
Chakradharpur : पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने 1932 आधारित स्थानीय नीति और ओबीसी को दिए गए 27 प्रतिशत आरक्षण के कैबिनेट के फैसला का स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने कहा है कि कोल्हान क्षेत्र में 1932 खतियान लागू होने से लोगों को भारी मुश्किल होगी. इसकी वजह कोल्हान में 1964 में सर्वे सेटेलमेंट हुआ था. इसलिए सरकार को यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि आखरी सेटेलमेंट कब हुआ था. उसी के आधार पर स्थानीय नीति को परिभाषित किया जाना चाहिए.
यह बातें पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने चक्रधरपुर के वन विश्रामागार में कही है. वे झारखंड आंदोलनकारी सेनानी के बैनर तले आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए चक्रधरपुर पहुंचे थे. इस कार्यक्रम में झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मान, पहचान और पेंशन दिलाने को लेकर चर्चा की गयी. झारखंड आंदोलनकारियों को कैसे परिभाषित किया जाये, इस पर भी लोगों ने अपने विचार रखे. उन्होंने कार्यक्रम के बाद एक प्रेस वार्ता में कहा कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण वर्ष 1993 में दे दिया जाना चाहिए था, लेकिन झारखंड बनने के 22 साल बाद अब जाकर ओबीसी को न्याय मिला है. बीते 22 वर्षों से झारखंड में ओबीसी के साथ अन्याय हो रहा था. अब जाकर राज्य के ओबीसी को उसका हक और अधिकार मिला है.
कहा-मेरे पास भी नहीं है 1932 का खतियान
सूर्य सिंह बेसरा ने कहा है की कोल्हान में लास्ट सर्वे सेटेलमेंट को सरकार को ध्यान में रखकर स्थानीय नीति को परिभाषित करनी चाहिए. 1932 का खतियान तो उनके पास भी मौजूद नहीं है. इसी तरह लाखों लोगों के पास कोल्हान में 1932 का खतियान नहीं है. ऐसे में अगर 1932 का खतियान आधार बन गया तो यह मामला कोर्ट में चला गया तो झारखंड सरकार की स्थानीय नीति कोर्ट कचहरी में फंसी रह जाएगी. इसलिए सरकार को इस पर काफी सोंच-समझकर फैसला लेना चाहिए.




