
Lohardaga : झारखंड के घने जंगलों में कई दुर्लभ जीव भी पाए जाते हैं, उन्हीं में से एक है पैगोलिन, जिसे स्थानीय लोग वज्रकीट भी कहते हैं. लोहरदगा जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत कुजरा गांव में भी दुर्लभ वज्रकीट पाया गया. जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई. बाद में ग्रामीणों ने इसकी जानकारी वन विभाग को दी, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पैगोलिन सुरक्षित ढंग से अपने कब्जे में ले लिया और उसे ओरमांझी स्थित बिरसा मुंडा जैविक उद्यान में भेज दिया. बताया जाता है कि कुजरा गांव निवासी छेदु साहु ने कुएं की मुंडेर पर जब इस अजीब से दिखने वाले जीव को बैठा देखा तो उसके शोर मचाने से आसपास के सैकड़ों लोग वहां जमा हो गए. लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या है. इसके बाद उस जीव को नजदीक से देखने के लिए होड़ मच गई.
Lohardaga : झारखंड के घने जंगलों में कई दुर्लभ जीव भी पाए जाते हैं, उन्हीं में से एक है पैगोलिन, जिसे स्थानीय लोग वज्रकीट भी कहते हैं. लोहरदगा जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत कुजरा गांव में भी दुर्लभ वज्रकीट पाया गया. जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई. बाद में ग्रामीणों ने इसकी जानकारी वन विभाग को दी, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पैगोलिन सुरक्षित ढंग से अपने कब्जे में ले लिया और उसे ओरमांझी स्थित बिरसा मुंडा जैविक उद्यान में भेज दिया. बताया जाता है कि कुजरा गांव निवासी छेदु साहु ने कुएं की मुंडेर पर जब इस अजीब से दिखने वाले जीव को बैठा देखा तो उसके शोर मचाने से आसपास के सैकड़ों लोग वहां जमा हो गए. लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या है. इसके बाद उस जीव को नजदीक से देखने के लिए होड़ मच गई. कोई उस पर पानी डाल रहा था तो कोई वज्रकीट को ही पानी में ही डाल दे रहा था. यही नहीं कई लोगों ने उसे लाठी से मारकर भी उसे देखने की कोशिश की. परंतु वह वज्रकीट मुंडेर मारकर बैठा हुआ था. बाद में लोगों ने वज्रकीट को एक तालाब में डाल दिया. जिसके बाद वह तालाब से निकल कर चलने लगा तो लोगों का कोतूहल और भी बढ़ गया.
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विलुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल है पैगोलिन
वज्रकीट की लंबाई लगभग 5 फीट है और वजन लगभग 18 किलो है. इस जीव की बाहरी त्वचा कठोर होती है, जिसपर शल्क बने होते हैं. खतरे का आभास होने पर यह जीव अपने शरीर को सिकोड़कर गोलाकार कर लेता है, ताकि आक्रमण होने पर वह खुद को बचा सके. यह विलुप्तप्राय जीव माना जाता है. इसे संरक्षित किया गया है. वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर वज्रकीट को अपने कब्जे में ले लिया और साथ ही वह जीव कहां से आया, किस हालत में था, ऐसी कई जानकारियों जुटाने में जुट गया है. कहा जाता है कि दुर्लभ होने की वजह से इसकी तस्करी भी होती है. हालांकि यह कुजरा गांव तक कैसे पहुंचा यह कोई बता नहीं पा रहा है.गौरतलब है कि झारखंड के कई स्थानों पर पहले भी पैगोलिन पाए गए हैं, जिन्हें वन विभाग ने अपने स्तर पर उसे प्राकृतिक पर्यावास उपलब्ध कराया है.
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