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धनबाद : राजा तालाब का होगा सौन्दर्यीकरण, फिर से 7 करोड़ रुपए पानी में बहाने की तैयारी

दो दशक में लगातार करोड़ खर्च के बाद भी दुर्दशाग्रस्त है.

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Dhanbad : झरिया के ऐतिहासिक राजा तालाब की सफाई और इसके सौन्दर्यीकरण के नाम पर फिर से साढ़े सात करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं. सफाई का कार्य दिवाली से पहले हर हाल में पूरा करने की बात नगर आयुक्त चंद्रमोहन कश्यप ने कही. धनबाद के नगर आयुक्त ने राजा तालाब की सफाई का जायजा लिया. इसी दौरान उन्होंने राजा तालाब में भरे जलकुंभियों को साफ करके घाटों को साफ सुथरा करने का निर्देश पदाधिकारियों को दिया. तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए साढ़े सात करोड़ रुपये खर्च करने की बात कही.

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अब तक कई बार हो चुके हैं करोड़ों खर्च

झरिया के राज परिवार द्वारा बनाये गये इस ऐतिहासिक राजा तालाब में वर्तमान में कीचड़ और झरिया की विभिन्न नालियों का गंदा पानी जम गया है. पहले धनबाद जिला परिषद ने इस तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर विभिन्न चरणों में करोड़ों रुपये खर्च किए. कहना नहीं होगा कि मोटी राशि खर्च करने के बाद भी तालाब के आसपास से गुजरना काफी मुश्किल का काम था. भले इस तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर कयी अफसर और सफेदपोश राजा बन गये. बाद में सन 2014 में साढ़े तीन करोड़ की लागत से तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर काम शुरू हुआ. कहा गया था कि तालाब का पानी निकाल कर उसके कीचड़ को साफ किया जाएगा. साथ ही तालाब के चारो ओर लाइटें लगाई जायेंगी. फिर से घाटों का निर्माण किया जायेगा. कुछ दिन जब तक गर्मी रही काम योजना के अनुरूप चला. लेकिन जैसे ही बरसात आयी तालाब में वर्षा का पानी भर गया. उसके बाद सारी योजनाएं धरी रह गयी. करोड़ों रुपये का खर्च सिर्फ कागज पर दिखाकर बिल बन गया. तालाब की नरकीय स्थिति पूर्ववत बनी रही. गर्मी में जब तालाब सूख जाता है तो लाखों करोड़ों का टेंडर से तालाब की मिट्टी और गाद निकालने के नाम पर होता रहा है. कुछ दिन जेसीबी मशीन और दर्जनों मजदूर लगाकर मिट्टी की खुदाई का काम चलता है. मिट्टी की ढुलाई में ट्रैक्टरों को लगाया जाता है. लेकिन जैसे ही बरसात आता है तालाब में फिर से झरिया शहर की नालियों का गंदा पानी भर जाता है. इससे बास आने लगती है और काम आधे में ही बंद हो जाता है. ठीक उसी प्रकार जब छठ पूजा आती है तो तालाब की जलकुंभी और घाटों की सफाई के लिए निविदा निकाली जाती है.

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आलम हर बार ऐसा रहता है. तालाब के कायाकल्प का सपना हर बार झरियावासियों को दिखाया जाता है लेकिन हर बार यह तालाब सिर्फ ठेकेदारों का ही सपना साकार करने वाला सिद्ध होता है.

क्या इस बार भी साढ़े सात करोड़ रुपये होंगे हजम ?

जब कई साल से करोड़ों की कई योजनाओं के बावजूद राजा तालाब की स्थिति जस की तस बनी हुई है. ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि क्या इस बार भी यह योजना केवल कमाई की योजना बन कर रह जाएगी?  हर बार की तरह अधिकारी इस बार भी बिल बनाकर चुप्पी नहीं साधेंगे क्या? क्या वास्तव में ठीक तरीके से इसकी सफाई होगी? क्या गारंटी है कि इस बार भी सिर्फ खानापूर्ति नहीं होगी?

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तालाब में है गन्दगी का अंबार

राजा तालाब के आसपास बकरी हाट में कई सारे खटाल हैं जिसके गोबर, मल-मूत्र के अलावा झरिया की सैकड़ों नालियों का पानी बहकर इस तालाब में आता है. गाय- भैसों को नहाने का काम भी खटाल वाले इसी तालाब में करते हैं. जिससे तालाब में गंदगी का अंबार लगा हुआ है.

झरिया के लिए महत्वपूर्ण है राजा तालाब

राजा तालाब के बीच में अब भी रानी के स्नानागार का खंडहर मौजूद है. झरिया शहर की लाखों की आबादी के धार्मिक कर्मकांड के लिए दूसरी जगह इस शहर में नहीं है. छठ के लिए तो राजा तालाब के सिवा कोई विकल्प नहीं है. मजबूरी है कि आस्था और शुद्धता का यह पर्व झरिया के लोग नाली के पानी में डुबकी लगाकर वर्षों से मना रहे हैं.

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