
Akshay Kumar Jha
Ranchi: मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल महज डेढ़ साल भी नहीं बचा हुआ है. लेकिन सत्ता और विपक्ष किसी हाल में भी इस सीट पर काबिज होना चाहता है. इससे पहले रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव में एनडीए ने यूपीए (अब इंडिया) के जीत का सिलसिला तोड़ा था. वजह बीजेपी और आजसू की गठबंधन माना गया. डुमरी विधानसभा के उपचुनाव में भी रामगढ़ जैसे हालात हैं. लेकिन एक बात रामगढ़ से अलग है और वो है डुमरी का इमोशन, ट्रैजिडी और ड्रामा. चुनाव प्रचार में जिस तरीके से NDA और INDIA डुमरी में आमने-सामने हैं, उससे लगता ही नहीं है कि वहां विकास के नाम पर पब्लिक से वोट मांगा जा रहा है. फैक्टर, इमोशन, ट्रैजिडी और ड्रामा ही है.
श्रद्धांजलि और संघर्ष का इमोशन
जिस दिन से पूर्व मंत्री जगरनाथ महतो का निधन हुआ है, उसी दिन से इमोशन फैक्टर डुमरी में काम कर रहा है. पिछले विधानसभा चुनाव में जब स्व. जगरनाथ महतो आजसू के कैंडिडेट यशोदा देवी के सामने थे, उस वक्त इमोशन फैक्टर इस तरीके से काम नहीं कर रहा था. आजसू एंटी इनकंबेंसी और जातीय समीकरण पर स्व. जगरनाथ महतो को घेरने का काम कर रहा था. लेकिन इस बार जब जेएमएम ने स्व. जगरनाथ महतो के निधन के बाद उनकी पत्नी बेबी देवी को उम्मीदवार बनाया तो एक इमोशनल और श्रद्धांजलि का माहौल खुद-ब-खुद तैयार हो गया है. डुमरी के हर वोटर तक इमोशनल फैक्ट को पहुंचाया जा रहा है. बेबी देवी के भाषणों में भी स्व. जगरनाथ महतो की ही बात होती है. उनके पुत्र राजू महतो भी फिलहाल इसी फैक्ट पर वोटरों के पास जा रहे हैं. सोशल मीडिया में भी जेएमएम की तरफ से ऐसा ही किया जा रहा है. ऐसा होता देख अब आजूस भी इमोशनल बैकग्राउंड तैयार करने में जुट गया है. आजसू की तरफ से भाषणों में यशोदा देवी के पति स्व. दामोदर महतो के संघर्ष और बलिदान की बात हो रही है. डुमरी के लोगों से स्व. दामोदर महतो को श्रद्धांजलि देने की बात हो रही है. आजसू की तरफ से इस बात को परोसा जा रहा है कि बीस साल जेएमएम को मौका मिला लेकिन इस बार स्व. दामोदर महतो की बलिदान को मौका दिया जाए.
यशोदा देवी के बेटे प्रदीप महतो की बीमारी की ट्रैजिडी
कुड़माली भाषा से पीजी करने वाले पढ़े-लिखे प्रदीप महतो इस चुनाव में काफी सक्रिय हैं. उनकी सक्रियता के अलावा उनकी बीमारी भी डुमरी समते आस-पास के जिलों में चर्चा का विषय है. उनकी बीमारी (कैंसर थर्ड स्टेज) इमोशनल टच वाली फीलिंग खुद-ब-खुद पैदा कर रही है. जिसे एक ट्रैजिडी की तरह देखा जा रहा है. उनका इलाज वैल्लोर से हो रहा है. आजसू और बीजेपी के दिग्गज नेता प्रदीप महतो को चुनावी स्टेजों पर खुब मौका दे रहे हैं. इसके अलावा प्रदीप वक्ता भी अच्छे हैं. जिसका फायदा आजसू उठा रहा है. ऐसा भी देखा जा रहा है कि जब वो माइक पर वोटरों से वोट की अपील कर रहे होते हैं, तो उनके बगल में खड़ी उनकी मां यशोदा देवी फूंट-फूंट कर रोती दिखाई देती हैं. ऐसा होने से वो जनता के साथ सीधा कनेक्ट हो पा रही हैं. ट्रैजिडी की एक पिच बनायी जा रही है, जिसपर एनडीए अच्छी तरह से बल्लेबाजी करने की कोशिश कर रहा है.
राजनेताओं का भ्रष्टाचार का ड्रामा
सत्ता पक्ष हो या विपक्ष दोनों की तरफ से उपचुनाव में पूरी ताकत झोंक दी जा चुकी है. जिस तरह का प्रयास दोनों गठबंधनों की तरफ से दिख रहा है, उसे देखते हुए जानकार बता रहे हैं कि नतीजा काफी टक्कर का होने जा रहा है. सत्ता की तरफ से चुनाव का कमान खुद सूबे के मुखिया हेमंत सोरेन संभाल रहे हैं. वहीं गठबंधन की तरफ से तमाम बड़े से लेकर छोटे चेहरों को क्षेत्र में भ्रमण करते देखा जा रहा है. लेकिन दोनों की तरफ से डुमरी के विकास के बारे बातें कम हो रही हैं. दोनों बस भ्रष्टाचार का राग अलाप रहे हैं. विपक्ष अबुआ सरकार में हुए भ्रष्टाचारों की फेहरिस्त लेकर घूम रहा है, तो सत्ता इन आरोपों को षड्यंत्र बताने का काम कर रहा है. कुल मिला पूरा सीन एक ड्रामे की तरह ही दिख रहा है.
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