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जमशेदपुर: इंकैब में फिर आया अहम फैसला, आईबीबीआई ने पूर्व आरपी शशि अग्रवाल की पात्रता खत्म की, अब वर्तमान आरपी पंकज टिबरेवाल को हटाने के लिए एनसीएलटी में अर्जी

Jamshedpur : इनसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्ट्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (आईबीबीआई)  ने इंकैब मामले में शशि अग्रवाल के आरपी बनने की अर्हता को सदा के लिए समाप्त कर दिया है. अनुशासनात्मक समिति ने पाया कि शशि अग्रवाल ने लेनदारों के दावों की पुष्टि नहीं की. उन्होंने सीओसी (कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स) की चार बैठकें आयोजित की, वह भी दावों के सत्यापन के बिना.

आईआईबीआई ने इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पूर्व आरपी और लिक्विडेटर के खिलाफ सुनवाई की, जिसमें इंकैब इंडस्ट्रीज के पुनरूद्धार की प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा कर कमला मिल्स, फस्का और पेगाशस के फर्जी दावों को मंजूर कर उन्हें फर्जी तरीके से कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स में शामिल करने को गलत पाया. साथ ही फर्जी कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स बनाने और उनकी अनुशंसा पर इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड के परिसमापन के लिए एनसीएलटी में पिटीशन लगाने के आरोपों की पूरी जांच के बाद कारवाई करते हुए शशि अग्रवाल के आरपी बनने की अर्हता समाप्त कर दी.

आईबीबीआई ने एनसीएलएटी के आदेश में जो संभावना व्यक्त की  थी उसे अपनी जांच में भी सही पाया कि सीओसी का गठन कमला मिल्स, फस्क्वा और पेगाशस के द्वारा किये गये लेनदारी के दावे के आधार पर किया गया था न कि शशि अग्रवाल द्वारा किये गये सत्यापित दावे के आधार पर. शशि अग्रवाल के फर्जीवाड़े के कारण, कमला मिल्स और फास्क्वा बहुमत के साथ सीओसी के सदस्य बन गए.

सीओसी का गठन गलत

सीओसी का गठन आबीसी की धारा 21(2) के प्रावधान का उल्लंघन है.आईबीबीआई ने अपनी जांच में पाया कि यदि  शशि अग्रवाल ने लेनदारी के दावों को सत्यापित किया होता तो सीओसी का गठन पूरी तरह से अलग होता.आईबीबीआई की अनुशासनात्मक समिति आगे नोट करती है कि इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड के सीआईआरपी (पुनरूद्धार प्रक्रिया) को एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी द्वारा 07.08.2019 को स्वीकार किया गया था और सीओसी द्वारा 05.12.2019 को आयोजित अपनी पांचवीं बैठक में इंकाब इंडस्ट्रीज को परिसमाप्त (लिक्विडेट) करने का निर्णय लिया गया था. इसके अलावा, कोई सूचना ज्ञापन जारी नहीं किया गया था. कोई पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता नियुक्त नहीं किया गया था. किसी अभिव्यक्ति (expression of interest) को आमंत्रित नहीं किया गया था. परिसमापन का निर्णय  सच्ची भावना का पालन किए बिना लिया गया था जबकि कॉरपोरेट देनदार को पुनर्जीवित करना दिवाला और दिवालियापन संहिता की आत्मा है. आईबीबीआई ने आगे पाया कि इसके अलावा ऐसा लगता है कि यह पूरी प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए की गई थी कि इंकैब कंपनी की देनदारी की कठिनाइयों को समाधान का अवसर दिये बगैर इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड को परिसमाप्त कर दिया जाय. अनुशासन समिति ने संहिता की धारा 220(2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आईबीबीआई (दिवालियापन) के विनियम 11 के उप-विनियमों (7) और (8) के साथ पेशेवर) विनियम, 2016, के तहत शशि अग्रवाल के पंजीकरण को रद्द कर दिया.जमशेदपुर मजदूरों के प्रतिनिधि भगवती सिंह ने बताया कि नये आरपी पंकज टिबरेवाल ने शशि अग्रवाल की तरह ही कमला मिल्स, फस्क्वा और पेगागस सहित दूसरे अन्य फर्जी दावेदारों के 4,000 करोड़ के फर्जी दावे को बिना सत्यापन के मंजूर कर एक बार फिर से फर्जी कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (लेनदारों की समिति) बनायी है अतः उन्होंने पंकज टिबरेवाल को तत्काल हटाने के लिए एनसीएलटी में अर्जी लगाई है.

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