयारी में जुटा है. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाकपा माले के उम्मीदवार राजकुमार यादव दूसरे नंबर पर थे.

राजकुमार यादव अभी राजधनबार से विधायक भी है. गत महीने ही दीपंकर भट्टाचार्य की मौजूदगी में माले ने कोडरमा से चुनाव लड़ने की रणभेरी फूंकी चुकी है.

पार्टी के पूर्व विधायक विनोद सिंह कहते हैं, ”कोडरमा से माले का पीछे लौटने का सवाल ही नहीं होता है. महागठबंधन में शामिल दलों के माले ने पहले ही कहा है कि माले के प्रत्याशी की मजबूती को देखकर जरूरी है कि वे उनका सहयोग करें.

कई जनसंगठनों ने भी खुले तौर पर विपक्षी दलों से माले के लिए सीट छोड़ने की वकालत की है. अगर विपक्षी दल हमारे लिए सीट नहीं छोड़ते, तब भी हमें बहुत आश्चर्य नहीं होगा”.

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सिंहभूम (चाईबासा,जमशेदपुर) और खूंटी में कांग्रेस और जेएमएम आमने-सामने

सिंहभूम संसदीय सीट पर महागठबंधन के दो दलों के बीच तकरार कायम है. कोल्हान प्रमंडल में दो सीटें जमशेदपुर व सिंहभूम शामिल हैं. अपने परंपरागत सीट होने के कारण कांग्रेस सिंहभूम सीट पर मजबूत दावेदारी ठोंक चुकी है.

जगन्नाथपुर की विधायक सह पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा की दावेदारी लगभग तय मानी जा रही है. हालांकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने कहा दिया है कि जमशेदपूर सीट पर पार्टी चुनाव नहीं लड़ेगी.

फिर भी जेएमएम विधायक सिंहभूम क्षेत्र के दो सीटों पर दावा कर रहे है. विधायकों ने कहा कि सिंहभूम संसदीय सीट के छह विधानसभा में पांच पर जेएमएम का कब्जा है.

ऐसे में दोनों ही सीटों पर पार्टी का सबसे अधिक दावा बनता है. कुछ दिन पहले पार्टी के चार विधायक शशिभूषण सामड, दीपक बिरुआ, निरल पूर्ति व जोबा माझी ने रांची जाकर झामुमो के केंद्रीय कार्यकारिणी अध्यक्ष हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी.

वहीं खूंटी सीट पर कांग्रेस का दावा मजबूती से है. पार्टी यहां से प्रदीप बालमुचू या रमा खलखो को प्रत्याशी बना सकती है.

तो अब इस सीट के लिए जेएमएम विधायक पौलूस सुरीन ने भी बगावती सुर अपनाते हुए अपना दावा ठोंक दिया है. उन्होंने कहा है कि अगर उन्हें खूंटी से टिकट नहीं मिला, तो वे पार्टी बदलकर या फिर निर्दलीय खूंटी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे.

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