
Zeb Akhtar
पिछले साल की तरह ही इस बार भी ईद की खुशियों पर कोरोना वायरस का साया है. लेकिन उत्साह में कमी नहीं है. दुनिया भर में ये अलग-अलग दिन मनायी जा रही है. इस्लामी कैलेंडर यानी चांद दिखने के मुताबिक.
आज ईद का चांद दिखायी पड़ गया है. यानी भारत में ईद 14 मई यानी कल शुक्रवार को मनायी जायेगी. सेवइयों के कारण इसे मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है. यूं तो ईद को अमन और भाई चारे का पैगाम देने वाला त्योहार माना जाता है.
लेकिन इसमें जो सबसे अहम बात दिखायी देती है, और जो इसे अन्य त्योहारों से अलग करती है, वो है ईद के दौरान दी जाने वाली जकात और फितरे की रकम. हिंदी में इसे दान कह सकते हैं.
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फितरा और जकात एक खास रकम (आर्थिक हैसियत के मुताबिक) होती है, जिसे ईंद की नमाज पढ़ने से पहले तक गरीबों के बीच बांट देना जरूरी यानी फर्ज होता है.
मेरी नजर में यही ईंद के मुकाम को बुलंदी देता है और इसकी अलग हैसियत हो जाती है. जकात और फितरा की राशि उन गरीबों के बीच बांटने का हुक्म है, जो अपनी निम्न आर्थिक हैसियत के कारण ईद की खुशिया मनाने से महरूम हो जाते हैं.
ईद का एक मकदसद एक साथ खुशी मनाना है. चाहे वो अमीर हो या गरीब. तो अमीर के लिए ये फर्ज बन जाता है कि वो गरीब को भी ईद की खुशी मनाने में उसका मददगार बने.
हालांकि ये रकम, जकात और फितरे की, पूरे साल, कभी भी अदा की जा सकती है. लेकिन अमूमन लोग इसे रमजान के महीने में या कम से कम ईद की नमाज के पहले तक अदा कर ही देते हैं. ताकि जरूरतमंद ईद की खुशी में आपके साथ शरीक हो सकें.
कहा गया है कि जिन लोगों ने ईद के पहले रोजे रखे, लेकिन जकात और फितरा अदा नहीं किया, तो उनके रोज आसमान यानी खुदा तक नहीं पहुंचते. वो जन्नत और दोजख के बीच में ही अटके रह जाते हैं.
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कितनी होती है फितरा और जकात की राशि
फितरा की रकम परिवार के सदस्यों की संख्या के अनुसार तय होती है, जबकि जकात प्रापर्टी और बचत के हिसाब से तय होते हैं. मोटे तौर पर वर्तमान समय 1. 75 किलोग्राम गेंहू की जितनी कीमत होती है, उतनी ही रकम एक सदस्य का फितरा की रकम होती है.
कोई अपनी खुशी या हैसियत के अनुसार बढ़ा सकता है. जैसे इस साल ये रकम 50 रुपये तय की गयी है. इसका अर्थ हुआ परिवार के सदस्य के नाम पर 50 रुपये गरीबों के बीच बांटे जायेंगे. परिवार में पांच सदस्य हैं को ये रकम 250 रुपये हुई.
इसी तरह जकात की रकम उनके लिए जरूरी यानी फर्ज है जिनके पास साढ़े सात तोला सोना या 52 तोले से अधिक चांदी या इनके बराबर धन हो. या उसने बचत की हो. इन सारी चीजों को इस्लाम आपकी प्रापर्टी मानता है. इस प्रापर्टी का मौजूदा समय में जो मार्केट वैल्यू है, उसका 2.5 प्रतिशत जकात अदा किया जाता है. यानी गरीबों के बीच बांटा जाता है.
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मिसाल के तौर पर अगर किसी के पास 1000 रुपये की भी अगर कोई प्रापर्टी है तो उसे इसका 2.5 प्रतिशत यानी 25 रुपया फितरा अदा करना होगा. और यह रकम गरीबों के बीच बांटी जायेगी.
फितरा और जकात की इस रकम (दान) को इतनी अमीयत दी गयी है कि इस ईद को ईद-उल-फित्र के नाम से भी जाना जात है. यानी वो ईद या वो त्योहार या वो खुशी जो आप फितरा यानी दान के साथ मनाते हैं.
बहरहाल, ईद भाईचारे का संदेश भी देती है. इस दिन मुस्लिम लोग सुबह नए कपड़े पहनकर नमाज अदा करते हुए सुख- चैन की दुआ मांगते हैं. इस मौके पर खुदा का शुक्रिया किया जाता है क्योंकि उन्होंने रमजाने के पूरे महीने रोजा रखने की ताकत दी.
देशभर के मुस्लिम संगठनों, मदरसों और अदारों ने इस साल भी ईद मनाने के लिए कुछ खास एहतियात बरतने की अपील की है. जैसे इस साल गले मिलने की रस्म से रोका गया है और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही ईद की नमाज अदा करने की अपील की गयी है.
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