
Ranchi: लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान आज सांसद संजय सेठ ने नियम 377 के तहत अंधविश्वास बढ़ाने वाली चंगाई सभाओं पर रोक लगाने की मांग की. कहा कि झारखंड में डायन बिसाही जैसे अंधविश्वास के कारण प्रत्येक वर्ष आधा दर्जन से अधिक लोग मौत का शिकार होते हैं. एक तरफ इस परिस्थिति से झारखंड जूझ रहा है तो दूसरी तरफ बीते कुछ वर्षों में झारखंड में चंगाई सभा के नाम पर अंधविश्वास का खेल भी बढ़ा है. प्रार्थना महोत्सव के नाम पर मूल रूप से लोगों को स्वस्थ करने का झांसा दिया जाता है. इसके बड़े-बड़े होर्डिंग पोस्टर छपते हैं, जिसमें गंभीर बीमारियों सहित शारीरिक दिव्यांगता को ठीक करने का दावा किया जाता है. अंधविश्वास बढ़ाने वाली इन सभाओं में मुर्दों के जी उठने की भी बात कही जाती है.
अंधविश्वास बढ़ाने वाली चंगाई सभाओं पर रोक लगाने के लिए आज लोकसभा में नियम 377 के तहत सदन के माध्यम से अपना आग्रह रखा। चंगाई सभा के माध्यम से धर्मांतरण भी होता है और यह समस्या सिर्फ झारखण्ड की समस्या नहीं बल्कि आदिवासी बहुल हर राज्य की समस्या है। #WinterSession #Rule377 pic.twitter.com/0O3W5QzOZz
— Sanjay Seth (@SethSanjayMP) December 12, 2022
सांसद ने कहा कि यह कार्य झारखंड से बाहर के धर्म प्रचारकों व पादरियों द्वारा किया जाता है. इस वजह से चंगाई सभाओं में भीड़ बढ़ी है. इसकी आड़ में धर्मांतरण का भी कार्य हो रहा है.
सदन के माध्यम से सांसद ने आग्रह किया कि इस तरह की सभाओं पर रोक लगे. इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर कानून बनाए जाएं क्योंकि यह सिर्फ झारखंड की समस्या नहीं है. आदिवासी बहुल जितने भी क्षेत्र हैं, उन सभी की समस्या है. इस तरह के अंधविश्वास बढ़ाने वाली सभाओं पर तत्काल रोक लगानी चाहिए.
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