
Chandi Dutta jha
Ranchi: झारखंड में शासन व्यवस्था किस अंदाज में चलता है यह इस बात से समझा जा सकता है कि पुलिस मुख्यालय के आदेश को भी जिले के अधिकारी नहीं मान रहे हैं. साल बीतने के बाद भी जानकारी नहीं दी जा रही है. जानकारी के अनुसार सामाजिक कार्यकर्ता दिपेश निराला ने राज्य गठन से लेकर अबतक सभी जिलों से जब्त वाहनों की सूची मांगी थी. इसके साथ ही थानों द्वारा नीलामी कर बिक्री, जब्त वाहनों के कारण अनावश्यक रूप से कितनी जगह का इस्तेमाल हो रहे है सहित अन्य जानकारी जनवरी 2021 में मांगी थी. इसी को लेकर पुलिस मुख्यालय से सभी जिलों से एसएसपी व एसपी को पत्र लिखा गया था. जिसमें कहा गया था कि उपयुक्त विषयांकित आवेदन जो आपके क्षेत्राधिकार से निकट रूप से संबंधित है की छाया प्रति सूचनाधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(3) के अंतर्गत अंतरित किया जाता है.
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निर्धारित समय सीमा के अंदर वांछित देय सूचना निबंधित डाक के माध्यम से सीधे आवेदक को प्रेरित करते हुए सूचित करें. लेकिन अबतक सिर्फ 12 जिलों से ही जानकरी दी गयी है.
जिसमें खूंटी, सरायकेला-खरसांवा, गोड्डा, जामताड़ा, साहेबगंज, बोकारो, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, कोडरमा, चतरा व दुमका शामिल हैं.
वहीं गढ़वा, गिरिडीह, देवघर, धनबाद, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, रांची, सिमडेगा, हजारीबाग, रामगढ़ व पाकुड़ जिलों से साल भर बाद भी जानकारी नहीं दी गयी है.
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22 साल में एक बार भी नहीं की गयी जब्त वाहनों की नीलामी
थानों में जब्त वाहनों की जानकारी खूंटी, सरायकेला-खरसांवा, गोड्डा, जामताड़ा, साहेबगंज, बोकारो, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, कोडरमा, चतरा व दुमका जिलों से दी गयी है. थानों में बाइक, कार, जीप, ट्रैकटर, पिकअप वैन आदि वर्षों से पड़े हुए हैं. जिसमें करीब 6042 वाहन इन जिलों के थानों में जब्त हैं, जिसमें सबसे अधिक बोकारो जिले में 1247, खूंटी में 557, सरायकेला-खरसांवा में 605, गोड्डा में 411, जामताड़ा में 465, साहेबगंज में 566, गुमला में 698, लोहरदगा में 328, लातेहार में 58, कोडरमा में 219, चतरा में 484 व दुमका में 365 वाहन थानों में जब्त हैं.
गोड्डा, सरायकेला-खरसांवा, नवनिर्मित जिला खूंटी में अबतक एक बार भी जब्त वाहनों की नीलामी नहीं की गयी है. हालांकि साहेबगंज में वर्ष 2012, 2016 व 2018 में जब्त वाहनों की नीलामी की गयी है.
सबसे आश्चर्य की बात है कि गुमला जिले के रायडीह थाने में वर्ष 1993 से ही गाड़ियां रखी हुई हैं. यहां लगभग 55 गाड़ियां हैं. जिनकी नीलामी आज तक नहीं हुई है.
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रांची, जमशेदपुर व धनबाद में काफी संख्या में हैं जब्त वाहन
राजधानी रांची के सभी थानों में लावारिस व मुकदमे से जुड़े वाहनों की लंबी कतार लगी है. इसके अलावे जमशेदपुर, धनबाद, गढ़वा, गिरीडीह, देवघर, पलामू, चाईबासा, सिमडेगा, हजारीबाग, रामगढ़ व पाकुड़ जिलों में भी जब्त वाहनों की लंबी कतार है, इन जिलों से जब्त वाहनों के बारे में जानकारी नहीं दी गयी है. थानों में वर्षों से खुले में पड़े वाहन बेकार होते जा रहे हैं. इन्हें छुड़वाने के लिए न तो वाहन मालिक पहुंच रहे न ही पुलिस प्रशासन नीलामी कराने को तैयार है.
