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HC के आदेश के बावजूद लग सकता है निकाय चुनाव पर ग्रहण, आजसू ने फिर से ओबीसी आरक्षण को लेकर SC जाने का मन बनाया

Rahul Kumar

Ranchi : राज्य में एकबार फिर निकाय चुनाव को लेकर आस जगी है. रांची की पूर्व पार्षद रौशनी खलखो और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य में निकाय चुनाव की अधिसूचना तीन सप्ताह के अंदर जारी करने का आदेश दिया है. लेकिन राज्य में होनेवाले निकाय चुनाव के लिए ओबीसी आरक्षण सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है. पूर्व में जारी निकाय चुनाव की अधिसूचना पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए ओबीसी आरक्षण पर राज्य सरकार को स्थिति साफ करने का निर्देश दिया था.

ओबीसी आरक्षण को लेकर एक बार फिर आजसू पार्टी करेगी कोर्ट का रुख

निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर न्यूज विंग संवाददाता ने गोमिया से आजसू विधायक लंबोदर महतो से बात की. विधायक ने साफ कहा कि आजसू पार्टी पिछड़ों के हक और अधिकार के लिए लड़ाई लड़ेगी. ओबीसी आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. जिसमें झारखंड सरकार की ओर से शपथ पत्र दायर यह बताया गया था कि राज्य सरकार की ओर से ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट राज्य पिछड़ा आयोग की ओर से कराया जायेगा. जबकि राज्य राज्य पिछड़ा आयोग कई वर्षों से नहीं है. ऐसे में ट्रिपल टेस्ट नहीं हुआ और एक तरह से राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने का काम किया. हमारी पार्टी फिर से कोर्ट का रुख करेगी.

तीन सप्ताह के अंदर आयोग गठन कर ट्रिपल टेस्ट करना नामुमकिन

झारखंड हाइकोर्ट ने पूर्व पार्षद रौशनी खलखो और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए निकाय चुनाव की अधिसूचना तीन सप्ताह के अंदर जारी करने का आदेश दिया है. दूसरी तरफ राज्य सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया है कि राज्य पिछड़ा आयोग से ट्रिपल टेस्ट कराये जाने के बाद चुनाव कराया जायेगा. ऐसे में तीन सप्ताह के अंदर राज्य सरकार द्वारा आयोग गठन कर ट्रिपल टेस्ट करा कर ओबीसी आरक्षण को लागू करना नामुमकिन है.

क्या है ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूला

दरअसल, विकास किशनराव गवली के मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निकाय चुनावों के लिए ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए एक फॉर्म्यूला दिया था. इसे ट्रिपल टेस्ट फार्मूला कहा गया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि निकाय चुनाव में राज्य सरकार ट्रिपल टेस्ट फार्मूले का पालन करने के बाद ही ओबीसी आरक्षण तय कर सकती है.

  1. सबसे पहले स्थानीय निकायों में पिछड़ेपन की प्रकृति को लेकर अनुभवजन्य जांच के लिए एक आयोग की स्थापना की जाये. यह आयोग निकायों में पिछ़ड़पेन की प्रकृति का आकलन करेगा और सीटों के लिए आरक्षण प्रस्तावित करेगा.
  2. आयोग की सिफारिशों के आलोक में स्थानीय निकायों द्वारा ओबीसी की संख्या का परीक्षण कराया जाये और उसका सत्यापन किया जाये.
  3. इसके बाद ओबीसी आरक्षण तय करने से पहले यह ध्यान रखा जाये कि एससी-एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कुल आरक्षित सीटें 50 फीसदी से ज्यादा न हों.

इसे भी पढ़ें – झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को दिया निर्देश, निकाय चुनाव को लेकर तीन सप्ताह में अधिसूचना जारी करें

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