इससे न सिर्फ वाहन खराब हो रहे हैं, बल्कि राजस्व की भी क्षति हो रही है. लंबे समय से बाहर रखे जाने की वजह से वाहनों के पुर्जे-पुर्जे तक गायब हो चुके हैं.
थाना परिसर में लंबे समय से गाड़ियों के खड़े रहने से उनकी सुरक्षा भी पुलिस के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है. पुलिस अफसरों की लापरवाही के चलते लावारिस और मुकदमों में दाखिल गाड़ियों की नीलामी समय पर नहीं हो रही है.
इससे जहां राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं गाड़ियां भी बर्बाद हो रही हैं जटिल प्रकिया होने के कारण बड़े अफसर इसमें रुचि नहीं लेते. नतीजा वाहन आज भी थानों में सड़ रहे हैं.
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नीलामी की है लंबी प्रकिया
थानों में पड़ी गाडिय़ों की नीलामी की लंबी प्रकिया होती है. इस प्रकिया से गुजरने और जवाबदेही तय होने से कोई थानेदार जल्दी यह नहीं चाहता है कि उसके समय में नीलामी हो. पकड़े गये वाहनों में लावारिस वाहनों की जल्दी नीलामी होती है. मुकदमे से जुड़े वाहनों की नीलामी मुकदमा समाप्त होने के बाद ही होती है.
यही नहीं जब गाड़ी पकड़ी जाती है, उस समय की स्थित और जब नीलामी के दायरे में आती है, उस समय की स्थिति में कीमत तय करने की भी चुनौती होती है.
पहले तो पुलिस थाना स्तर पर इंतजार करती है कि वाहन मालिक आकर अपना वाहन ले जाये. काफी इंतजार के बाद भी जब मालिक नहीं आता है, तब न्यायिक प्रक्रिया शुरू की जाती है. इसमें काफी समय लगता है.
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वाहनों की नीलामी के लिए ये हैं नियम
नियमानुसार लावारिस अवस्था में बरामद या जब्त वाहन के छह माह बाद निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की जानी होती है. वाहन बरामद होने पर पुलिस पहले उसे धारा 102 के तहत पुलिस रिकॉर्ड में लेती है. इसके बाद न्यायालय में इसकी जानकारी दी जाती है.
एसडीएम न्यायालय के निर्देश पर सार्वजनिक स्थानों पर पंपलेट आदि चिपका कर या समाचार पत्रों के माध्यम से उस वाहन से संबंधित जानकारी सार्वजनिक किये जाने का प्रावधान है, ताकि वाहन मालिक अपना वाहन वापस ले सके. इसके बाद एसडीएम नीलामी के लिए आदेशित करते हैं.
महत्वपूर्ण बातें
- थाने में जब्त वाहन जंग खाकर सड़ चुके होंगे. ऐसी स्थिति में थाना से उसका रिकॉर्ड मांगा जाये, तो समस्या उत्पन्न हो सकती है.
- थाने में जब्त वाहन खुले आकाश के नीचे धूप व बारिश के बीच पड़े रहते हैं, जिससे कीमती वाहनों का हाल-बेहाल है. इन वाहनों के रख-रखाव के लिए बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए, परंतु नहीं है.
- वाहनों की नीलामी समय से हो, तो सरकार को करोड़ों का राजस्व मिलेगा. इसके साथ ही थाना प्रांगण को कबाड़खाना होने से बचाया जा सकेगा. इसके लिए कांडों के निष्पादन में पुलिस को पहल करने की आवश्यकता है.
- जब्त वाहनों के संबंध में न्यायिक प्रक्रिया की समय सीमा निर्धारण करने की आवश्यकता है, ताकी त्वरित कार्रवाई कर वाहनों की खुली डाक की जा सके.
- जब्त वाहनों की नीलामी के लिए ठोस नियम-कानून होना चाहिए. इससे प्रत्येक वर्ष करोड़ों का राजस्व प्राप्त हो सकता है.
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